विटामिन डी खाएँ, डायबिटीज को दूर भगाएँ.

विटामिन डी

हालांकि इस विषय पर अभी और अधिक शोध करने की आवश्यकता है, लेकिन लगभग 900 स्वस्थ वयस्कों पर एक अवलोकन अध्ययन से पता चला है कि एक व्यक्ति जितना अधिक विटामिन डी लेता है, उतना ही उस व्यक्ति को बीमारी होने का खतरा कम होता है.

अधिकतर लोग मानते हैं कि विटामिन डी की कमी से हड्डी रोग होने का जोखिम बढ़ जाता है, लेकिन कुछ शोध से पता चला है कि विटामिन डी का कम सेवन डायबिटीज होने की सम्भावना को भी बढ़ा सकता है.

अगर आपने पढ़ा होगा तो पिछले कई अनुसंधानों से यह मालूम हुआ है कि विटामिन डी का कम सेवन करने से टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा बढ़ सकता है. और पिछले महीने जारी किए गए एक अध्ययन के परिणाम से यह बात अब एक अटल सत्य साबित होती नज़र आती है.

अप्रैल महीने के संस्करण में, पीएलओएस वन में एक अध्ययन प्रकाशित किया गया था. इस अध्ययन में शामिल अध्ययनकर्ताओं ने 12 वर्षों तक 903 स्वस्थ वयस्कों का नजदीक से अध्ययन किया और अध्ययन के दौरान पाया कि रक्त में विटामिन डी की कम मात्रा वाले लोगों में टाइप-2 डायबिटीज विकसित होने का जोखिम बहुत अधिक था.

विटामिन डी और डायबिटीज

इस अध्ययन के नतीजों से शोधकर्ताओं ने यह निष्कर्ष निकाला कि पर्याप्त विटामिन डी ग्रहण करने से यह संभावना कम हो जाती है कि किसी व्यक्ति में बीमारी विकसित होगा. सैन डिएगो स्कूल ऑफ मेडिसिन के कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय में एक सहायक प्रोफेसर के रूप में कार्यरत और अध्ययन में शामिल अध्ययनकर्ताओं में से एक, सेड्रिक एफ गारलैंड, कहते हैं कि जो व्यक्ति पर्याप्त विटामिन डी3 लेता है, उसमें टाइप-2 डायबिटीज विकसित होने का जोखिम केवल एक का पांचवां हिस्सा है.

डॉ. गारलैंड आगे कहते हैं कि शायद 90 प्रतिशत लोगों में इस विटामिन की कमी है, और इस कमी की वजह से डायबिटीज को विकसित होने से नहीं रोका जा सकता.

जब हमारी त्वचा सूरज की रोशनी के संपर्क में आती है तो शरीर विटामिन डी3 बनाता है, लेकिन यह विटामिन बाज़ार में पूरक (सप्लीमेंट) के रूप में भी उपलब्ध है. ध्यान दें कि फोर्टिफाइड दही और सार्डिन जैसे कुछ खाद्य पदार्थों में विटामिन डी भी होता है, लेकिन कोई भी आहार इस विटामिन का प्राथमिक स्रोत नहीं है.

जर्नल ऑफ़ क्लीनिकल एंडोक्राइनोलॉजी एंड मेटाबोलिज्म में जनवरी 2011 के एक लेख में कहा गया है कि इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिन (आईओएम) प्रतिदिन विटामिन डी के 4,000 से अधिक अंतरराष्ट्रीय इकाईयां (आईयू) लेने की सिफारिश नहीं करता है.

विटामिन डी के बारे में डॉ. गारलैंड का तर्क

लेकिन डॉ. गारलैंड का तर्क है कि लोगों को प्रति दिन 5,000 आईयू की आवश्यकता होती है. ताकि 25-हाइड्रोक्साइविटामिन डी के उनके रक्त स्तर, जो विटामिन डी की प्रोसेसिंग के दौरान लीवर के द्वारा उत्पन्न होता है, वह 50 नैनोग्राम प्रति मिलिलिटर (एनजी प्रति एमएल) की पर्याप्त मात्रा में पहुँच सके.

इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिसिन 2011 के एक लेख के द्वारा अधिकांश लोगों के लिए 20 एनजी प्रति एमएल पर्याप्त स्तर के रूप में निर्धारित करता है.

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (एनआईएच) के अनुसार, विटामिन डी कैल्शियम अवशोषण के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. पर्याप्त विटामिन प्राप्त करने से मजबूत हड्डियों और मजबूत दांतों का निर्माण होता है. और सूजन को कम करने तथा प्रतिरक्षा को प्रभावित करने में मदद मिल सकती है.

मार्च 2016 में वर्ल्ड जर्नल ऑफ डायबिटीज में प्रकाशित एक समीक्षा से पता चलता है कि विटामिन डी की कमी हृदयरोग, गुर्दे की बीमारी, उच्च रक्तचाप और कैंसर समेत कई पुरानी बीमारियों से जुड़ी हुई है. हालाँकि लेखकों का मानना है कि इस मामले में और अधिक नैदानिक ​​परीक्षणों की आवश्यकता है.

नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ हेल्थ का यह भी कहना है कि पर्याप्त मात्रा में यह आंकड़ा अभी तक प्राप्त नहीं हो पाया है कि पर्याप्त विटामिन डी के स्तर ऑस्टियोपोरोसिस और ओस्टियोमालाशिया जैसे हड्डियों से संबंधित बिमारियों के अलावा अन्य किसी भी पुरानी बीमारी को रोकते हैं.

शोधकर्ताओं ने रक्त प्लाज्मा में 25-हाइड्रोक्साइविटामिन डी के न्यूनतम स्वस्थ स्तर के रूप में 30 एनजी प्रति एमएल सेट किया है. यह स्तर इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिसिन द्वारा अनुशंसित स्तर से 10 एनजी प्रति एमएल अधिक है. उस सीमा के नीचे पड़ने वाले किसी भी प्रतिभागी को विटामिन डी की कमी वाला व्यक्ति माना जाता था.

अध्ययन में शामिल जिन प्रतिभागियों के 25-हाइड्रोक्साइविटामिन डी के रक्त स्तर 30 एनजी प्रति एमएल से ऊपर थे, उनमें टाइप-2 डायबिटीज होने की सम्भावना 25-हाइड्रोक्साइविटामिन डी के नीचे स्तर वाले लोगों की तुलना में मात्र एक तिहाई थी.

अध्ययन में शामिल आबादी में 74 वर्ष की आयु के साथ स्वस्थ वयस्कों का समावेश था जो दक्षिणी कैलिफ़ोर्निया में रह रहे थे. 1997 से 1999 के दौरान इन प्रतिभागियों को न तो डायबिटीज और न ही प्री-डायबिटीज का कोई संकेत था. शोधकर्ताओं ने 2009 में इन प्रतिभागियों का नजदीक से अध्ययन किया.

रिसर्च में शामिल शोधकर्ताओं ने उनकी 25-हाइड्रोक्साइविटामिन डी के रक्त स्तर को मापा. उनके फास्टिंग प्लाज्मा ग्लूकोज (कम से कम आठ घंटे तक उपवास के बाद ली गई रक्त शर्करा परीक्षण) और उनके मौखिक ग्लूकोज की सहिष्णुता (जो चीनी को निगलने के लिए शरीर की प्रतिक्रिया को मापता है) आदि को मापा गया.

शोधकर्ताओं को प्रतिभागियों के विटामिन डी की कमी को पूरा करने के लिए पर्याप्त मात्रा में पूरक देने की जिम्मेदारी दी गई. अध्ययन की इस अवधि के दौरान, उन्होंने अध्ययन में शामिल प्रतिभागियों के बीच डायबिटीज के 47 नए मामलों और प्री-डायबिटीज के 337 नए मामलों की सूचना दी.

विटामिन डी की कमी और टाइप-2 डायबिटीज के बीच क्या रिश्ता है?

इस अध्ययन में शामिल प्रतिभागी वृद्ध थे. और, जैसा कि अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन ने कहा है कि टाइप-2 डायबिटीज का प्रसार उम्र के साथ बढ़ता है. लेकिन डॉ. गारलैंड का कहना है कि अधिक उम्र के लोगों का अध्ययन करने से काफी कुछ समझ में आया. इस उम्र में डायबिटीज अनुभव करने की अधिक संभावना होती है, और इस बात पर विश्वास करने का कोई कारण नहीं है कि विटामिन डी की कमी टाइप-2 डायबिटीज की उच्च दर से जुड़ी हुई है. तथ्य यह है कि प्रतिभागियों के रक्त में 25-हाइड्रोक्साइविटामिन डी के पर्याप्त स्तर होंगे जो लेखकों के निरीक्षण के लिए पर्याप्त है.

कैलिफ़ोर्निया के लागुना हिल्स में मेमोरियलकेयर सैडलबैक मेडिकल सेंटर में एंडोक्राइनोलॉजिस्ट रहिल बंदूकवाला, कहते हैं कि जब वह अपने मरीजों को विटामिन डी की खुराक की सिफारिश करते हैं, तो उन्हें लगता है कि विटामिन की कमी और टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम के बीच संबंधों पर और अनुसंधान की आवश्यकता है.

डॉ. बंदूकवाला चाहते हैं कि इस विषय पर एक नियंत्रित अध्ययन हो जिसमें दो आबादी शामिल हो. जहां आप उनमें से एक में विटामिन डी की कमी को पूरक के द्वारा पूरा करते हैं [और दूसरे में नहीं]. और फिर आप इस नियम को पूरे समय में पालन करते हैं और देखते हैं कि टाइप-2 डायबिटीज और अन्य स्थितियों की घटनाएं किस प्रकार हुई.

डॉ. गारलैंड का कहना है कि उन्हें अधिक जातीय रूप से विविध आबादी में विटामिन डी की कमी और डायबिटीज के जोखिम के बीच के लिंक पर भावी शोध में दिलचस्पी है, लेकिन वह आपके आहार में अधिक विटामिन डी जोड़ने के लिए प्रतीक्षा करने की सलाह नहीं देते हैं. उन्होंने इस बात पर जोर देकर कहा है कि जिनकी त्वचा में अधिक वर्णक हैं उनमें इस कमी का एक बड़ा खतरा है.

आप अपने आहार में कोई भी नया सप्लीमेंट (पूरक) जोड़ने से पहले अपने डॉक्टर से बात करना चाहेंगे – खासकर यदि आप पहले से किसी दवा का सेवन कर रहे हैं – लेकिन मायो क्लिनिक के अनुसार, विटामिन डी विषाक्तता दुर्लभ है. विटामिन डी विषाक्तता को ही हाइपरविटामिनोसिस डी कहा जाता है.

डॉ. गारलैंड का कहना है कि एक विटामिन डी सप्लीमेंट (पूरक) आपकी मदद ही करेगा, इसके सेवन से किसी भी तरह की हानि पहुँचने की संभावना नहीं है.

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डायबिटीज को ख़त्म करने के सात प्राकृतिक उपाय

डायबिटीज को ख़त्म करने के सात प्राकृतिक उपाय

डायबिटीज को ख़त्म करने के कई उपाय आज पहले से ज्यादा प्रचलित है. और अब तक पहचान लिये गए मामलों में 95% मामले टाइप-2 डायबिटीज के हैं. यद्यपि कुछ लोगों के लिए डायबिटीज का मरीज़ बनना या इस रोग का विकास अनिवार्य है, ऐसा शायद वंशानुगत और अन्य कारकों के कारण हो सकता है. डायबिटीज क्यों होता है? इस विषय में जानने के लिये पढ़ें : एक व्यक्ति को मधुमेह अर्थात डायबिटीज कैसे होता है?

यहाँ यह बता देना आवश्यक लगता है कि अपने परिवार के भोजन की आदतों की वजह से भी कई लोग डायबिटीज के शिकार बन जाते हैं. लेकिन डायबिटीज से पीड़ित अधिकतर मरीज़ इन सात सरल उपायों को अपनाकर डायबिटीज को ख़त्म करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं.

इससे पहले कि टाइप-2 डायबिटीज पूरी तरह से विकसित हो, डायबिटीज का हर मरीज़ एक ऐसे चरण से गुजरता है जिसे पूर्व मधुमेह अर्थात प्री-डायबिटीज कहा जाता है. यह वह चरण है जिसमें मरीज़ को कुछ लक्षण दिखना शुरू हो जाता है. इन लक्षणों की अगर अनदेखी की जाती है, तो फिर डायबिटीज पूर्ण रूप से विकसित हो जाता है.

आइये जानते हैं डायबिटीज को ख़त्म करने के लिये
क्या करना चाहिये.

इन सात उपायों को अपने दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाएं. ऐसा करके आप इस बीमारी को बढ़ने से रोक सकते हैं, और अगर आपने मेटाबोलिक डाइट चार्ट को पूरी तरह से फॉलो कर लिया तो डायबिटीज को ख़त्म करने के सही तरीके को अच्छी तरह से समझ जायेंगे.

वजन कम करें

यदि आपका वजन अधिक है तो आप अपने शरीर में डायबिटीज के विकास का जोखिम उठा रहे हैं. अपनी प्लेट में भोजन की मात्रा कम करें ताकि आप धीरे-धीरे कम खाएं और अपना वजन कम करना शुरू कर दें. भूख के किसी भी दर्द से निपटने के लिए अपने भोजन से पहले एक गिलास सादा पानी या एक गिलास शक्कर-रहित पेय लें.

भोजन में वसा कम खाएँ

आपके द्वारा भोजन में खाए जा रहे वसा की मात्रा कम करें. भोजन को फ्राइ करने के बजाय ग्रिल या सेंक करके खाएँ. डायबिटीज को ख़त्म करने के लिए कम वसा वाले भोजन का उपयोग करें. सही भोजन का चुनाव करने में अगर कोई परेशानी हो, तो मेटाबोलिक डाइट चार्ट का सहारा लें.

ग्लाइसेमिक इंडेक्स की जांच करें

आप जो भोजन खा रहे हैं उसके ग्लाइसेमिक इंडेक्स की जांच करें. अगर आपको यह पता हो कि प्रत्येक भोजन में किस प्रकार की चीज़ें शामिल हैं,  तो इससे आपके ब्लड शुगर के स्तर को सामान्य बनाए रखने में मदद मिलती है. ऐसा करने से मधुमेह की पूरी शुरुआत को रोका जा सकता है. लेकिन अगर आप पहले ही डायबिटीज के शिकार बन चुके हैं तो डायबिटीज को ख़त्म करने में मदद मिल सकती है.

पर्याप्त मात्रा में पानी पीयें

हर दिन कम से कम 8 गिलास पानी पीयें. यदि आप अपने साथ पानी की एक बोतल रखते हैं और अक्सर घूंट-घूंट पिया करते हैं, तो आपको आश्चर्य होगा कि आप पूरे दिन में कितना पानी पीते हैं.

एक स्वस्थ नाश्ते का चयन करें

अगर आपको दिन में किसी भी वक़्त भूख लग जाय तो चॉकलेट बार की बजाय एक स्वस्थ नाश्ते का चयन करें. मांस या अंडे जिनमें प्रोटीन कुछ ज्यादा होती है जैसे भोजन करने से आपके ब्लड शुगर को स्थिर करने में मदद मिल सकती है. यदि आप कम कार्बोहायड्रेट युक्त भोजन खाते हैं, और व्यायाम करते हैं, तो आपके ब्लड शुगर का लेवल नीचे जाना चाहिए.

गर्म पेय बुद्धिमानी से चुनें

गर्म पेय के रूप में पूर्ण वसा वाले दूध के बजाय स्किम्ड मिल्क का उपयोग करें. यदि हो सके तो दूध या दूध से बने किसी भी प्रोडक्ट के ज्यादा सेवन से बचें. भारत में आई-कॉफ़ी ने डायबिटीज के मरीजों के बीच धूम मचा रखी है. इस कॉफ़ी में बहुत ही कम मात्रा में कैफीन है क्योंकि यह कॉफ़ी नहीं वास्तव में कॉफ़ी की शक्ल में जड़ी-बूटियाँ हैं. डायबिटीज के मरीजों को किस तरह की चाय लेनी चाहिए? इस विषय में अगर कोई शंका हो तो पढ़ें: डायबिटीज में चाय पीना स्वास्थ्यवर्धक है.

नियमित व्यायाम पद्धति में खुद को ढालें

व्यायाम करना स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता है. लेकिन अगर आप व्यायाम करने प्रति अभी भी जागरूक नहीं हुए हैं, और अपने जीवन में इसका उपयोग नहीं कर रहे हैं, तो कम मात्रा में व्यायाम करना शुरू करें. हर दिन 15 मिनट घूमने की आदत डालने से नियमित व्यायाम पद्धति में खुद को ढालने में आपको आसानी होगी.

ये सभी उपाय मधुमेह रोगियों को अपनाने की सलाह दी जाती है. यदि आप इन उपायों को अपनाते हैं तो संभवतः आप अपने स्वास्थ्य की अपूरणीय क्षति को रोक सकते हैं. डायबिटीज को ख़त्म करने के इन सात उपायों को अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ शेयर करके उनकी मदद करें.

डायबिटीज को ख़त्म करने के लिये क्या करना चाहिये?

हाई ब्लड शुगर को रोकने के लिए पांच खाद्य पदार्थ

हाई ब्लड शुगर को रोकने के लिए पांच खाद्य पदार्थ

टाइप-2 डायबिटीज के लक्षणों में बहुत प्यास, थकान और सामान्य से अधिक बार पेशाब लगना शामिल होता है. आप इन पांच खाद्य पदार्थों को अपने आहार में जोड़कर हाई ब्लड शुगर की स्थिति को रोक सकते हैं.

टाइप-2 डायबिटीज पर्याप्त इन्सुलिन का उत्पादन न करने वाले अग्न्याशय के कारण होता है या कोशिकाओं द्वारा इंसुलिन पर प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर होता है.

बिना वजह वजन घट जाना और धुंधला दृष्टि मधुमेह के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं.

जीवनशैली में परिवर्तन करके जैसे नियमित रूप से व्यायाम करना, अल्कोहल के सेवन में कटौती करना और मेटाबोलिक डाइट चार्ट के अनुसार स्वस्थ, संतुलित आहार खाने से हाई ब्लड शुगर की स्थिति को रोका जा सकता है.

टाइप-2 डायबिटीज को रोकने या फिर नियंत्रण में रखने के लिए अपने आहार में इन पाँच खाद्य पदार्थों को जोड़ें.

पोषण विशेषज्ञ डॉ. जोश एक्स ने कहा है, "कुछ खाद्य पदार्थ आपके रक्त में शर्करा के स्तर को नकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं, सूजन का कारण बनते हैं और प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाएं बढ़ा देते हैं."

डॉ. जोश एक्स आगे कहते हैं " टाइप-2 डायबिटीज एक पूरी तरह से रोके जाने योग्य और प्रतिवर्ती स्थिति है. आहार और जीवनशैली में परिवर्तन के साथ आप इस बीमारी को प्राप्त करने की संभावना को बहुत कम कर सकते हैं. यदि आप पहले से ही इस बीमारी को प्राप्त कर चुके हैं तो फिर आप इस स्थिति को उल्टा कर सकते हैं."

हाई ब्लड शुगर को कम करने के लिए खाएँ एवोकैडो

एवोकैडो जैसे कुछ फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ, ग्लूकोज अवशोषण को धीमा करने में मदद करते हैं. वे रक्त शर्करा के स्तर को भी विनियमित करते हैं. और शरीर की प्राकृतिक डिटॉक्स की प्रक्रिया को बढ़ावा देते हैं.

डॉ. जोश एक्स का कहना है कि डायबिटीज से पीड़ित हर मरीज़ को हर दिन कम से कम 30 ग्राम फाइबर खाने का लक्ष्य रखना चाहिए. इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए आप इन सब्जियों का इस्तेमाल कर सकते हैं, जैसे कि ब्रसेल्स स्प्राउट्स, मटर और चुकंदर. साथ ही साथ, एवोकैडो, जामुन, नट्स और बीज, खासकर चिया बीज और अलसी का बीज आदि का प्रयोग भी कर सकते हैं.

हाई ब्लड शुगर को कम करने के लिए खाएँ चिकन

प्रोटीन आधारित खाद्य पदार्थ शरीर द्वारा अवशोषित चीनी की मात्रा को धीमा करते हैं. पोषण विशेषज्ञों की राय है कि प्रोटीन आधारित खाद्य पदार्थ आपके ब्लड ग्लूकोज के स्तर पर भी कम प्रभाव डालता है.

डॉ. जोश कहते हैं कि साफ प्रोटीन के कुछ सबसे अच्छे स्रोतों में जंगल में पकड़ी गई मछली शामिल होती है, जिसमें ओमेगा-3 वसा होता है, जो सूजन कम करती है. घास-खाये हुए बकरे का मांस, आर्गेनिक चिकन (देसी मुर्गा), मसूर, अंडे और हड्डी शोरबा आदि को भी प्रोटीन का अच्छा स्रोत माना जाता है.

हाई ब्लड शुगर को कम करने के लिए खाएँ ब्रोकोली

ब्रोकोली पोषक तत्व क्रोमियम में समृद्ध है जो सामान्य कार्बोहाइड्रेट मेटाबोलिज्म के लिए लाभकारी है. पोषण विशेषज्ञ डॉ. जोश का मानना है कि क्रोमियम युक्त खाद्य पदार्थ शरीर की ग्लूकोज सहिष्णुता में सुधार करते हैं, और स्वाभाविक रूप से ब्लड शुगर के स्तर का संतुलन करते हैं. ब्रोकोली में क्रोमियम की उच्चतम मात्रा है, लेकिन आप इसे कच्ची पनीर, हरी बीन्स, ब्रेवर के खमीर और घास खिलाया बकरे के मांस से भी प्राप्त कर हैं.

हाई ब्लड शुगर को कम करने के लिए खाएँ पालक

पालक मैग्नीशियम से भरा हुआ है, जो ब्लड में शुगर को नियंत्रित करने में मदद करता है. कई अध्ययनों के बाद यह दावा किया गया है कि डायबिटीज मैग्नीशियम की कमी से जुड़ा हुआ है.

पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि मैग्नीशियम से भरपूर खाद्य पदार्थ, जैसे पालक, चार्ड, कद्दू के बीज, बादाम, दही और ब्लैक बीन्स, टाइप-2 डायबिटीज के लक्षणों में सुधार कर सकते हैं.

हाई ब्लड शुगर को कम करने के लिए खाएँ नारियल

नारियल में स्वस्थ वसा होता है जो ब्लड शुगर को संतुलित करने में मदद करता है. डॉ. जोश एक्स का कहना है कि शरीर शुगर के बजाय ईंधन स्रोत के रूप में मध्यम-जंजीरयुक्त फैटी एसिड का इस्तेमाल करना पसंद करता है. नारियल का दूध, घी और घास वाले मक्खन का प्रयोग करने से आपके ब्लड में शुगर के लेवल को संतुलित करने में भी मदद मिल सकती है. इसलिए इन खाद्य पदार्थों को अपने भोजन और जलपान में अवश्य शामिल करें.

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हाई ब्लड शुगर या डायबिटीज में ये पाँच चीज़ें कभी न खाएँ.

आयुर्वेद और रॉ फ़ूड डाइट में समानता

आयुर्वेद और रॉ फ़ूड डाइट में समानता

आयुर्वेद और रॉ फ़ूड डाइट के बीच कनेक्शन और समानता की खोज ही इस आर्टिकल का मुख्य उद्देश्य है. ‘आयुर्वेद’ शब्द, प्राचीन भारतीय भाषा, संस्कृत से है, और इसका अर्थ है “जीवन का ज्ञान”. जीवन के आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में आपके शरीर की अनोखी जरूरतों को सुनना और संबोधित करना शामिल है. यह आयुर्वेदिक दृष्टिकोण अपने मानसिक और भावनात्मक अवस्थाओं को पहचानना और संतुलित करना तथा आपकी आत्मा के साथ अपने संबंध को गहरा करने पर जोर देता है.

रॉ फ़ूड डाइट इस सिद्धांत पर आधारित होता है कि अपने आहार में कच्चा भोजन ज्यादा खाने से आपका शरीर सामान्य बन जाएगा और आपका शरीर एल्कलाइज हो जाएगा. यह, बदले में, मन को शरीर से जोड़ता है; इस प्रकार, आयुर्वेद और रॉ फ़ूड डाइट बहुत समान हैं. आप इन दोनों को ऐसे तरीके से कैसे कनेक्ट कर सकते हैं कि आयुर्वेद और रॉ फ़ूड डाइट आपके स्वास्थ्य के लिए अनुकूल हो? उम्मीद है कि यह आर्टिकल इस विषय में एक संक्षिप्त मार्गदर्शन प्रदान करेगा.

आयुर्वेद के तीन दोष क्या हैं?

आयुर्वेद में, यह विचार है कि आप अपने ‘दोष’ के अनुसार खाते हैं; वात, पित्त और कफ. वात हवा और आकाश के तत्वों से बना है. पित्त आग और पानी के तत्वों से बना है. कफ पानी और पृथ्वी के तत्वों से बना है. वात किस्म के लोग आम तौर पर पतले होते हैं और वजन बढ़ाने के लिए इन्हें कठिन मेहनत करना पड़ता है. इस किस्म के लोगों को पर्याप्त आराम प्राप्त करने की ज़रूरत होती है. वे किसी भी काम को बार-बार नहीं करते, क्योंकि वे आसानी से थक जाते हैं. पित्त प्रकार के लोग आम तौर पर मध्यम आकार के और अच्छी तरह से अनुपात में होते हैं. वे तेज बुद्धि के साथ-साथ बुद्धिमान भी होते हैं. कफ़ प्रकार के लोग मजबूत, भारी आकृति के होते हैं. वे हमेशा आसानी से वजन हासिल करने के कगार पर होते हैं. वे अक्सर जीवन के बारे में सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं.

तो, इसका क्या मतलब है, और यह आपके लिए कैसे लागू होता है?

आयुर्वेद में, यह माना जाता है कि प्रत्येक व्यक्ति को एक प्रभावशाली दोष द्वारा शासित किया जाता है और आपको उस दोष के अनुसार भोजन खाना चाहिए. हालांकि, यह आर्टिकल आयुर्वेद और रॉ फ़ूड डाइट के संबंध में है, इसलिए मैं केवल इन दोनों आहारों के साथ मेल खाने वाले खाद्य पदार्थों का उल्लेख करूंगा.

  • वात संतुलन: मीठे फल, खुबानी, एवोकैडो, केला, जामुन, अंगूर, खरबूजे, शतावरी, बीट्स, ककड़ी, लहसुन, मूली, तुरई.
    परहेज: सूखे फल, सेब, क्रैनबेरी, नाशपाती, तरबूज, ब्रोकोली, गोभी, फूलगोभी, कच्चा प्याज.
  • पित्त संतुलन: मीठे फल, एवोकैडो, नारियल, अंजीर, आम, सूखे बेर, मीठी और कड़वी सब्जियां, गोभी, ककड़ी, ओकरा, आलू.
    परहेज: खट्टे फल, जामुन, केले, प्लम, संतरे, नींबू, तीखी सब्जियां, लहसुन, प्याज.
  • कफ संतुलन: सेब, खुबानी, जामुन, चेरी, क्रैनबेरी, आम, आड़ू, तीखी और कड़वी सब्जियां, ब्रोकोली, अजवाइन, लहसुन, प्याज.
    परहेज: मीठा और खट्टा फल, केला, नारियल, खरबूजे, पपीता, मिठाई और रसदार सब्जियां, आलू, टमाटर.

आयुर्वेद में बहुत से ऐसे सुझाव हैं, जिनका अनुवाद एक रॉ फ़ूड डाइट के रूप में बहुत आसानी से हो सकता है. इस तरह के सुझाव हैं:

  1. मुख्य रूप से मौसमी फल, सब्जियां, नट, बीज और अनाज खाएं.
  2. हमेशा अपने दोष के अनुसार खाएं.
  3. प्रत्येक दो सप्ताह में एक दिन के लिए उपवास रखें.
  4. एक नियमित भोजन की नियमितता स्थापित करें.
  5. अपने जीवन से कैफीन युक्त, कार्बोनेटेड और मादक पेय पदार्थों को हटा दें या सीमित करें.
  6. हर्बल चाय, फलों और सब्जियों का जूस पीयें.

डायबिटीज का सबसे सफल प्राकृतिक उपचार

डायबिटीज का सबसे सफल प्राकृतिक उपचार

डायबिटीज कभी ठीक नहीं होता. यही बात डायबिटीज के हर मरीज़ को डॉक्टर के द्वारा कहा जाता है.

जब किसी को जवानी में ही डायबिटीज हो जाय और उसे ऐसा कहा जाय. तो महसूस होता है मानो आँखों के सामने अँधेरा छा गया हो. और जिंदगी एक बोझ बन गयी हो.

कई मरीजों को डोक्टर के चैम्बर से निकलते वक़्त रोता देखा गया है.
तो कई लोग चिल्लाने लगते हैं, “नहीं, मैं ज़िन्दगी भर दवा पर आश्रित नहीं रह सकता.”

“दवा नहीं लेने पर आपकी जान जा सकती है” ऐसा डॉक्टर कहते हैं.

लोगो को इस बात पर भरोसा नहीं होता. हर व्यक्ति खुद के लिए अच्छे जीवन की कल्पना करता है.

लेकिन डायबिटीज का पता चलते ही मरीजों को नियमित रूप से दवा सेवन करने की सलाह दे दी जाती है.

दुनिया में 42.2 करोड़ मरीज़ डायबिटीज से पीड़ित हैं.

डायबिटीज इन्सान की कोशिकाओं में आई खराबी का एक लक्षण है जो बाद में उसे कई तरह के दुष्परिणाम जैसे- अंधापन, किडनी फेलियर, हार्ट अटैक, इत्यादि झेलने को मजबूर करता है. और ऐसा होने की वजह सिर्फ दवा लेकर डायबिटीज को कण्ट्रोल करना है.

तो क्या हुआ? मैं आपको इतनी बातें क्यों बता रहा हूँ?

मैं दुसरे सवाल का जवाब पहले दूंगा.

मेरा नाम नंदन वर्मा है. और मैं आपको इनती बातें इसलिये बता रहा हूँ...

क्योंकि मैं नहीं चाहता कि आप भी अन्य मरीजों की तरह ज़िन्दगी भर दवा खाते रहें. और डायबिटीज के दुष्परिणामों को झेलते रहें.

जब मैंने डायबिटीज के बारे में अध्ययन करना शुरू किया तो मुझे इसकी भयानकता के बारे में ज़रा सा भी आभास नहीं था.

लेकिन अब मैंने अपना होमवर्क पूरा कर लिया है. अपने इस अनुसन्धान में मैंने कुछ आँखे खोल देने वाले और कुछ चौकाने वाले तथ्यों को पाया है. और मैंने डायबिटीज से पीड़ित मरीजों के लिए एक नई आशा की खोज की है.

बहुत सारे लोगों को जब पता चलता है कि वे डायबिटीज से पीड़ित हैं. तो डायबिटीज के बारे में जो कुछ भी उन्हें बताया जाता है, एक कान से सुनकर दुसरे कान से निकाल देते हैं. लेकिन यह बात महत्वपूर्ण है. क्योंकि हर व्यक्ति जो डायबिटीज से पीड़ित है वह आपकी और मेरी तरह ही है. किसी की माँ तो किसी के पिताजी. किसी की बहन तो किसी का भाई. किसी का बेटा या बेटी. दादा-दादी, नाना-नानी. पड़ोसी या दोस्त. या फिर साथ काम करने वाले लोग.

आप नहीं चाहते की आप ज़िन्दगी भर डायबिटीज के मरीज़ बने रहें. लेकिन वर्तमान चिकित्सा व्यवस्था किसी को डायबिटीज मुक्त करने में सक्षम नहीं दिखती.

क्या आप जानते हैं कि हर दिन 200 से अधिक डायबिटीज से पीड़ित मरीजों का कोई न कोई अंग काटा जाता है? और यह संख्या पूरे साल में 70,000 से अधिक हो जाती है.

और यह जानकर तो आपको काफी दुःख होगा कि हर चार में से एक मरीज़ ऐसा होता है जिसे अपने डायबिटीज के बारे में तब पता चलता है जब उसकी हालत काफी ख़राब हो चुकी होती है.

लेकिन सबसे बुरी बात यह है कि अंगों को काटना ही अनियंत्रित ब्लड शुगर का सबसे खतरनाक हिस्सा नहीं है...

आपको शायद पता हो या न हो....

डायबिटीज की वजह से अल्जाइमर, डिमेंशिया, हार्ट फेलियर और कैंसर भी होता है.

जब किसी के शरीर में ज्यादा ग्लूकोज हो जाता है तो ब्लड में कैंसर के ट्यूमर के लिए इतने पोषक तत्व मौजूद हो जाते हैं कि कैंसर के ट्यूमर का विकास खतरनाक गति से होने लगता है.

इसलिये हार्वर्ड मेडिकल स्कूल कैंसर सेण्टर ने चेतावनी दी है कि कैंसर के 80% मामले अनियंत्रित ब्लड ग्लूकोज और इन्सुलिन की वजह से सामने आ रहे हैं.

लेकिन यह कहानी यहीं ख़त्म नहीं होती है.

न्यूरोलॉजी नामक मेडिकल जर्नल में छपे एक लेख में पाया गया कि डायबिटीज के मरीजों को डिमेंशिया होने का खतरा दोगुना होता है.

ब्लड में जब ग्लूकोज की मात्रा ज्यादा हो जाती है. और वही ब्लड जब दिमाग से होकर लगातार गुजरती है. तो अल्जाइमर और कई अन्य तरह के डिमेंशिया होने का खतरा बढ़ जाता है. जब मुझे यह पता चला तो ऐसा लगा मानो डायबिटीज वास्तव में परमाणु से भी ज्यादा खतरनाक है.

लोग डायबिटीज को कण्ट्रोल करते रहते हैं और डायबिटीज खतरनाक रूप धारण करता रहता है.

एक अध्ययन से पता चला है कि अगर आपको डायबिटीज हो तो एक स्वस्थ इन्सान की तुलना में आपको हार्ट अटैक होने की सम्भावना ग्यारह गुणा ज्यादा होती है. एक उम्र हो जाने के बाद वैसे भी हार्ट अटैक होने का खतरा हमेशा बना रहता है. लेकिन जब पता चले की डायबिटीज होने की वजह से हार्ट अटैक होने का खतरा और भी ज्यादा हो जाता है तो चिंता होना लाजिमी है.

दुसरे अध्ययन से पता चला कि डायबिटीज की वजह से स्ट्रोक का खतरा 150% बढ़ जाता है. और स्ट्रोक के दौरान डायबिटीज की वजह से ब्लड का दिमाग तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है.

अधिकतर लोग मानते हैं कि स्ट्रोक 17% मामलों में ही भयानक होता है.

लेकिन अगर आप डायबिटीज से पीड़ित हैं तो स्ट्रोक का मतलब 100% मौत है.

मैं जानता था कि डायबिटीज एक बुरी चीज़ है. लेकिन इसकी भयानकता का एहसास मुझे तब हुआ जब मुझे इन बातों का पता चला.

अगर ब्लड शुगर का बढ़ना और टाइप-2 डायबिटीज इतना खतरनाक है तो फिर अधिकतर चिकित्सक इस बीमारी के मूल कारण को नज़रंदाज़ करते हुए लक्षण आधारित उपचार की सलाह क्यों देते हैं.

(खासकर तब, जब नए अनुसन्धान के द्वारा डायबिटीज के वास्तविक कारण का पता चल चुका है. और उसी अनुसन्धान के द्वारा ब्लड ग्लूकोज को नियंत्रित करने का आसान तरीका विकसित हो चुका है.)

(इसका छोटा सा जवाब यह है कि बीते कुछ वर्षों के दौरान 11 बड़ी-बड़ी फार्मा कंपनियों को घूस देते हुए पकड़ा गया है. ये कम्पनियाँ अस्पतालों और चिकित्सकों को मोटी रकम घूस के रूप में देकर अपनी दवा लिखवाते थे. लेकिन इस बारे में अधिक जानकारी मैं आपको बाद में दूंगा.)

पहले, मैं आपको डायबिटीज के उपचार के बारे में कुछ बताना चाहता हूँ. आपको नए वैज्ञानिक खोज के बारे में बताना चाहता हूँ. ताकि उनके प्रयोग से आप भी अपना ब्लड शुगर नियमित कर सकें या डायबिटीज से मुक्ति पा सकें.

इसका श्रेय डायबिटीज के महान अनुसंधानकर्ताओं को जाता है जिन्होंने इस दशकों पुराने रहस्य को सुलझाया.

दुनियाभर के अस्पतालों में लोग प्राकृतिक रूप से डायबिटीज मुक्त हो रहे थे. लेकिन किसी को मालूम नहीं था कि ऐसा कैसे हो रहा था.

मालूम तब हुआ जब अनुसंधानकर्ताओं को इसका जवाब मिला. और जैसा कि आप जानते हैं कि डायबिटीज के उपचार को इन अनुसंधानकर्ताओं ने सदा के लिए बदल दिया.

इस नई प्रक्रिया के द्वारा मरीज़ की पैंक्रियास काम करने लगती है. पैंक्रियास शरीर का वो हिस्सा है जो इन्सुलिन रेसिस्टेंस को दूर रखते हुए शरीर में ग्लूकोज के स्तर को स्वस्थ बनाये रखता है.

इस प्रक्रिया के द्वारा (जो मैं आपको बताने वाला हूँ) आप अपने डायबिटीज को ठीक कर सकते हैं. आपको इस प्रक्रिया को अपनाने के बाद दवा से भी मुक्ति मिल सकती है.

जैसा की आप इन्टरनेट पर देखते होंगे, यह उस तरह की कोई नौटंकी नहीं है. आपको ढेर सारा पानी पीने की सलाह नहीं दी जायेगी. न ही आपसे ये कहा जाएगा कि आप अपने भोजन को विनेगर में डुबोकर रखें.

यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसे मेडिकल अनुसंधानकर्ताओं के द्वारा खोजा गया है.

लेकिन मैं आपको आगाह करना चाहता हूँ कि 245 बिलियन डॉलर की औषधि उद्योग अपने महंगे इन्सुलिन और खाने की दवा को बेचकर खूब फल-फूल रहा है. इन दवाइयों के सेवन के दर्दनाक साइड इफेक्ट्स हैं. इनके सेवन से सिर्फ डायबिटीज के लक्षण को ही दबाया जा सकता है. और जब तक मरीज़ जिंदा रहता है तब तक इनका सेवन चलता रहता है.

आपको पता होना चाहिए:

वर्ष २०१४ के अंत में फ़ेडरल गवर्नमेंट ने डायबिटीज की दवा बनाने वाली कंपनी Sanofi पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया. इस दवा निर्माता के ऊपर लाखों डॉलर घूस के रूप में अस्पतालों और चिकित्सकों को देने का आरोप लगा. घूस की यह रकम देकर आप और हम जैसे निर्दोष लोगों को उनकी दवा लिखी जाती है. और Sanofi तो उन 40 दवा निर्माता कंपनियों में से सिर्फ एक ही है जिनपर पिछले दस वर्षों में इसी तरह के धोखधड़ी का आरोप लगा है.

अगर यह खबर फ़ैल जाय कि पैंक्रियास को ठीक करके डायबिटीज से मुक्ति पाई जा सकती है तो बड़ी फार्मा कंपनियों को अरबों डॉलर का नुकसान होगा. तो आप कल्पना कर सकते हैं कि उन धोखेबाज़ कंपनियों को यह बिलकुल अच्छा नहीं लग रहा होगा कि आप इस सच्चाई को पढ़ रहे हैं.

क्योंकि अगर आप एक बार इस रहस्य को जान गए तो आप कुछ ही हफ़्तों में डायबिटीज से मुक्ति पा सकते हैं. (कुछ लोग तो एक या दो सप्ताह में ही ठीक हो जाते हैं.)

  • इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपकी बीमारी कितनी पुरानी है.
  • इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपकी उम्र कितनी है.
  • इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपका ब्लड शुगर कितना ज्यादा रहता है.

जैसे ही आपको पता चलेगा कि आपकी पैंक्रियास कैसे ठीक हो सकती है...

...तो आप कष्टप्रद इन्सुलिन और ऊँगली में सुई चुभोने के झंझट से मुक्त हो जायेंगे.

...तो आप मोटा और अरुचिकर बनाने वाली दवाइयों को अलविदा कह पायेंगे.

...तो आप जल्द मृत्यु, अंग को कटवाने और जानलेवा सर्जरी की चिंता से मुक्त हो जायेंगे.

...तो आप कष्टप्रद तथा हतोत्साहित करनेवाली झुनझुनी जो आपके हाथों, पैरों या शरीर में जहाँ कहीं भी होता है, से मुक्त हो जायेंगे.

...तो आप इस चिंता से भी मुक्त हो जायेंगे कि आपके आँखों की रौशनी कब आपका साथ ज़िन्दगी भर के लिए छोड़ेगी.

...तो आप इस चिंता को भी छोड़ देंगे की आपको अपना ब्लड शुगर जांचना है.

...और आप कभी भी खुद को अपने परिवार या दोस्तों पर बोझ नहीं समझेंगे.

ठीक उन लोगों की तरह जिन्होंने इस प्रक्रिया को अपनाकर डायबिटीज से मुक्ति पा लिया है.

सुनिए!

ये आपकी गलती नहीं है कि आपको डायबिटीज है. और किसी के पतले या मोटे होने से भी कोई फर्क नहीं पड़ता.

एक बार आपको डायबिटीज होने के मुख्य कारण का पता लग जाये तो फिर आप अपनी दवा की जरूरतों को बहुत कम कर सकते हैं. या ख़त्म कर सकते हैं. (जिससे आप कल्पना कर सकते हैं कि उन ग्यारह धोखेबाज़ दवा कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ेगा.)

इसलिये आप अपने अधूरे काम को ख़त्म करके कागज़ और कलम लेकर बैठ जाएँ.

आप जानने ही वाले हैं कि डायबिटीज को कैसे ख़त्म करें.

अब मैं आपको एक कहानी बताने जा रहा हूँ. ईमानदारी से कहूं तो इस कहानी की मदद से आप डायबिटीज मुक्त हो सकते हैं.

कुछ महीने पहले मैं डायबिटीज के एक मरीज़ से मिला. उमेश शर्मा नाम का यह मरीज़ वर्षों से इस बीमारी से पीड़ित था.

उसे हमेशा इस बात की चिंता रहती थी की वह क्या खाए कि उसका ब्लड शुगर कम हो जाय. वह खुद को अपने परिवार पर बोझ समझता था और उसके परिवार वाले भी उसके बचने की उम्मीद छोड़ चुके थे.

हर दिन उसे अपने ब्लड शुगर की जांच के बाद इन्सुलिन की वो कष्टप्रद सुई लेनी पड़ती थी. हर महीने अच्छीखासी रकम इन्सुलिन खरीदने में ही खर्च हो जाती थी.

उमेश शर्मा ने अपने डॉक्टर की सलाह पर डायबिटीज की अन्य दवाइयों का भी प्रयोग किया. लेकिन उन दवाइयों के प्रयोग से उनकी जेब खाली होती चली गयी और वो दिखने में अरुचिकर लगने लगे.

साथ ही साथ, न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ़ मेडिसिन के द्वारा किये गए अध्ययन में पाया गया कि डायबिटीज की दवाओं की वजह से हार्ट अटैक से मौत होने की सम्भावना बहुत ज्यादा अर्थात 64% तक बढ़ जाती है.

जब कभी भी उमेश शर्मा जी अपने परिवार के साथ छुट्टियाँ बिता रहे होते थे. तो भी वो चैन से नहीं रह पाते थे. उन्हें हमेशा अपने ब्लड शुगर और इन्सुलिन की चिंता रहती थी.

डायबिटीज की वजह से उनका जेब खाली हो रहा था. शरीर बर्बाद हो रहा था. और उनकी ज़िन्दगी दुखदायी बन गयी थी.

उमेश शर्मा को लगता था मानो वो कहीं फंस गए हों.

आपको भी शायद पहले कभी ऐसा महसूस हुआ हो. आपको इस बात का डर सताता होगा कि आपकी डायबिटीज आपको अंत में मारने से पहले आपकी ज़िन्दगी को हर दिन ख़राब करती जायेगी.

उन्होंने कई अस्पतालों के नामी चिकित्सकों से उपचार करवाया. लेकिन हर चिकित्सक ने उन्हें इन्सुलिन लेने की सलाह दी.

उन्हें विश्वास नहीं हो रहा था. उन्होंने ईश्वर से दुआ माँगना शुरू कर दिया कि उन चिकित्सकों की बात झूठ निकले. भविष्य अंधकारमय और डरावना लग रहा था.

(उन्हें इस प्रक्रिया के बारे में अभी तक मालूम नहीं था. लेकिन अगर ये धोखेबाज़ दवा कम्पनियाँ घूस देकर चिकित्सकों से अपनी दवा नहीं लिखवाते तो उमेश शर्मा को डायबिटीज को जड़ से ख़त्म करनेवाली इस प्राकृतिक पद्धति के बारे में पहले ही मालूम होता.)

उमेश शर्मा को फेसबुक के द्वारा डायबिटीज के प्राकृतिक उपचार के बारे में जानकारी मिली.

और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस प्राकृतिक उपचार की मदद से अब तक हजारों लोगों को डायबिटीज से मुक्ति मिल चुकी है.

कुछ तो है जिससे डायबिटीज ठीक हो सकता है और अनुसंधानकर्ता इसी बात का पता लगाने लगे.

अब हम पहले ही जानते हैं कि डायबिटीज के मरीजों की पैंक्रियास के चारों ओर चर्बी जमा रहती है. लेकिन वर्षो तक अनुसंधानकर्ताओं को लगता रहा कि यह डायबिटीज का ही प्रभाव है. उन्होंने पाया कि-

पैंक्रियास के चारों ओर जमा चर्बी ही इस बीमारी का प्रमुख कारण है.

आप जानते होंगे कि पैंक्रियास इन्सुलिन का निर्माण करती है. इन्सुलिन वो हार्मोन है जिसकी मदद से आपका शरीर ब्लड ग्लूकोज को सोखता है. इसका मतलब यह हुआ कि पैंक्रियास ही वह अंग है जिसपर आपके ब्लड ग्लूकोज लेवल को नार्मल रखने की जिम्मेवारी होती है. यह एक कठिन काम है. अगर पर्याप्त मात्रा में इन्सुलिन नहीं मिला तो आपके ब्लड शुगर का लेवल आसमान छूने लगेगा.

जब पैंक्रियास के आसपास चर्बी जमा होती है तो इसकी वजह से हर चीज़ बिगड़ जाती है. चर्बी पैंक्रियास के ऊपर आक्रमण कर उसे दबाती है और इस प्रकार उसे पर्याप्त इन्सुलिन बनाने से रोकती है. इस प्रकार मरीज़ के शरीर का इन्सुलिन रेसिस्टेंस बढ़ जाता है.

इसका मतलब यह हुआ कि मरीज़ के ब्लड को कम इन्सुलिन प्राप्त होता है. और जितना इन्सुलिन उसमे होता है उसकी मदद से मरीज़ का शरीर ब्लड शुगर को पूरी तरह नहीं सोख पाता.

इसी जमा चर्बी की वजह से आपके ब्लड ग्लूकोज का लेवल खतरनाक रूप से बढ़ा हुआ रहता है और आप डायबिटीज के शिकार हो जाते हैं.

जमी हुई चर्बी से छुटकारा पाइये आपको डायबिटीज से मुक्ति मिल जायेगी.

जमी हुई चर्बी आखिर कैसे पिघलती है?

अंततः अनुसंधानकर्ताओं को इसका जवाब मिला.

जिस मरीज़ की चर्बी को पिघलाना है उसे कुछ दिनों के लिए मेटाबोलिक डाइट चार्ट फॉलो करना होता है.

इस डाइट चार्ट में उचित मात्रा में फैट, शुगर, कार्बोहायड्रेट और आवश्यक विटामिन और मिनरल होता है जो पैंक्रियास के चारों ओर जमा चर्बी पर हमला कर उसे नष्ट कर देता है.

इतनी जल्दी चर्बी से मुक्ति पाकर उमेश शर्मा जी को ऐसा महसूस हो रहा था मानो उनकी पैंक्रियास को एक नया जीवन मिल गया हो.

जब जमी हुई चर्बी नष्ट हो गयी तो पैंक्रियास सुचारू ढंग से काम करने लगी. फिर पैंक्रियास ने सही मात्रा में इन्सुलिन का निर्माण कर ब्लड ग्लूकोज को नियमित कर दिया और इन्सुलिन रेसिस्टेंस को भी कम कर दिया.

इस डाइट चार्ट को एक निशित अवधि तक फॉलो करने के बाद डायबिटीज के हर मरीज़ की दवा की जरुरत पहले कम हुई, बाद में ख़त्म हुई. अनुसंधानकर्ताओं की ख़ुशी का ठिकाना नहीं था. उन्होंने डायबिटीज के वास्तविक कारण की खोज की थी. और उन्होंने एक ऐसा समाधान निकाला था जो सबकी नज़रों में महीनों तक सही था.

और तब से उन्हें लोगों को यह समझाने की जरुरत ही नहीं पड़ी कि वो सही हैं...

...वो इसे साबित कर सकते थे.

पैंक्रियास को स्वस्थ बनाने के लिए उन्होंने एक डाइट चार्ट बनाया. अपने डाइट चार्ट का पालन डायबिटीज के हर तरह के मरीज़ से करवाया. पुरुष, महिला, जवान, बूढ़े, नए मरीज़ और जिन मरीजों को दशकों से डायबिटीज था.

परिणाम चौकाने वाले थे...

जिस किसी ने भी इस अध्ययन को पूरा किया उनकी पैंक्रियास के चारों ओर जमा चर्बी गायब हो चुकी थी. उनका ब्लड शुगर नार्मल हो चूका था और उनका डायबिटीज भी वापस जा चुका था.

हर मरीज़ खुद को दवा लेना बंद करनेवाली स्थिति में पा रहा था.

मैं एक बार फिर से कहूँगा: हर मरीज़.

100%.

याद रखिये, इन परिणामों को अन्य लोगों द्वारा बड़ी ही कठोरतापूर्वक जांचा गया. इसका मतलब है कि दुसरे अनुसंधानकर्ताओं ने इनकी सत्यता की कठोरतापूर्वक जांच की.

जब मुझे यह पता चला कि यह कितना सफल है तो मैं उत्साहित भी हुआ. और मेरे मन में क्रोध भी उत्त्पन्न हुआ.

उत्साहित इसलिये क्योंकि डायबिटीज के मरीजों को भविष्य के लिए आशा मिल गयी थी.

और गुस्सा इसलिये क्योंकि अनुसंधानकर्ताओं ने अपना अनुसन्धान कई वर्ष पहले पूरा किया था.

तो फिर जब उमेश शर्मा जी डायबिटीज से परेशान थे तो उन्हें सबसे पहले इस अनुसन्धान के बारे में क्यों नहीं मालूम हुआ. उनसे कहा जाना चाहिए था कि आपको यह बीमारी है. अब आइये इससे मुक्ति पाइये.

इसके बदले में उनसे क्या कहा गया? “आपको यह बीमारी है. आइये, लक्षणों पर मरहम लगा देते हैं.”

क्योंकि डायबिटीज की दवाओं और इन्सुलिन की सुई का यही मतलब है कि ये सिर्फ लक्षणों का उपचार करते हैं. जबकि आपकी बीमारी का प्रमुख कारण आपकी पैंक्रियास के चारों ओर जमा चर्बी है.

अब मैं इस बात की जरा भी शिकायत नहीं कर रहा था कि मुझे इस प्रक्रिया के बारे में क्यों नहीं मालूम था. आगे जो मुझे मालूम हुआ उससे मेरा खून खौल उठा.

फ़ेडरल गवर्नमेंट ने डायबिटीज की दवा बनाने वाली कंपनी Sanofi पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया.

बड़ी दवा कम्पनियाँ चिकित्सकों और अस्पतालों को घूस देकर अपनी दवा लिखवाती है.

Sanofi फ्रांस की एक कम्पनी है. इस कंपनी पर अमेरिका में चिकित्सकों और अस्पतालों को घूस देकर कंपनी के द्वारा बनाई गयी डायबिटीज की दवा लिखवाने का आरोप लगा है.

और यह बात सबसे बुरी नहीं है.

बीते महज दस वर्षों में टॉप 25 में से 11 दवा कम्पनियाँ इसी तरह की घूसखोरी का आरोप झेल रही है.

(और टॉप 25 में से 24 कम्पनियाँ दुसरे तरह के धोखाधड़ी का आरोप झेल रही हैं. जिनमे खतरनाक साइड इफेक्ट्स को छुपाना, सफलता दर के बारे में झूठ बोलना और गैरकानूनी तरीके से कीमत बढ़ा देना शामिल है.)

पिछले वर्ष, अकेले अमेरिका में दवा कंपनियों ने धोखाधड़ी के आरोप में जुर्माने की रकम के रूप में 3.75 बिलियन डॉलर चुकाया. जो पिछले आठ वर्ष के दौरान वसूले गए कुल रकम से भी ज्यादा है. समस्या और भी बुरी होती जा रही है.

तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि इस प्राकृतिक चिकित्सा की खबर लोगों तक नहीं पहुँच पाई. Sanofi जैसी बड़ी दवा कम्पनियाँ चिकित्सकों को घूस देकर अपनी दवा आपको लिखवा रही है.

जाहिर सी बात है, हर चिकित्सक को घूस नहीं दिया जा सकता. लेकिन उन्हें ऐसा करने की जरुरत भी नहीं है. सिर्फ कुछ चिकित्सको को घूस देकर ही इस नई खोज को फैलने से रोका जा सकता है.

इसलिये अगर आप अपने डायबिटीज को खुद से नियंत्रित करना चाहते हैं तो सबकुछ आपपर निर्भर करता है.

अमेरिका के एक पांचसितारा होटल में एक शेफ के रूप में काम करनेवाले एक मरीज़ ने इस प्राकृतिक पद्धति में थोड़ा बदलाव किया. और चूँकि वो एक शेफ थे, उन्होंने इस डाइट चार्ट के सभी प्रमुख पहलुओं पर काफी ध्यान दिया. उन्होंने इस डाइट चार्ट को स्वादिष्ट बनाने के लिए इसमें अपनी सुरुचि जोड़ दी.

अपने द्वारा बदलाव करने के बाद जब उन्होंने उस डाइट चार्ट को आजमा कर देखा तो यह काम कर गया.

सिर्फ तीन हफ़्तों के बाद उस शेफ के ब्लड ग्लूकोज का लेवल सामान्य हो चुका था. और उन्हें इन्सुलिन की कोई जरुरत नहीं थी.

लेकिन इतना जानने के बावजूद मैं जानता था कि मेरा अनुसन्धान पूरा नहीं हुआ था.

समझने की कोशिश कीजिये...

अनुसंधानकर्ताओं के अध्ययन में शामिल 50% प्रतिभागियों की पैंक्रियास के चारों ओर एक बार फिर से चर्बी जमा होने लगी और उनकी बीमारी वापस आ गई.

मुझे डायबिटीज को सदा के लिए ख़त्म करने का तरीका ढूंढना था इसलिये मुझे इसका पता लगाना जरूरी लगा.

आखिर किस वजह से 50% प्रतिभागियों को डायबिटीज से मुक्ति नहीं मिल पाई?

मुझे निम्नलिखित बातें मालूम हुई:

अगर आप अपने मेटाबोलिज्म को सही कर लें, तो आपकी डायबिटीज कभी वापस नहीं आएगी.

अब, मेटाबोलिज्म को स्वस्थ बनाने के लाखों तरीके हैं लेकिन अनुसंधानकर्ताओं को उन तरीकों की तलाश थी जो खासकर डायबिटीज के मरीजों के लिए लाभदायक हो.

इसलिये उन्होंने इसके लिए कुछ शर्तें चुन ली:

  • पहली शर्त, मेटाबोलिज्म कम से कम समय में स्वस्थ बनना चाहिए.
  • दूसरी शर्त, मरीज़ को कोई शारीरिक परिश्रम न करना पड़े.
  • तीसरी शर्त, मरीज़ अपने घर में रहकर आराम से इसे कर सके.

अनुसंधानकर्ताओं ने दो ऐसी चीज़ों को खोजा जो हमारे भोजन में सामायतः पाया जाता है. अगर किसी मरीज़ को डायबिटीज हो या ब्लड शुगर बहुत ज्यादा बढ़ गया हो, तो उसे ये चीज़ें नहीं खानी चाहिए. जब मुझे इस बात का पता चला तो मुझे बिलकुल भरोसा नहीं हुआ. लेकिन तब मैंने डायबिटीज के कुछ मरीजों को इन दोंनो चीज़ों को अपने डाइट चार्ट से निकाल देने को कहा. और तब उन्होंने देखा कि उनके ब्लड शुगर का एवरेज लेवल नीचे आ रहा है.

ये रही वो दो चीज़ें: मटर और मकई

विश्वास नहीं हो रहा है, न? कोई बात नहीं, Clinical Nutrition नामक एक पत्रिका द्वारा किये गए अध्ययन में पाया गया कि ये दोनों ही चीज़ें अधिकतर लोग सप्ताह में 2-3 बार खाते हैं. और इनमे बहुत सारे स्टार्च वाले कार्बोहायड्रेट और शुगर पाए जाते हैं जो आपके ब्लड शुगर के लिए उतने ही ख़राब होते हैं जितने कि चीनी वाले शरबत और सोडा.

जिस भोजन को खाने के बाद डायबिटीज वापस चली जाती है उसका स्वाद बढाने के लिए मुझे कुछ मसालों की एक लिस्ट भी मुझे मिली.

ये रहे वो मसाले: तेजपात, दालचीनी, अजवायन, कुठरा/मार्जारम और लहसुन.

और कुछ ऐसी चीज़ें जो मैंने कभी नहीं सोचा था....

चेरी का रस,  नाशपाती/एवोकाडो का रस, बादाम का रस और ब्लूबेरी फल का रस.

ये चीज़ें प्राकृतिक तरीके से ब्लड शुगर को कम तो करती ही है. साथ ही साथ इन्सुलिन रेसिस्टेंस को भी ख़त्म कर देती है.

तो फिर डायबिटीज के मरीजों को ऊपर के उन दो चीज़ों को कभी-कभार खाना चाहिए और अपने अधिकतर भोजन के ऊपर उनमें से एक या दो मसालों को छिड़कने की शुरुआत कर देनी चाहिए. बहुत जल्द आपका ब्लड शुगर पहले से ज्यादा कण्ट्रोल में रहने लगेगा.

चीज़ें जरुर बदलेंगी...

अनुसन्धान यहीं पर नहीं रुका

कुछ मरीजों की डायबिटीज वापस जाने के बाद फिर से खिड़की से झाँकने लगी थी. वापस आने की कोशिश कर रही थी.

अंत में एक दिन मैं भाग्यशाली निकला: मुझे इस कठिनाई का भी समाधान समझ आ गया.

आप क्या खाते हैं सिर्फ इससे कुछ नहीं होता. आप कब खाते है इससे भी फर्क पड़ता है.

ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में समय की बहुत बड़ी भूमिका है.

एक बार जब मुझे इस बात का एहसास हुआ तो मैंने हर उस स्टडी को पढ़ा जो मुझे मिला. और अलग-अलग टाइमिंग के असर को समझा.

अंततः मुझे सबसे अच्छी सूची मिली. मुझे पता चल गया कि कौन सा भोजन कब खाना चाहिये.

(सबसे अच्छी बात यह है कि यह एक अस्थायी प्रोग्राम है जैसे कि डाइट चार्ट. एक बार आपका डायबिटीज ख़त्म हो जाय तो आपका काम हो गया.)

क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि मैं इस नई खोज के साथ कितना उत्साहित हुआ था?

मैंने कई मरीजों को डायबिटीज मुक्त होते हुए देखा है.

अमेरिका के एक व्यक्ति जब इस डाइट चार्ट को फॉलो करने के बाद अपने चिकित्सक से मिलने पहुंचे तो क्या हुआ? यह जानकार आप हैरान हो जायेंगे.

उनके चिकित्सक जांच करना चाहते थे कि वे कैसे हैं.

और उसके बाद शल्य क्रिया के द्वारा उनके पैरों को काटने की तैयारी करना चाहते थे.

वे अस्पताल गए और उनके चिकित्सक ने उनकी जांच की. और फिर वे जांच कक्ष में बैठे रहे.

पहले उनके चिकित्सक ने खूब दिमाग लगाया. “इस जांच में कुछ गड़बड़ है. हम फिर से करेंगे.”

इसलिये उन्हें लम्बा इंतज़ार करना पड़ा.

अंत में उनके चिकित्सक वापस आये. अपने क्लिप बोर्ड की तरफ देखते हुए उन्होंने पूछा.

“आपने क्या किया?

थोड़ी देर के लिए उनको लगा की उनके चिकित्सक उनपर गुस्सा हो रहे हैं.

उन्होंने फिर पूछा, “आपने क्या बदला?” “कोई नई डाइट?”

उन्होंने अपने चिकित्सक को अपनी पैंक्रियास को स्वस्थ बनाने के तरीके के बारे में बताया.

उनके चिकित्सक ने कहा, “बढ़िया है, इसी वजह से तुम्हारे पैर और तुम्हारी ज़िन्दगी बच गई.”

अब हमें तुम्हारे अंगो को काटने की कोई जरुरत नहीं. तुम्हारी जांच में तुम इतने स्वस्थ दिखते हो कि अब तुम 100 साल तक जियोगे. छः हफ्ते पहले तुम डायबिटीज के ऐसे मरीज़ थे जिसे मैंने पहले कभी नहीं देखा था. अब ऐसा लगता है मानो तुम्हें डायबिटीज हुआ ही न हो.

मैं चाहता हूँ कि आप कल्पना करें कैसा लगता है जब किसी डायबिटीज के मरीज़ को उसका डॉक्टर कहे, “आपका डायबिटीज गायब हो चुका है.”

अचानक उस व्यक्ति की पूरी ज़िन्दगी उसके सामने आ जाती है.

इन्सुलिन की दर्दनाक सुइयों से चिपके रहने की कोई जरुरत नहीं.

परिवार और दोस्तों पर खुद को बोझ समझने की कोई जरुरत ही नहीं.

डायबिटीज सचमुच ख़त्म होता है.

बड़ी दवा कम्पनियाँ हर वर्ष डायबिटीज की वजह से 245 बिलियन डॉलर से भी अधिक कमाती है. और वो भली भांति जानते हैं कि उनके हर एक ग्राहक की कीमत क्या है. हर वर्ष डायबिटीज का एक ग्राहक नॉन-डायबिटिक ग्राहक की तुलना में इनको 278743.69 रुपये ज्यादा की आमदनी देता है. जो जीवन भर में 5576209.33 रुपये से भी ज्यादा हो जाता है.

लेकिन ये पैसे उनको तभी मिलेंगे जब वो आपकी बीमारी के कारण के बदले लक्षणों को मैनेज करवाए.

और जैसा कि उन 11 बड़ी दवा कंपनियों ने कर दिखाया है, वे अपने इस मुनाफे को जारी रखने के लिए कुछ भी करेंगे. यहाँ तक कि चिकित्सकों को घूस देकर उनसे अपनी दवा लिखवायेंगे.

अगर मैं इस बात को लोगों तक पहुँचाना चाहता हूँ तो सबकुछ मुझपर ही निर्भर है.

मैंने निर्णय किया की डायबिटीज की मुख्य वजह की सच्चाई जानने वालों का एक समूह बनाया जाय. मेरे दोस्त, पड़ोसी, परिवार के लोग और रिश्तेदारों (जिनको डायबिटीज था) से मैंने इस चीज़ की शुरुआत की. मैंने उन्हें अपने अनुसन्धान के बारे में बताया. और मैंने उनसे आग्रह किया कि मैंने जो कुछ सीखा है उसे वे खुद आजमा कर देखें.

मुझे इसके परिमाण पर भरोसा नहीं हुआ.

जिस किसी ने भी इस डाइट चार्ट को फॉलो किया वो डायबिटीज मुक्त हो चुका था.

वे मुझे ठीक से धन्यवाद नहीं दे पा रहे थे.

(जाहिर सी बात है कि डाइट चार्ट के काम करने के लिए जरुरी है कि आप डाइट चार्ट के हिसाब से काम करें.)

जब मैंने एक बार देख लिया कि इस डाइट चार्ट से लोगों को कितनी मदद मिल रही है...

मैं जान गया कि मुझे कुछ बड़ा करना होगा. पैंक्रियास को स्वस्थ बनाने के बारे में दुनिया को बताना होगा.

इसलिये मुझे जो कुछ भी मिला मैंने हर उस चीज़ को इकठ्ठा किया:

  • 48 हफ़्तों में डायबिटीज को ख़त्म करने के लिए डाइट प्लान.
  • डायबिटीज के मरीजों के मेटाबोलिज्म को स्वस्थ बनाने का तरीका ताकि डायबिटीज फिर कभी वापस न आ सके.
  • और आपके ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के लिए भोजन ग्रहण करने का सही समय.

बड़े ही मेहनत से इन सभी प्राणरक्षक अनुसंधानों को एक आसान गाइड में बदला गया है.

मैं जानता था कि यह कितनी बड़ी चीज़ थी.

मैं जानता था कि बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो मेरे इस काम में बाधा पहुँचाने का प्रयास करेंगे, लेकिन मैं सच्चाई को फैलाने के लिए संकल्पित था.

मैंने इस सच्चाई को इन्टरनेट पर शेयर करने का फैसला किया.

जल्द ही दुनियाभर में लोग इस प्राकृतिक प्रक्रिया को अपनाकर डायबिटीज से मुक्ति पाने लगेंगे.

और यह काम करने लगेगा.

यह आसान तरीका लोगों की जान बचाएगा, लोगों को आशाएं देगा और भविष्य के प्रति आशावान बनाएगा.

यदि आप अभी तक पढ़ रहे हैं तो इसका मतलब है कि आप भी इस अभियान में शामिल होना चाहते हैं.

मैं चाहता हूँ कि आपके पास भी अपना एक डाइट चार्ट हो.

मैं चाहता हूँ कि आप भी उन लोगों में से एक बनें जो डायबिटीज को खुद से नियंत्रित करना सीखना चाहते हैं. इसलिये आइये आपको पहले बताते हैं कि आपको क्या मिलेगा.

पहले आपको डायबिटीज से जुडी सच्चाई से परिचित कराया जाएगा. और फिर आपको अपने पैंक्रियास को स्वस्थ बनाने तथा डायबिटीज से मुक्ति पाने के लिए डाइट चार्ट समझाया जाएगा.

आइये आपको डिटेल में बताता हूँ...

आपको डायबिटीज के मुख्य कारण का वैज्ञानिक विवरण दिया जाएगा. और फिर बताया जाएगा कि इसे ठीक करना कितना आसान है. एक बार जब आप जान जायेंगे कि डायबिटीज आपकी गलती का नतीजा नहीं है और इसके होने का वास्तविक कारण क्या है तो आगे बढ़कर इस समस्या से निपटना शुरू करने के लिए आप तैयार हो जायेंगे.

आपको उस डाइट चार्ट के बारे में बताया जाएगा जो आपके शरीर के पोषक तत्वों की जरुरत को पूरा कर आपकी पैंक्रियास को स्वस्थ बनाएगा और फिर आप अपने डायबिटीज को अलविदा कह पायेंगे.

आपको सरल निर्देशों के द्वारा इस डाइट चार्ट का उपयोग करना सिखाया जायेगा. अगर आप समोसे, बिस्कुट और भुजिया खाना कुछ दिनों के लिए छोड़ सकते हैं तो आप इसे कर सकते हैं.

साथ ही साथ आप उन महँगी दवाइयाँ और इन्सुलिन को फेंकने के योग्य बन पायेंगे क्योंकि आप अपने शरीर को एक बार फिर से खुद ब्लड ग्लूकोज को नियंत्रित करना सिखायेंगे.

जैसा की मैं पहले ही आपको बता चूका हूँ कि जब आपकी मेटाबोलिज्म स्वस्थ हो जायेगी, आप इस बीमारी के लिए वापस लौटने के सारे दरवाजे बंद कर देंगे. आप हमेशा के लिए इसे भगा देंगे.

और सबसे अच्छी बात यह है कि जब इन चीज़ों के द्वारा आपके इन्सुलिन अवशोषण दर में वृद्धि हो रही होगी तो आपकी चर्बी भी घटेगी, आपको अधिक उर्जा की प्राप्ति होगी और आपको हृदयरोग होने का खतरा भी कम हो जाएगा. मेटाबोलिज्म को स्वस्थ बनाने का यह तरीका अकेले ही आपकी ज़िन्दगी बदल सकता है.

डायबिटीज को जड़ से ख़त्म करनेवाले इस डाइट चार्ट की मदद से डर और निराशा से भरे इस वक़्त को आप अलविदा कह सकते हैं. और डायबिटीज से मुक्त होकर आप अपनी ज़िन्दगी का आनंद उठा सकते हैं.

अब आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि...

परिणाम कितने दिनों में दिखेंगे?

अध्ययन में लोगों को 4 हफ्ते और 8 हफ्ते के बाद जांचा गया.

  • 4 हफ़्तों के बाद 50% लोगों के ब्लड ग्लूकोज का लेवल नार्मल हो चूका था.
  • 24 हफ़्तों के बाद 100% लोगों का डायबिटीज गायब हो चूका था.

सबसे कम 3 दिन लगे.

इसलिये अगर आप इस डाइट प्लान को आज से अपना लेते हैं तो आपको आज से छः महीने के बाद डायबिटीज से मुक्ति मिल जायेगी.

डाइट चार्ट फॉलो करने के 1 सप्ताह के बाद...

  • ज्यादातर लोगों ने कहा कि पहले ही दिन से उन्होंने खुद को ज्यादा उर्जावान महसूस किया.
  • सुबह जागने के बाद महसूस हुआ मानो कई वर्षों के बाद सचमुच में आराम किया हो.
  • सप्ताह के अंत में ब्लड ग्लूकोज का लेवल कम हो रहा था.

अगर आप आज ही इस डाइट चार्ट का पालन करना शुरू कर दें तो आज से एक महीने के बाद आप अपनी ज़िन्दगी का आनंद लेना शुरू कर सकते हैं. और फिर आपको कभी भी डायबिटीज की वजह से अपने अंगों को गंवाने या मौत की चिंता नहीं होगी.

अगर आप भी उन हजारों लोगों की तरह डायबिटीज से मुक्ति पाना चाहते है तो –

आप अपनी दवा लेना तुरंत बंद न करें. जब तक आपके चिकित्सक खुश होकर आपका प्रिस्क्रिप्शन रद्द न करे तब तक अच्छा रहेगा कि आप प्राकृतिक तरीके से अपनी पैंक्रियास को ठीक कर लें. अपने ब्लड शुगर को नियंत्रित कर लें. मैं सभी दवाइयों के खिलाफ नहीं हूँ. कुछ बीमारियों में सिर्फ दवा ही काम आती है. लेकिन डायबिटीज उस तरह की बीमारी नहीं है. आपकी दवा सिर्फ लक्षणों पर काम करती है. एक बार आपकी पैंक्रियाज ठीक हो गयी और आपने डायबिटीज के मूल कारण को ख़त्म कर दिया तो लक्षण रहेंगे ही नहीं. फिर आप अपने चिकित्सक की सलाह पर डायबिटीज को कण्ट्रोल करनेवाली महँगी दवाइयों से सदा के लिए छुटकारा पा सकते है.

Download: Type-2 Diabetes Metabolic Diet Chart for Diabetes