अब कैसे जड़ से ख़त्म होगा डायबिटीज? वो भी बिना किसी दवा के?

जब तक हम किसी बीमारी की उत्पत्ति यानि जड़ को जानेंगे नहीं, हम उसे जड़ से ख़त्म करने का दावा भी नहीं कर सकते. सवाल यह है कि क्यों होती है डायबिटीज या अन्य क्षयकारी बीमारी? हम दवा खाकर डायबिटीज को नियंत्रित करना क्यों चाहते हैं? क्या दवाओं की कमी से बीमारी होती है, इसलिए हम दवा के द्वारा उसे ठीक करने का प्रयत्न करते हैं? कौन समझदार व्यक्ति इस सिद्धांत को मानेगा कि दवा के अभाव में बिमारियों का जन्म होता है और पुनः उसकी आपूर्ति कर उसे ख़त्म किया जा सकता है? मुझे लगता है 100 में से 99 लोग यह मानने से इंकार कर देंगे कि दवा के अभाव में बीमारी उत्पन्न हुई.

तो आखिर डायबिटीज का जड़ कहाँ है? उत्तर है, हमारे रहन सहन के बदलते तरीके, खान-पान एवं पर्यावरण सम्बन्धी वैश्विक बदलाव. आज के वातावरण एवं 35 वर्ष पूर्व के वातावरण में काफी नकारात्मक परिवर्तन हुए हैं. हमारा भोजन, पानी एवं हवा जिसमें हम सांस लेते हैं, कुछ भी स्वच्छ नहीं है. पर्यावरण और डायबिटीज के सम्बन्ध में बहुत कम लोग जानते हैं. इस विषय में जानकारी का भी अभाव है. मैं मानता हूँ कि वास्तविक जड़ यही है. अगर हम पर्यावरण को नहीं बदल सकते तो हमें क्या बदलना चाहिए? निश्चित रूप से हमें अपनी जीवनशैली को बदलना चाहिये.

अभी पूरा विश्व स्वास्थ्य क्रांति से गुजर रहा है. इसका कारण है – हमारा स्वास्थ्य उद्योग या सही कहें तो बीमारी उद्योग इन समस्याओं का समाधान करने में विफल रही है. आम जनमानस किसी चमत्कार की प्रतीक्षा कर रही है. चमत्कार होगा और आप खुद ही इस चमत्कार का प्रतिनिधित्व करेंगे.

डायबिटीज को जड़ से ख़त्म करने का चमत्कार कैसे होगा?

चमत्कार आपके ही अन्दर छिपा है. इसके लिए हमें जानकारी बढ़ाना होगा. हमें अपने शरीर की आवश्यकताओं को बदलते हुए परिवेश के अनुसार समझना होगा.

जैसा कि हम सभी जानते हैं, हमारा शरीर एक सूक्ष्म इकाई कोशिका से बना है. भोजन हो या पानी, यहाँ तक कि हवा भी कोशिकीय स्तर पर काम करता है. यहाँ निर्माण और विनाश की एक श्रृंखला चलती रहती है. हमें बस निर्माणकारी गतिविधियों को बल प्रदान करना है एवं शरीर स्वयं को ठीक कर लेगी. इसे हम कोशिकीय पोषण या सेल्लुलर नुट्रीशन कहते हैं.

डायबिटीज को जड़ से ख़त्म करने से पहले आइये जानते हैं कि डायबिटीज अन्य बिमारियों का कारण क्यों बनती है?

हमारा शरीर अनेक सूक्ष्म कोशिकाओं से बना है. और इन कोशिकाओं को प्रतिरक्षण उर्जा की आवश्यकता पड़ती है. यह उर्जा ग्लूकोज के द्वारा कोशिकाओं को प्रदान की जाती है. यह सामान्य जानकारी है. लेकिन ग्लूकोज को कोशिका तभी ग्रहण कर सकती है जब इन्सुलिन इस कार्य में उसकी सहायता करे. क्योंकि, इन्सुलिन ही ताले की चाबी है.

जब इन्सुलिन प्रतिरोध हो जाता है तो ग्लूकोज कोशिकाओं में न पहुंचकर रक्त में ही घूमता रहता है एवं ब्लड शुगर के लेवल को बढ़ा देता है. वहीँ कोशिकाओं को आवश्यक ग्लूकोज न मिलने के कारण वे अपने जीवन की रक्षा नहीं कर पाते हैं और अंततः मर जाते हैं. यह प्रक्रिया हमारे किडनी, लिवर एवं हर अंग में चलता रहता है. इसलिए हम सुनते रहते हैं कि डायबिटीज से किसी का किडनी फेल हो गया.

यह समझना बिलकुल आसान है. जैसे हमारे शरीर में एक पेट है उसी प्रकार कोशिका भी भूख का सामना करते-करते मर जाती है. परिणामस्वरूप, हम एक या अनेक अंगों में क्षयकारी बिमारियों का शिकार होते हैं. लेकिन इसका समाधान भी बिलकुल मौजूद है एवं कुछ हफ़्तों में सब कुछ सामान्य हो जाता है. जैसा कि मैं स्वयं भी इस समस्या से गुजरकर खुद की डायबिटीज को जड़ से ख़त्म करने सफल हो चुका हूँ. विस्तृत जानकारी के लिए मेरे इस पोस्ट को पढ़ें.

यह आर्टिकल पटना के डॉ. डी. के. सिंह के द्वारा लिखी गई है. इस आर्टिकल का सम्पादन नंदन वर्मा के द्वारा किया गया है. डॉ. सिंह डायबिटीज के एक ऐसे विशेषज्ञ हैं जिन्होंने पहले खुद की डायबिटीज जड़ से ख़त्म की. आप डॉ. डी. के. सिंह से पटना में मिल सकते हैं. अपना नंबर लगाने और कन्फर्म कराने के लिये इस नंबर पर फ़ोन करें: +91-9852261622.

Comments (3)
August 10, 2018

डॉ. डी. के. सिंह पटना में कई मरीजों को डायबिटिज की दवा से मुक्ति दिलाने में सफल रहे हैं। लेकिन खाने की दवा से मुक्ति दिलाने में “डायबिटीक पैच” भी काफी कारगर है।

Reply
    Dharmendra Singh
    December 25, 2018

    पटना मे 3 दिन में रहकर डायबिटीज ठीक करने का व्यवस्था है , जिसमें भोजन का भी प्रबंधन है।संपर्क करे 9386685765

    Reply
August 25, 2018

Wow! This is exceptionally brilliant! This is what my blogging business Needs. FREE MCX CRUDE TIPS

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