एक चुटकी दवा, डायबिटीज हवा – हर्बल है यह डायबिटीज की दवा

गया के प्रसिद्ध वैद्य जी के द्वारा जड़ी-बूटियों से निर्मित यह हर्बल दवा कुछ ही घंटों में आपके ब्लड ग्लूकोज को नियंत्रित करने में सक्षम है. मधुमेह अर्थात डायबिटीज की रामबाण दवा के लगातार सेवन से डायबिटीज रिवर्स हो सकती है. इसलिये इस दवा का नाम ही रख दिया गया ‘ एक चुटकी दवा, डायबिटीज हवा ’.

मेरा वादा है कि आज जिस आर्टिकल को आप पढ़ने जा रहे हैं, उसे अंत तक पढ़ने के बाद आप अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के लिए पहले से अधिक महत्वपूर्ण साबित होंगे. जी हाँ, आपका सम्मान बढ़ जाएगा. आप मधुमेह से पीड़ित अपने सभी रिश्तेदारों के चहेते बन जायेंगे.

आज आप जानने वाले हैं कि इस पूरे पृथ्वी पर हज़ारों लोग कैसे एक चुटकी दवा का सेवन करके अपने ब्लड ग्लूकोज को सिर्फ तीन हफ्ते में नार्मल लेवल पर ला रहे हैं. अगर आपको मेरी बात पर जरा सा भी भरोसा है तो एकांत में आकर इस आर्टिकल को पूरा पढ़िये. और समझिये कि डायबिटीज की रामबाण दवा आजतक आपके पास क्यों नहीं पहुँच पाई.

इन्सुलिन रेसिस्टेंस और टाइप-2 डायबिटीज को रिवर्स करने के लिये मेरी सलाह को मानना आवश्यक है. अगर आप दुनिया के सर्वश्रेष्ठ चिकित्सकों और नोबेल पुरुस्कार विजेताओं को सुनेंगे तो आप बिना किसी अंग्रेजी दवा या इन्सुलिन के अपने ब्लड ग्लूकोज को तेजी से नियंत्रित करना सीख जायेंगे. जी हाँ, सिर्फ एक चुटकी दवा से आप अपना ब्लड ग्लूकोज नियंत्रित रख सकते हैं.

एक चुटकी दवा, डायबिटीज हवा नामक हर्बल दवा के फायदे:

कैलोरी काउंटिंग अथवा भूखे रहना तथा बिना किसी अंग्रेजी दवा के अपने ब्लड ग्लूकोज को नियंत्रित करना सीखें.

इन्सुलिन रेसिस्टेंस को ख़त्म करके पैंक्रियाज को स्वस्थ बनाना सीखें.

डायबिटीज के दुष्परिणामों की रोकथाम करके उनसे मुक्ति पाना सीखें.

इन्सुलिन और लेप्टिन सेंसिटिविटी को बढ़ाकर अपने वजन को घटाना सीखें. ताकि फिर कभी फ़ालतू में आपका वजन न बढ़े.

मेटाबोलिक डाइट चार्ट का प्रयोग करते हुये प्राणघातक अंग्रेजी दवाओं से मुक्ति पाएँ.

एक चुटकी दवा, डायबिटीज हवा नामक इस दवा के सेवन से आप अपने एनर्जी लेवल को बढ़ा सकते हैं. यह दवा इम्यून सिस्टम को मजबूत करके मरीज़ को चिंतामुक्त करती है.

अंग्रेजी दवा, सुई, इन्सुलिन और दवाओं के साइड इफ़ेक्ट से मुक्ति पाएँ. मधुमेह को लम्बे समय तक नियंत्रण में रखने के लिए मेडिकल की इन चीज़ों की जरुरत नहीं है. तो आइये जानते हैं कि हमारी सलाह को मानकर दुनियाभर में कैसे हज़ारों लोग सिर्फ एक चुटकी दवा से डायबिटीज को नियन्त्रण में रख रहे हैं.

आपके परिवार के किस सदस्य को डायबिटीज था या है, इस बात से कोई मतलब नहीं है.

आप कितने वर्षों से मधुमेह और मोटापा का इलाज़ करा रहे हैं, इस बात से भी कोई फर्क नहीं पड़ता है.

डायबिटीज से पीड़ित अधिकतर मरीज़ लगभग हर तरह के डाइट का पालन करके ब्लड ग्लूकोज को नियंत्रित करने में असफल हो चुके हैं.

अगर आप इस बात को लेकर चिंतित हैं कि आप पहले से ही डायबिटीज की दवा या इन्सुलिन का सेवन कर रहे हैं, आपका ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ रहता है, आप कोलेस्ट्रॉल से परेशान हैं या आप डायबिटीज के किसी दुष्परिणाम से पीड़ित हैं, तो इस बात से भी कोई फ़र्क नहीं पड़ता है. इसलिये अपनी चिंता को उतार फेंकिये.

हमारे इस उपचार में किसी हानिकारक दवा अथवा सर्जरी का प्रयोग नहीं होता है.

इस हर्बल दवा की एक चुटकी इन्सुलिन से भी तेज काम करती है. और इसका कोई दुष्परिणाम भी नहीं है. एक चुटकी दवा लेकर इन्सुलिन से मुक्ति पाएँ.

लम्बे समय तक डायबिटीज से पीड़ित रहने पर दवा खाते हुये डायबिटीज के मरीज़ कई दुष्परिणामों के शिकार हो जाते हैं. क्या आपके शरीर में इनमें से कोई भी लक्षण विद्यमान है?

क्या आप दर्दनाक और कीमती सुई से अपनी उँगलियों को घायल करके निराश हो चुके हैं?

क्या आपको डायबिटीज के दुष्परिणामों की चिंता सता रही है?

क्या आपको स्ट्रोक या हृदयरोग का खतरा नज़र आ रहा है?

क्या आपको अपने भोजन या वजन पर शक है?

क्या आप दवाओं के द्वारा अपना वजन नियंत्रित करते-करते थक चुके है?

क्या आप नियमित दवा सेवन के बावजूद मधुमेह को नियंत्रित न कर पाने की वजह से निराश हो चुके हैं?

क्या आप अपने दैनिक जीवन में डायबिटीज की वजह से होने वाली परेशानियों से ऊब चुके हैं?

क्या आप लम्बे समय तक सेवन कर चुके दवाओं के दुष्परिणामों का सामना कर रहे हैं?

इन लक्षणों को रिवर्स या ख़त्म करने के लिये आसान, प्राकृतिक और स्पष्ट उपचार का कोई दुष्परिणाम नहीं है. यह एक चुटकी दवा डायबिटीज को नियंत्रित करनेवाली प्रतिष्ठित दवाओं से अधिक अच्छा, तेज़, सस्ता और सुरक्षित है.

अगर आप ब्लड ग्लूकोज को नियंत्रित करनेवाली लगभग हर दवा का सेवन करके असफल हो चुके हैं तो इस आर्टिकल को पूरा पढ़कर आप अपनी ज़िन्दगी को बदल सकते हैं. क्योंकि आज आप इतना कुछ सीख जायेंगे कि आपको अपना ब्लड ग्लूकोज नियमित टेस्ट नहीं करना पड़ेगा. और प्रतिदिन डायबिटीज की दवा खाने की झंझट से भी जल्द छुटकारा मिल जाएगा. क्योंकि एक चुटकी दवा भी आपको बाद में एक दिन छोड़कर एक दिन खाना है.

डायबिटीज की रामबाण दवा, जिसे आप परेशान होकर खोज रहे हैं, यही है.

आपके जैसे हजारों लोग बिना किसी अंग्रेजी दवा के जड़ी-बूटियों से बनी एक चुटकी दवा का सेवन करके अपनी डायबिटीज को नियंत्रित कर रहे हैं. डायबिटीज से बचाव करके मरीजों की ज़िन्दगी बचानेवाली आधुनिक दवाओं के असफल होने की कहानी आज हर किसी को पता है. ऐसे समय में एक चुटकी दवा मरीजों को डायबिटीज की अंग्रेजी दवाओं से मुक्ति दिलाती है. मरीजों की ज़िन्दगी स्वस्थ और सामान्य हो जाती है.

डायबिटीज की यह रामबाण दवा प्री-डायबिटीज और टाइप-2 डायबिटीज को रिवर्स करती है. जबकि टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित मरीजों को यह दवा इन्सुलिन का डोज घटाने और इन्सुलिन से मुक्ति पाने में मदद करती है.

और जैसा कि वाजिब भी है, इस उपचार के बारे में आप और कहीं नहीं पढ़ेंगे. क्योंकि इस बात की जानकारी आपको देकर दवा कंपनियों या चिकित्सकों को कोई फायदा नहीं होनेवाला है. अगर आप पूछना चाहते हैं, “ऐसा क्यों?” तो नीचे पढ़िये:

अगर इस उपचार (एक चुटकी दवा) के बारे में हर किसी को पता चल जाए तो दवा कंपनियों की आमदनी काफी घट जायेगी.

दवा कंपनियों और नामी चिकित्सकों को करोड़ों का नुकसान होगा.

जब दवा कंपनियों को पता चलता है कि उनकी दवा के बिना भी डायबिटीज में बेहतर तरीके से ब्लड ग्लूकोज को नियंत्रित किया जा सकता है, तो वे होने वाले नुकसान की कल्पना करके डर जाते हैं.

आप सोच रहे होंगे कि डायबिटीज को तो रिवर्स नहीं किया जा सकता है, फिर ऐसा कैसे संभव है? आपकी सोच सही है, लेकिन पूरी तरह नहीं.

अगर आप पारंपरिक दवाओं का सेवन जारी रखेंगे तो आप जिंदगी भर डायबिटीज से पीड़ित रहेंगे. क्योंकि पारंपरिक दवाएं डायबिटीज के मूल कारण का उपचार न करके उसके लक्षणों का उपचार करती है. इस प्रकार आपके मुख्य समस्या का समाधान नहीं हो पाता है.

अन्दर की बात करें तो कई चिकित्सक यह स्वीकार करते हैं कि उन्हें खुद नहीं पता कि डायबिटीज कैसे होता है. तो कुछ चिकित्सक कहते हैं कि हो सकता है कि यह जेनेटिक खराबी से होता हो. लेकिन अंग्रेजी दवाओं की एक लिस्ट बना देता हूँ, सेवन करना शुरू कर दीजिये. (आपने भी कभी ऐसा महसूस किया होगा).

जरा एक बात बताइये, जब उस चिकित्सक को यह पता ही नहीं है कि डायबिटीज क्या है, यह कैसे होता है और इसे रिवर्स कैसे करें, तो फिर उसके द्वारा लिखी दवा का सेवन आप क्यों करेंगे? लेकिन सच्चाई यही है कि लोग सिर्फ डायबिटीज ही नहीं हृदयरोग और कैंसर जैसी खतरनाक बिमारियों में भी ऐसा ही करते हैं.

इन बिमारियों के अवतरित होने के बाद से काफी समय बीत चुका है. और दुनिया के सर्वश्रेष्ठ माइक्रोबायोलोजिस्ट्स एवं मेडिकल साइंटिस्ट्स गत कई वर्षों से इसका उपचार ढूंढ रहे हैं. उन्होंने पाया कि इन बिमारियों के होने की मुख्य वजह हमारी आधुनिक जीवनशैली है.

क्या आप जानते हैं कि प्रकृति के द्वारा हमारे शरीर को खुद ठीक करने के लिए डिजाईन किया गया है? – बशर्ते हमारे शरीर को पर्याप्त मात्रा में वो सारी चीज़ें मिले जो इसे चाहिए.

आप अपने भोजन (खान-पान) में क्या-क्या शामिल करते हैं, इस चीज़ का आपके ब्लड ग्लूकोज पर बहुत बड़ा असर होता है.

हमारे भोजन का हमारे शरीर पर कितना असर पड़ता है?

प्रकृति के द्वारा हमारे शरीर को प्राकृतिक और आर्गेनिक भोजन करने के लिए डिजाईन किया गया है. हज़ारों वर्षों से हम अपने शरीर का इन चीज़ों से पोषण करते रहे हैं. इस शरीर को पानी, बीज, नट्स, घास, अनाज, जड़ी-बूटियाँ, फल और सब्जियों की आदत थी. लेकिन पिछले सौ वर्षों से हमने अपने शरीर को दी जानेवाली चीज़ों की लम्बी लिस्ट से इन चीज़ों को गायब कर दिया है.

आज हमारे शरीर की दी जानेवाली चीज़ें हैं: सबसे ज्यादा प्रिजर्वेटिव, केमिकल्स, पेस्टीसाइड, अंग्रेजी दवा, विनेगर, अल्कोहल, सिगरेट, फैट, आयल, कोकाकोला, कॉफ़ी, चॉकलेट, क्रिस्प्स, बिस्कुट, मिठाइयाँ और चीनी.

क्या आपको नहीं लगता कि इस बड़े बदलाव से हमारे शरीर को बड़ा नुकसान पहुँच रहा है? जी हाँ, इसी वजह से आज कई बीमारियाँ हमारे शरीर को परेशान करने लगती है.

जिन चीजों को हमारा शरीर पूरी तरह हजम नहीं कर सकता उन चीजों के लगातार मिलने से यह शरीर गंभीर रूप से बीमार हो जाता है. कोलेस्ट्रॉल का बढ़ जाना या ट्यूमर होना आम बात है. क्योंकि आपकी जीवनशैली और आपका भोजन आपकी पैंक्रियाज को हानि पहुँचा रहा है. पैंक्रियाज ही हमारे शरीर का वह खास अंग है जो इन्सुलिन का निर्माण करके उसे शरीर में प्रवाहित करता है.

हमारे शरीर के इस अंग को धीरे-धीरे अधिक क्षति पहुँचती है और इन्सुलिन का उत्पादन कम हो जाता है. फिर व्यक्ति को डायबिटीज से पीड़ित घोषित कर दिया जाता है.

लोग डायबिटीज को ऐसी बीमारी समझने लगे हैं जिसमें शरीर में इन्सुलिन की मात्रा कम हो जाती है. जबकि सच्चाई यह है कि डायबिटीज उस अंग की बीमारी है जो शरीर में इन्सुलिन का निर्माण करती है.

डायबिटीज क्षतिग्रस्त हो चुकी पैंक्रियाज का एक लक्षण मात्र है. आप इसे बाहरी संकेत अर्थात सिग्नल भी कह सकते हैं. और चिकित्सकों की भाषा में कहें तो पैंक्रियाज के अन्दर इन्सुलिन प्रवाह करने वाले बीटा सेल्स के क्षतिग्रस्त होने के लक्षण को ही डायबिटीज कहा जाता है.

जब बीटा सेल्स अपना काम बंद कर देते हैं तो शरीर में इन्सुलिन रेसिस्टेंस की शुरुआत होती है. और यही इन्सुलिन रेसिस्टेंस व्यक्ति को टाइप-2 डायबिटीज का मरीज़ बना देता है.

डायबिटीज किसी को यूँहीं नहीं हो जाता है. जब शरीर में कोई बड़ी खराबी आती है, तभी डायबिटीज की शुरुआत होती है. फिर भी हम इस समस्या के मूल कारण पर ध्यान नहीं देते हैं. जब तक हमारा ध्यान इस समस्या पर जाता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है. क्योंकि उस वक़्त तक शरीर की स्थिति काफी खराब हो चुकी होती है.

हमारे पूरे शरीर में पैंक्रियाज को बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान दिया जाता है. यह पेट के पास होता है और इन्सुलिन निर्माण करके उसका प्रवाह करना ही पैंक्रियाज का मुख्य काम होता है. हमारे भोजन में शामिल कार्बोहायड्रेट वो चीज़ है जो इन्सुलिन प्रवाह की गति को तेज करता है.

हमारे भोजन में मूलतः दो तरह के कार्बोहाइड्रेट्स होते हैं – तेजी से पचने वाले कार्बोहाइड्रेट्स और धीरे पचनेवाले कार्बोहाइड्रेट्स. अगर हम भोजन में फ़ास्ट पचने वाले कार्बोहाइड्रेट्स ले रहे हैं तो इसका मतलब है कि हमारे पैंक्रियाज को और अधिक इन्सुलिन बनाने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ रही है. यही मेहनत लगातार और लम्बे समय तक करने के बाद पैंक्रियाज के बीटा सेल्स क्षतिग्रस्त हो जाते हैं. और इस प्रकार इन्सुलिन बनाने का काम धीमा पड़ जाता है.

अगर हमारे भोजन में बहुत ज्यादा एसिड्स शामिल हों, तो उससे भी हमारी पैंक्रियाज ख़राब हो सकती है. क्योंकि एसिड्स पेट में आने के बाद पैंक्रियाज में ही जाते हैं. हमारे पेट में एसिड्स कहाँ से आते हैं? हमारे द्वारा खाये जाने वाले कार्बोहाइड्रेट्स, शुगर्स, अत्यधिक वसा, बहुत ज्यादा एसिड बनाने वाले भोजन और यूरिक एसिड, ये सभी पैंक्रियाज को क्षतिग्रस्त करने में अपनी भूमिका निभाते हैं.

क्या आपको मालूम है कि हर दस सेकंड के बाद दुनिया में दो नए डायबिटीज के मरीज़ पहचान में आ रहे हैं? उन्हें बस एक चुटकी दवा की जरुरत है.

कोई घटना कभी-कभार हो जाए तो चलता है. लेकिन दुनिया भर के कई करोड़ लोग एक ही स्वास्थ्य समस्या (मधुमेह) से परेशान हैं. क्या आपको नहीं लगता कि कहीं कुछ गड़बड़ चल रहा है? इतने सारे लोगों का एक साथ डायबिटीज से पीड़ित होना कोई एक्सीडेंट नहीं हो सकता.

वैज्ञानिकों के अनुसार एसिड्स की वजह से पैंक्रियाज का क्षतिग्रस्त हो जाना ही डायबिटीज होने का मूल कारण है. हमारे आधुनिक भोजन में पाये जानेवाले एसिड्स की वजह से ही हमारी पैंक्रियाज ख़राब होती है. और आप शायद यह जानकर चौंक जायेंगे कि हमारे आधुनिक डाइट के अधिकतर भोजन में पैंक्रियाज को ख़राब करने वाले एसिड्स, कार्बोहाइड्रेट्स, शुगर्स तथा फैट की भरमार होती है.

पाचन क्रिया के दौरान पेट के बाद भोजन पैंक्रियाज में ही प्रवेश करता है. अर्थात हमारे पैंक्रियाज को हमारे आधुनिक भोजन के द्वारा फेंके गए आवश्यकता से अधिक एसिड्स को भी पचाना होता है. यही वह समय होता है जब व्यक्ति में प्री-डायबिटीज विकसित होता है. लेकिन जब वह व्यक्ति अपनी पैंक्रियाज को क्षतिग्रस्त होने से नहीं बचा पाता हैं तो उसके शरीर में इन्सुलिन रेसिस्टेंस का विकास होता है. और वह टाइप-2 डायबिटीज का शिकार हो जाता है.

पहले की तुलना में अब काफी बदल चुके हमारे भोजन की वजह से हमारी पैंक्रियाज को एसिड्स, कचरे और टोक्सिन का सामना करना पड़ता है. इन्सुलिन का निर्माण करने वाले बीटा सेल्स को हमारे भोजन से मिलने वाले एसिड्स जमा होकर चारों तरफ से घेर लेते हैं. जिसकी वजह से बीटा सेल्स बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो जाते हैं. इस प्रकार पैंक्रियाज ख़राब हो जाती है और बीटा सेल्स के द्वारा इनुलिन निर्माण का काम रोक दिया जाता है.

आइये आपको पैंक्रियाज ख़राब होने की कहानी विस्तार से बताते हैं. और समझिये कि एक चुटकी दवा कितनी पावरफुल है.

पैंक्रियाज के अन्दर बीटा सेल्स होते हैं. बीटा सेल्स ही इन्सुलिन का निर्माण करते हैं. इन्सुलिन के निर्माण का काम लगातार चलता रहता है. भोजन खाने के बाद ब्लड ग्लूकोज में वृद्धि को देखते हुए बीटा सेल्स इन्सुलिन के निर्माण को गति प्रदान करती है. और जैसा कि आप जानते हैं कि जब हम जहरीला भोजन खाते हैं तो हमारा ब्लड एसिडिक हो जाता है. जिसकी वजह से बीटा सेल्स अपना काम ठीक से नहीं कर पाते हैं.

आपके सिस्टम में एसिड्स के रहते हुए बीटा सेल्स पर अधिक इन्सुलिन के निर्माण का भारी दबाव होता है. इसलिये आपकी पैंक्रियाज ठीक से काम नहीं कर पाती है. तो इसका सीधा मतलब है कि पैंक्रियाज में एसिडिटी होने की वजह से डायबिटीज होती है.

अब आप शायद इस बात को कभी नहीं भूलेंगे कि आपने जिस तरह की जीवनशैली को अपनाया है और आप जिस तरह का भोजन खाते हैं, उसकी वजह से आपके पैंक्रियाज की कोशिकाएं बहुत ज्यादा एसिडिक हो जाती हैं.

जब आप जानेंगे कि पैंक्रियाज ठीक कैसे होती है तो आप रोमांचित हो जायेंगे.

पैंक्रियाज को आराम तब मिलता है जब इसके अन्दर एसिड्स का ओवरफ्लो बंद होता है. ऐसे समय में पैंक्रियाज को एसिड्स को सोखने और उसे ख़त्म करने का काम नहीं करना पड़ता है. एसिड्स का ओवरफ्लो रुकने पर पैंक्रियाज खुद को रिजेनरेट करने लगती है. इस प्रकार पैंक्रियाज ठीक होने लगती है और धीरे-धीरे बीटा सेल्स का पुनर्निर्माण होता है ताकि इन्सुलिन के निर्माण का काम शुरू हो सके.

एक बार जब आप डायबिटीज के मूल कारण को समझ जायेंगे तो दवा के द्वारा डायबिटीज के लक्षणों से लड़ने के बजाय आप इसके मूल कारण के उपचार और अपने स्वास्थ्य के बारे में सोचने लगेंगे. अगर आप अपने डायबिटीज से सही मायने में लड़ना चाहते हैं तो आप अपने शरीर के अन्दर क्या डाल रहे हैं, इस बात पर ध्यान रखना शुरू कर दें. दवाओं के द्वारा लक्षणों का उपचार करना छोड़ दें. अंग्रेजी दवाओं को छोड़कर जड़ी-बूटियों से बनी एक चुटकी दवा का सेवन करें.

और जैसा की आप जानते हैं, डायबिटीज को नियंत्रित करनेवाली अधिकतर प्रिस्क्रिप्शन ड्रग्स सिर्फ लक्षणों का उपचार करती है. ये ड्रग्स बीमारी को ठीक करने के बजाय इम्यून सिस्टम को कमजोर करके परेशानी को और बढ़ा देती है. अर्थात जिस अंग्रेज़ी दवा का सेवन आप अपनी बीमारी को ठीक करने के लिए करते हैं, वह आपकी समस्या को और अधिक बढ़ा देती है.

डायबिटीज की अंग्रेजी दवा लेने से पहले सोचें. जड़ी-बूटियों से बनी एक चुटकी दवा लें.

डायबिटीज को नियंत्रित करनेवाली अंग्रेजी दवाओं का सेवन करके आप बहुत बड़ी गलती कर रहे हैं. क्योंकि इससे आपकी बीमारी और बढ़ती जायेगी. लोग पहले ब्लड ग्लूकोज को नियंत्रित करने के लिये एक टेबलेट लेना शुरू करते हैं. फिर कोलेस्ट्रॉल की दूसरी टेबलेट लेते है. और कुछ दिनों बाद हाई ब्लडप्रेशर के लिये भी एक टेबलेट लेना पड़ता है. फिर डिप्रेशन, न्यूरोपैथी और कई अन्य समस्यायें जो डायबिटीज की वजह से उत्पन्न होती है. लेकिन जब डायबिटीज अपनी चरम सीमा पर पहुँच जाती है तो मरीज़ को इन्सुलिन का इंजेक्शन भी लेना पड़ता है.

और सबसे ताज्जुब की बात यह है कि मरीजों को डायबिटीज का प्राकृतिक उपचार न देकर हानिकारक अंग्रेजी दवाएं लिख दी जाती है.

जरा सोचिये: अगर एलोपैथिक डॉक्टर्स के द्वारा लिखी गई अंग्रेजी दवाएं ही डायबिटीज के उपचार के लिए एकमात्र समाधान होता, तो क्या डायबिटीज की वजह से इतने लोगों की जान जाती? क्या डायबिटीज की वजह से लोग हाई ब्लडप्रेशर, हार्ट अटैक, अल्झाइमर और किडनी की बीमारी से परेशान होते.

अब आप कहेंगे कि डायबिटीज के मरीजों को तो हाईब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक, लीवर और किडनी की बीमारी जैसे दुष्परिणामों से बचने के लिये कई दवाईयाँ दी जाती है. लेकिन ये दवाएँ दुष्परिणामों से लड़ने में न सिर्फ असफल होती हैं, बल्कि डायबिटीज के मरीज़ की जान भी ले लेती हैं. (आपको सबूत चाहिए तो कमेंट बॉक्स में मांग लीजिये.)

डायबिटीज के जानलेवा दुष्परिणाम और मरीज़ के अकालमृत्यु की वजह क्या है?

डायबिटीज इंडस्ट्री ने चिकित्सकों के द्वारा लोगों के दिमाग में यह बैठा दिया है कि आपको अपने डाइट में कोई बदलाव करना बिलकुल भी जरुरी नहीं है. लोग ऐसा इसलिये मान बैठते हैं क्योंकि उन्हें समझाया गया है कि अगर आप अपने ब्लड ग्लूकोज लेवल को अंग्रेजी दवाओं से नियंत्रित रखेंगे तो आपको कुछ नहीं होगा. अर्थात आप स्वस्थ रहेंगे.

लेकिन जरा संभल के, क्योंकि यह झूठ आपकी जान ले सकता है!

“एक चुटकी दवा, डायबिटीज हवा” के बारे में पूरी जानकारी लें.

सच्चाई यह है कि जितने लम्बे समय तक आप डायबिटीज के जाल में उलझे रहकर दवाओं का उच्च डोज लेते रहेंगे उतना ही लम्बा दुष्परिणाम आपकी डायबिटीज आपके ह्रदय, किडनी, पैंक्रियाज, ब्रेन और आपके पूरे शरीर पर दिखायेगा.

वास्तव में आपकी दवा आपके शरीर को ठीक करने के लिए कुछ नहीं करती है. आपकी बीमारी के मूल कारण को ठीक करने में भी आपकी दवा कोई भूमिका नहीं निभा पाती है. उलटे आपको इन दवाओं का दुष्परिणाम झेलना पड़ता है.

इस बात को हमेशा याद रखिये कि डायबिटीज को नियंत्रित करनेवाली अंग्रेजी दवाइयां काम नहीं करती हैं.

एक अध्ययन में पाया गया है कि गंभीर जोखिम और खतरनाक दुष्परिणाम होने के बावजूद डायबिटीज की अंग्रेजी दवाएँ ब्लड ग्लूकोज को नियंत्रित रखने में सफल नहीं हो पाती हैं. अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार लगभग सभी एंटी-डायबिटिक ड्रग्स मोटापा को बढ़ावा देते हैं जो बाद में मरीज़ को इन्सुलिन पर निर्भर कर देता है. अर्थात मरीज़ इन्सुलिन डिपेंडेंट हो जाता है. इसी से पता चल जाता है कि हमें अपने लाइफस्टाइल को सुधारने पर कितना जोर देना चाहिये.

दूसरे अध्ययन से पता चलता है कि जिन मरीजों ने अपना ब्लड ग्लूकोज सबसे अधिक घटाया, उनमें हृदयाघात और कार्डियोवैस्कुलर डेथ की संभावना अधिक बढ़ गई. जबकि एलोपैथिक चिकित्सकों द्वारा 6.0% A1C या इससे कम को ‘बेहतर’ माना जाता है. आपको जानकर ताज्जुब होगा कि उस अध्ययन को इसलिये कैंसिल करना पड़ा क्योंकि अध्ययन के दौरान कई प्रतिभागियों की मौत हो गई थी. मौत की वजह क्या थी? जैसे ही मरीजों का ब्लड शुगर लेवल कम होता था, हार्ट अटैक की संख्या बढ़ जाती थी. और इस प्रकार मरने वाले मरीजों की संख्या भी बढती जा रही थी.

फिर भी डायबिटीज के इस तरह के उपचार के लिए आप साल भर में न जाने कितने रूपये लगा देते हैं. जबकि आप शायद अच्छी तरह से जानते हैं कि दवा के बजाय लाइफस्टाइल बेहतर तरीके से काम करती है.

इस बात को याद रखिये कि ब्लड ग्लूकोज को कम करनेवाली अंग्रेजी दवाइयाँ (ड्रग्स) सेवन करनेवाले मधुमेह के मरीजों की मौत उन मरीजों से पहले होती है जो इन दवाइयों का सेवन नहीं करते हैं. यह कोई मजाक नहीं है. एक जाने माने अध्ययन में पाया गया है कि एक विश्वविख्यात (ड्रग) अंग्रेजी दवा का सेवन करनेवाले मरीजों में हार्ट अटैक की सम्भावना 43% तक बढ़ जाती है. और जो मरीज़ इस ड्रग का सेवन नहीं करते उनकी तुलना में इस ड्रग का सेवन करने वाले डायबिटीज के मरीज़ की मौत की सम्भावना 64% तक बढ़ जाती है.

इसका सीधा मतलब यह है कि इस विश्वविख्यात (ड्रग) अंग्रेजी दवा का सेवन न करने से टाइप-2 डायबिटीज के मरीज़ के जिंदा रहने की सम्भावना 200% से भी अधिक बढ़ जाती है.

लेकिन मधुमेह के उपचार के लिए एक चुटकी दवा, डायबिटीज हवा नामक इस आयुर्वेदिक दवा के महत्व की कहानी यहीं ख़त्म नहीं होती है.

क्या आप जानते हैं कि डायबिटीज के मरीजों को दी जानेवाली ब्लड प्रेशर की दवा स्ट्रोक और हार्ट अटैक से मौत होने की सम्भावना को 50% तक बढ़ा देती है? और कोलेस्ट्रॉल-कम करनेवाली थेरेपी कार्डियोवैस्कुलर बीमारी की संभावना को कम करने में कितना असरदार है, यह किसी से छिपी हुई बात नहीं है. इसलिये इन दवाओं का सेवन करने से कोई फायदा नहीं है.

इस बाद को अच्छी तरह से समझ लीजिये कि दुनिया का कोई भी ड्रग आपके डायबिटीज का सफलतापूर्वक उपचार नहीं कर सकता. चाहे दवा कम्पनियाँ कुछ भी वादा कर ले. लेकिन सच्चाई यही रहेगी कि ड्रग्स आपके जीवन को और भी दुखद बना देंगे. उनका सेवन डायबिटीज से भी बड़ा जोखिम हो सकता है.

लोग डायबिटीज को नियंत्रित करनेवाली अंग्रेजी दवाओं का सेवन इसलिये करते हैं ताकि वे डायबिटीज के दुष्परिणामों से बच सकें. कार्डियोवैस्कुलर डिजीज सबसे महत्वपूर्ण दुष्परिणामों में से एक है, और आप डायबिटीज की ऐसी कोई दवा बिलकुल भी खाना पसंद नहीं करेंगे जो हार्ट अटैक तथा स्ट्रोक की सम्भावना को बढ़ा दे.

क्या आपको मालूम है कि डायबिटीज को नियंत्रित करनेवाली (ड्रग) अंग्रेजी दवा ब्लैडर कैंसर होने की सम्भावना को बढ़ा देता है?

तो फिर डायबिटीज की समस्या का समाधान क्या है?
डायबिटीज का प्राकृतिक उपचार: एक चुटकी दवा, डायबिटीज हवा

डायबिटीज और डायबिटीज के दुष्परिणामों से बचने के लिये हमें अपने शरीर को अन्दर से साफ़ करना होगा. ताकि हमारा शरीर उन एसिड्स से मुक्त हो सके जो हमारी कोशिकाओं को हानि पहुँचाते हैं. अगर हमारा शरीर साफ़ हो जाय, तो कोशिकाएँ एक बार फिर से पहले की तरह काम करना शुरू कर देती है.

इन्सान के शरीर में जब भी कोई बीमारी होती है तो उसका इम्यून सिस्टम तुरंत इससे लड़ने लगती है. इन्सान का शरीर हर घाव को भर सकता है. बीमारी से पीड़ित कोई भी अंग या क्षतिग्रस्त कोशिका खुद को ठीक करने की क्षमता रखता है. लेकिन अगर हम अपने शरीर को दूषित करते रहेंगे तो हमारा शरीर इसे झेल नहीं पायेगा.

जैसे ही आपकी पैंक्रियाज को बुरे एसिड्स से मुक्ति मिल जायेगी, यह अपने वास्तविक काम को करना शुरू कर देगी. और जब आपकी पैंक्रियाज स्वस्थ बन जायेगी तो यह पर्याप्त मात्रा में इन्सुलिन बनाकर आपके शरीर में ब्लड ग्लूकोज को नियंत्रित करने के काम में लग जायेगी. इस प्रकार आपकी डायबिटीज नियंत्रित रहने लगेगी. मानता हूँ कि आपने सोचा भी नहीं होगा कि ऐसा करना फिर कभी संभव हो पायेगा.

क्या आप जानते हैं कि लगभग हर रिसर्च में डायबिटीज को हराने के लिये डाइट और लाइफस्टाइल को बेस्ट माना गया है? तो फिर आपके चिकित्सक ने अब तक ये बात आपको क्यों नहीं बताई?

अगर डायबिटीज को नियंत्रित करने का यह तरीका हर मरीज़ को पता चल जाये तो बिलियन डॉलर डायबिटीज इंडस्ट्री को काफी नुकसान होगा. इस नुकसान से बचने के लिए दवा कम्पनियाँ डॉक्टर्स को प्रभावित करने के लिए बीस बिलियन डॉलर्स सलाना खर्च करती है. आप तो जानते ही हैं कि दवा बेचने वाले ही आजकल चिकित्सकों के लिये डायबिटीज के बारे में नईं जानकारी लाकर देते हैं.

चूँकि हमारे हेल्थकेयर सिस्टम में ऐसी कोई व्यवस्था ही नहीं है जिसके द्वारा हमें डायबिटीज का सबसे बेहतर उपचार (डाइट एंड लाइफस्टाइल एजुकेशन) दिया जा सके. इसलिए मरीजों को दूसरा उपचार (ड्रग्स एंड एलोपैथिक चिकित्सा) लेने के लिए मजबूर किया जाता है. लेकिन आँकड़ों पर ध्यान दें तो यह दूसरी चिकित्सा पूरी तरह से विफल साबित हुई है.

हर वर्ष टाइप-2 डायबिटीज के 2 मिलियन नए मरीज़ पहचान में आ रहे हैं.

डायबिटीज के दुष्परिणामों की वजह से हर दस सेकंड में एक व्यक्ति की मृत्यु हो रही है.

आज के समय में दुनियाभर में लाखों लोग इस विनाशकारी बीमारी से पीड़ित हैं लेकिन उन्हें पता ही नहीं है.

हर वर्ष डायबिटीज के 1 मिलियन मरीज़ बिना वजह मारे जाते हैं.

आइये जानते हैं कि ‘एक चुटकी दवा, डायबिटीज हवा’ नामक हर्बल दवा खरीदने पर आपको क्या-क्या फायदे होंगे.

आपकी पैंक्रियाज को बुरी तरह हानि पहुँचाने वाले टोक्सिन आज हर जगह मौजूद हैं. ये टोक्सिंस पैंक्रियाज केअन्दर इन्सुलिन का निर्माण करनेवाले बीटा सेल्स को क्षतिग्रस्त करके टाइप-1 और टाइप-2, दोनों तरह के डायबिटीज के मरीज़ की स्थिति ख़राब देते हैं. इस दवा को खरीदने पर आपको एक मेटाबोलिक डाइट चार्ट दी जायेगी. इस डाइट चार्ट की मदद से आप अपने शरीर को डेटोक्स करके बदमाश केमिकल्स को बाहर निकालना सीखेंगे.

मेटाबोलिक डाइट चार्ट की मदद से प्राकृतिक और प्रभावशाली तरीके से आप अपना ब्लड ग्लूकोज नियंत्रित करना सीख जायेंगे.

सिर्फ एक हज़ार रूपये खर्च करके आपको दो महीने के लिये ‘एक चुटकी दवा, डायबिटीज हवा’ नामक हर्बल दवा मिलेगी. साथ में मेटाबोलिक डाइट चार्ट, जो सबसे प्रभावी फल और सब्जियों के द्वारा आपको अपने शरीर से फ़ालतू एसिड्स को साफ़ करना सिखाएगा. इस प्रकार आप अपनी पैंक्रियाज को सिस्टेमेटिक एसिडोसिस से पूरी तरह मुक्त करा सकते हैं.

एक चुटकी हर्बल दवा और मेटाबोलिक डाइट चार्ट के साथ लाइफस्टाइल में बदलाव लाने से आपका ब्लड ग्लूकोज नियंत्रित रहने लगेगा. और आप खुद को स्वस्थ महसूस करेंगे.

कुछ दिन तक मेटाबोलिक डाइट चार्ट के अनुसार भोजन करने के बाद टॉक्सिक भोजन करने की आपकी इच्छा ख़त्म हो जायेगी. जिससे आपकी ज़िन्दगी बदल सकती है.

मेटाबोलिक डाइट चार्ट और एक चुटकी हर्बल दवा की मदद से आपका इम्यून सिस्टम मजबूत हो जायेगा. फिर आपको किसी बीमारी की चिंता नहीं सताएगी.

पैंक्रियाज के स्वस्थ होने पर इन्सुलिन निर्माण का कार्य सुचारू ढंग से चलने लगता है. फिर आपके ब्लड ग्लूकोज का लेवल गिरने लगेगा.जो लोग इन्सुलिन इंजेक्शन लेते हैं, उनके लिए इन्सुलिन का डोज कम करने का यही सही समय होता है. डायबिटीज की अंग्रेजी दवाओं और इन्सुलिन इंजेक्शन से मुक्ति पाने की तरफ यह पहला कदम है.

अगर इस उपचार के द्वारा आप अपने शरीर की इसी तरह मदद करते रहेंगे तो आपका शरीर धीरे-धीरे पूरी तरह ठीक हो जायेगा. इस तरह से डायबिटीज से मुक्ति पाना ही डायबिटीज का सही उपचार है.

मैं आपको पूरी तरह से आश्वस्त कर सकता हूँ कि आप भी अपनी डायबिटीज से प्राकृतिक तरीके से मुक्ति पा सकते हैं. इस उपचार को आज ही शुरू करें.

प्रस्तुत है:

एक चुटकी दवा - डायबिटीज की रामबाण दवा

डायबिटीज के उपचार के लिये एक चुटकी दवा ही काफी है.
  • टाइप-2 डायबिटीज को रास्ते में ही रोककर उसे ख़त्म कर दें.
  • दो से तीन दिन में अपने ब्लड ग्लूकोज को नियंत्रित करें.
  • यह इतना सस्ता है कि इसे एक गरीब आदमी भी खरीद सकता है.
  • डायबिटीज की अंग्रेजी दवाओं पर अपनी निर्भरता ख़त्म करें.
  • दुनिया भर में डायबिटीज के हज़ारों मरीज़ इस उपचार का लाभ उठा चुके हैं.
  • टाइप-1 डायबिटीज में इन्सुलिन का डोज घटायें.

एक चुटकी दवा, डायबिटीज हवा” नामक इस हर्बल दवा को मंगाने के लिए अपना पूरा पता पिनकोड के साथ लिखकर इस WhatsApp नंबर पर भेज दें: +91-9852261622.

अधिक जानकारी के लिये, फ़ोन करें: +91-9852261622.

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