डायबिटीज में पैंक्रियाज के बीटा सेल्स का ट्रांसप्लांट हुआ आसान

टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित मरीजों की पैंक्रियाज में बीटा सेल्स की मृत्यु के बाद इसुलिन की दर्दनाक सुई से उपचार ही एकमात्र विकल्प बचता है. इसलिये लम्बे समय से वैज्ञानिक अपने लैब में बीटा सेल्स को विकसित करने में लगे थे. और अब तक इस दिशा में अनुसंधानकर्ताओं को कोई सफलता नहीं मिल पाई थी. लेकिन अब आपको चिंता करने की जरुरत नहीं.

क्या आप रोजाना दो तीन बार इन्सुलिन लेते हैं?

क्या आप लम्बे समय से इन्सुलिन की दर्दनाक सुई लेकर थक चुके हैं?

अगर आप इन्सुलिन लेने की वजह से अपनी ज़िन्दगी से निराश हो चुके हैं तो आपके लिये सैन फ्रांसिस्को से एक अच्छी खबर आई है.

सैन फ्रांसिस्को में अनुसंधान कर रहे वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने मानव स्टेम सेल्स को परिपक्व इंसुलिन-उत्पादक कोशिकाओं में बदलने में सफलता हासिल कर ली है.

यह सफलता कोई मामूली सफलता नहीं है. लैब में विकसित परिपक्व स्टेम सेल्स टाइप-1 डायबिटीज को जड़ से ख़त्म करने हेतु इलाज़ विकसित करने के प्रयास में एक बड़ी सफलता है. इंग्लिश में लिखी एक रिपोर्ट में अनुसंधानकर्ताओं ने कहा है कि अब वे अपने लैब में इंसुलिन पैदा करने वाली कोशिकाओं को उत्पन्न कर सकते हैं. ये कोशिकाएं आपके और मेरे शरीर में अग्नाशयी बीटा सेल्स की तरह दिखती हैं. यह उन कोशिकाओं को बनाने के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है जो मधुमेह के रोगियों में प्रत्यारोपित (ट्रांसप्लांट) की जा सकती हैं.

टाइप-1 डायबिटीज में बीटा सेल्स कैसे ख़त्म होती है?

शरीर में टाइप-1 डायबिटीज ऑटोइम्युनिटी की वजह से विकसित होती है. ऑटोइम्यून डिसऑर्डर की वजह से पैंक्रियाज के बीटा सेल्स क्षतिग्रस्त हो जाते हैं. नवभारत टाइम्स के अनुसार ऑटोइम्यून डिजीज का मतलब है कि शरीर की कोशिकाएँ इन्सुलिन बनाने वाले पैंक्रियाज की कोशिकाओं पर हमला कर देती हैं. इस हमले में शरीर की कोशिकाएँ पैंक्रियाज के बीटा सेल्स को ख़त्म कर देती है.

बीटा सेल्स ख़त्म होने के बाद पैंक्रियाज शरीर में ब्लड ग्लूकोज को नियंत्रित करने हेतु इन्सुलिन का निर्माण नहीं कर पाती है. इन्सुलिन की अनुपस्थिति में ब्लड ग्लूकोज का लेवल काफी बढ़ जाता है. और बढ़ा हुआ ब्लड ग्लूकोज लेवल मरीज़ के किसी भी अंग को क्षतिग्रस्त कर सकता है या उसे मौत के मुँह में धकेल सकता है. किसी भी अनहोनी से बचने के लिये टाइप-1 डायबिटीज के मरीजों को भोजन के साथ नियमित इन्सुलिन की सुई दी जाती है. लेकिन नियमित इंसुलिन लेने के बावजूद ऐसे मरीजों को अक्सर किडनी फेलियर, हृदयरोग और स्ट्रोक का खतरा बना रहता है.

भारत में टाइप-1 डायबिटीज और पैंक्रियाज के बीटा सेल्स का ट्रांसप्लांट

आउटलुक इंडिया के मुताबिक भारत में टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चों की संख्या 97,700 है. जाहिर सी बात है कि इन बच्चों को इन्सुलिन की सख्त जरुरत होती है. पैंक्रियाज के बीटा सेल्स का सफल ट्रांसप्लांट इन बच्चों को इंसुलिन के इंजेक्शन से मुक्ति दिला सकता है.

सैन फ्रांसिस्को से मिली यह खुशखबरी इन्सुलिन के बारे में नवम्बर 2018 से शुरू हुई हमारी चिंता ख़त्म कर सकती है. आपको याद होगा कि नवम्बर 2018 में इन्सुलिन के बारे में एक चिंताजनक खबर दुनियाभर में तेज़ी से फ़ैल गई थी. उस खबर में यह कहा गया था कि इन्सुलिन की भारी मांग और कम उत्पादन के कारण वर्ष 2030 तक डायबिटीज के चार करोड़ मरीजों को इन्सुलिन उपलब्ध नहीं हो पायेगा. अगर यह खबर आपतक नहीं पहुँच पाई तो नवभारत टाइम्स का यह आर्टिकल पढ़ें.

विकिपीडिया के अनुसार, स्टेम सेल्स में शरीर के किसी भी अंग को कोशिका के रूप में विकसित करने की क्षमता होती है. वास्तव में स्टेम सेल्स खुद को किसी भी प्रकार की कोशिका में बदल सकती हैं.

सैन फ्रांसिस्को के अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि प्रयोगशाला में विकसित बीटा सेल्स को पूरी तरह परिपक्व करने की कुंजी बीटा सेल विकास के एक अनदेखी पहलू में निहित है. अर्थात बीटा सेल्स को पूरी तरह परिपक्व करने की कुंजी उस शारीरिक प्रक्रिया में निहित है जिसके द्वारा कोशिकाएं अग्न्याशय के बाकी हिस्सों से अलग हो जाती हैं और लैंगरहंस के तथाकथित आइलेट्स का निर्माण करती हैं.

इस अनुसन्धान के बारे में अंग्रेजी में लिखी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि जीव विज्ञान में एक प्रमुख सिद्धांत यह है कि फॉर्म फ़ंक्शन का अनुसरण करता है. इसलिए अनुसंधानकर्ताओं ने यह तर्क दिया कि बीटा कोशिकाओं के ठीक से परिपक्व होने के लिए आइलेट्स का निर्माण एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया हो सकती है. इस क्षेत्र में भी संभावनाएं अनंत हैं. लेकिन आपको यह जानकर ख़ुशी होगी कि चूहों पर इस तकनीक को सफलतापूर्वक अपनाया जा चुका है. चूहों में ट्रांसप्लांट की गई आइलेट्स कुछ ही दिनों में इन्सुलिन का निर्माण करने लगी. इस बारे में अधिक जानकारी अंग्रेजी में यहाँ पढ़ें.

भारत में पैंक्रियाज के बीटा सेल्स का ट्रांसप्लांट शुरू होने में अभी काफी वक़्त है. अगर आपकी सहनशक्ति इन्सुलिन के दर्दनाक सुई को बर्दाश्त में असमर्थ है, तो आज ही इस डाइट चार्ट का पालन शुरू करें. दो से तीन सप्ताह में आपको इन्सुलिन की सुई से मुक्ति मिल जायेगी.

डायबिटीज से जुड़ी किसी भी सवाल के जवाब के लिए आप हमें +91-9852261622 पर फ़ोन कर सकते हैं.

आपकी क्या राय है? लिखने में संकोच न करें.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Register now to get updates on promotions and coupons.

Shopping cart

×