डायबिटीज को ख़त्म करने के सात प्राकृतिक उपाय

डायबिटीज को ख़त्म करने के सात प्राकृतिक उपाय

डायबिटीज को ख़त्म करने के कई उपाय आज पहले से ज्यादा प्रचलित है. और अब तक पहचान लिये गए मामलों में 95% मामले टाइप-2 डायबिटीज के हैं. यद्यपि कुछ लोगों के लिए डायबिटीज का मरीज़ बनना या इस रोग का विकास अनिवार्य है, ऐसा शायद वंशानुगत और अन्य कारकों के कारण हो सकता है. डायबिटीज क्यों होता है? इस विषय में जानने के लिये पढ़ें : एक व्यक्ति को मधुमेह अर्थात डायबिटीज कैसे होता है?

यहाँ यह बता देना आवश्यक लगता है कि अपने परिवार के भोजन की आदतों की वजह से भी कई लोग डायबिटीज के शिकार बन जाते हैं. लेकिन डायबिटीज से पीड़ित अधिकतर मरीज़ इन सात सरल उपायों को अपनाकर डायबिटीज को ख़त्म करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं.

इससे पहले कि टाइप-2 डायबिटीज पूरी तरह से विकसित हो, डायबिटीज का हर मरीज़ एक ऐसे चरण से गुजरता है जिसे पूर्व मधुमेह अर्थात प्री-डायबिटीज कहा जाता है. यह वह चरण है जिसमें मरीज़ को कुछ लक्षण दिखना शुरू हो जाता है. इन लक्षणों की अगर अनदेखी की जाती है, तो फिर डायबिटीज पूर्ण रूप से विकसित हो जाता है.

आइये जानते हैं डायबिटीज को ख़त्म करने के लिये
क्या करना चाहिये.

इन सात उपायों को अपने दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाएं. ऐसा करके आप इस बीमारी को बढ़ने से रोक सकते हैं, और अगर आपने मेटाबोलिक डाइट चार्ट को पूरी तरह से फॉलो कर लिया तो डायबिटीज को ख़त्म करने के सही तरीके को अच्छी तरह से समझ जायेंगे.

वजन कम करें

यदि आपका वजन अधिक है तो आप अपने शरीर में डायबिटीज के विकास का जोखिम उठा रहे हैं. अपनी प्लेट में भोजन की मात्रा कम करें ताकि आप धीरे-धीरे कम खाएं और अपना वजन कम करना शुरू कर दें. भूख के किसी भी दर्द से निपटने के लिए अपने भोजन से पहले एक गिलास सादा पानी या एक गिलास शक्कर-रहित पेय लें.

भोजन में वसा कम खाएँ

आपके द्वारा भोजन में खाए जा रहे वसा की मात्रा कम करें. भोजन को फ्राइ करने के बजाय ग्रिल या सेंक करके खाएँ. डायबिटीज को ख़त्म करने के लिए कम वसा वाले भोजन का उपयोग करें. सही भोजन का चुनाव करने में अगर कोई परेशानी हो, तो मेटाबोलिक डाइट चार्ट का सहारा लें.

ग्लाइसेमिक इंडेक्स की जांच करें

आप जो भोजन खा रहे हैं उसके ग्लाइसेमिक इंडेक्स की जांच करें. अगर आपको यह पता हो कि प्रत्येक भोजन में किस प्रकार की चीज़ें शामिल हैं,  तो इससे आपके ब्लड शुगर के स्तर को सामान्य बनाए रखने में मदद मिलती है. ऐसा करने से मधुमेह की पूरी शुरुआत को रोका जा सकता है. लेकिन अगर आप पहले ही डायबिटीज के शिकार बन चुके हैं तो डायबिटीज को ख़त्म करने में मदद मिल सकती है.

पर्याप्त मात्रा में पानी पीयें

हर दिन कम से कम 8 गिलास पानी पीयें. यदि आप अपने साथ पानी की एक बोतल रखते हैं और अक्सर घूंट-घूंट पिया करते हैं, तो आपको आश्चर्य होगा कि आप पूरे दिन में कितना पानी पीते हैं.

एक स्वस्थ नाश्ते का चयन करें

अगर आपको दिन में किसी भी वक़्त भूख लग जाय तो चॉकलेट बार की बजाय एक स्वस्थ नाश्ते का चयन करें. मांस या अंडे जिनमें प्रोटीन कुछ ज्यादा होती है जैसे भोजन करने से आपके ब्लड शुगर को स्थिर करने में मदद मिल सकती है. यदि आप कम कार्बोहायड्रेट युक्त भोजन खाते हैं, और व्यायाम करते हैं, तो आपके ब्लड शुगर का लेवल नीचे जाना चाहिए.

गर्म पेय बुद्धिमानी से चुनें

गर्म पेय के रूप में पूर्ण वसा वाले दूध के बजाय स्किम्ड मिल्क का उपयोग करें. यदि हो सके तो दूध या दूध से बने किसी भी प्रोडक्ट के ज्यादा सेवन से बचें. भारत में आई-कॉफ़ी ने डायबिटीज के मरीजों के बीच धूम मचा रखी है. इस कॉफ़ी में बहुत ही कम मात्रा में कैफीन है क्योंकि यह कॉफ़ी नहीं वास्तव में कॉफ़ी की शक्ल में जड़ी-बूटियाँ हैं. डायबिटीज के मरीजों को किस तरह की चाय लेनी चाहिए? इस विषय में अगर कोई शंका हो तो पढ़ें: डायबिटीज में चाय पीना स्वास्थ्यवर्धक है.

नियमित व्यायाम पद्धति में खुद को ढालें

व्यायाम करना स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता है. लेकिन अगर आप व्यायाम करने प्रति अभी भी जागरूक नहीं हुए हैं, और अपने जीवन में इसका उपयोग नहीं कर रहे हैं, तो कम मात्रा में व्यायाम करना शुरू करें. हर दिन 15 मिनट घूमने की आदत डालने से नियमित व्यायाम पद्धति में खुद को ढालने में आपको आसानी होगी.

ये सभी उपाय मधुमेह रोगियों को अपनाने की सलाह दी जाती है. यदि आप इन उपायों को अपनाते हैं तो संभवतः आप अपने स्वास्थ्य की अपूरणीय क्षति को रोक सकते हैं. डायबिटीज को ख़त्म करने के इन सात उपायों को अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ शेयर करके उनकी मदद करें.

डायबिटीज को ख़त्म करने के लिये क्या करना चाहिये?

हाई ब्लड शुगर को रोकने के लिए पांच खाद्य पदार्थ

हाई ब्लड शुगर को रोकने के लिए पांच खाद्य पदार्थ

टाइप-2 डायबिटीज के लक्षणों में बहुत प्यास, थकान और सामान्य से अधिक बार पेशाब लगना शामिल होता है. आप इन पांच खाद्य पदार्थों को अपने आहार में जोड़कर हाई ब्लड शुगर की स्थिति को रोक सकते हैं.

टाइप-2 डायबिटीज पर्याप्त इन्सुलिन का उत्पादन न करने वाले अग्न्याशय के कारण होता है या कोशिकाओं द्वारा इंसुलिन पर प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर होता है.

बिना वजह वजन घट जाना और धुंधला दृष्टि मधुमेह के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं.

जीवनशैली में परिवर्तन करके जैसे नियमित रूप से व्यायाम करना, अल्कोहल के सेवन में कटौती करना और मेटाबोलिक डाइट चार्ट के अनुसार स्वस्थ, संतुलित आहार खाने से हाई ब्लड शुगर की स्थिति को रोका जा सकता है.

टाइप-2 डायबिटीज को रोकने या फिर नियंत्रण में रखने के लिए अपने आहार में इन पाँच खाद्य पदार्थों को जोड़ें.

पोषण विशेषज्ञ डॉ. जोश एक्स ने कहा है, "कुछ खाद्य पदार्थ आपके रक्त में शर्करा के स्तर को नकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं, सूजन का कारण बनते हैं और प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाएं बढ़ा देते हैं."

डॉ. जोश एक्स आगे कहते हैं " टाइप-2 डायबिटीज एक पूरी तरह से रोके जाने योग्य और प्रतिवर्ती स्थिति है. आहार और जीवनशैली में परिवर्तन के साथ आप इस बीमारी को प्राप्त करने की संभावना को बहुत कम कर सकते हैं. यदि आप पहले से ही इस बीमारी को प्राप्त कर चुके हैं तो फिर आप इस स्थिति को उल्टा कर सकते हैं."

हाई ब्लड शुगर को कम करने के लिए खाएँ एवोकैडो

एवोकैडो जैसे कुछ फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ, ग्लूकोज अवशोषण को धीमा करने में मदद करते हैं. वे रक्त शर्करा के स्तर को भी विनियमित करते हैं. और शरीर की प्राकृतिक डिटॉक्स की प्रक्रिया को बढ़ावा देते हैं.

डॉ. जोश एक्स का कहना है कि डायबिटीज से पीड़ित हर मरीज़ को हर दिन कम से कम 30 ग्राम फाइबर खाने का लक्ष्य रखना चाहिए. इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए आप इन सब्जियों का इस्तेमाल कर सकते हैं, जैसे कि ब्रसेल्स स्प्राउट्स, मटर और चुकंदर. साथ ही साथ, एवोकैडो, जामुन, नट्स और बीज, खासकर चिया बीज और अलसी का बीज आदि का प्रयोग भी कर सकते हैं.

हाई ब्लड शुगर को कम करने के लिए खाएँ चिकन

प्रोटीन आधारित खाद्य पदार्थ शरीर द्वारा अवशोषित चीनी की मात्रा को धीमा करते हैं. पोषण विशेषज्ञों की राय है कि प्रोटीन आधारित खाद्य पदार्थ आपके ब्लड ग्लूकोज के स्तर पर भी कम प्रभाव डालता है.

डॉ. जोश कहते हैं कि साफ प्रोटीन के कुछ सबसे अच्छे स्रोतों में जंगल में पकड़ी गई मछली शामिल होती है, जिसमें ओमेगा-3 वसा होता है, जो सूजन कम करती है. घास-खाये हुए बकरे का मांस, आर्गेनिक चिकन (देसी मुर्गा), मसूर, अंडे और हड्डी शोरबा आदि को भी प्रोटीन का अच्छा स्रोत माना जाता है.

हाई ब्लड शुगर को कम करने के लिए खाएँ ब्रोकोली

ब्रोकोली पोषक तत्व क्रोमियम में समृद्ध है जो सामान्य कार्बोहाइड्रेट मेटाबोलिज्म के लिए लाभकारी है. पोषण विशेषज्ञ डॉ. जोश का मानना है कि क्रोमियम युक्त खाद्य पदार्थ शरीर की ग्लूकोज सहिष्णुता में सुधार करते हैं, और स्वाभाविक रूप से ब्लड शुगर के स्तर का संतुलन करते हैं. ब्रोकोली में क्रोमियम की उच्चतम मात्रा है, लेकिन आप इसे कच्ची पनीर, हरी बीन्स, ब्रेवर के खमीर और घास खिलाया बकरे के मांस से भी प्राप्त कर हैं.

हाई ब्लड शुगर को कम करने के लिए खाएँ पालक

पालक मैग्नीशियम से भरा हुआ है, जो ब्लड में शुगर को नियंत्रित करने में मदद करता है. कई अध्ययनों के बाद यह दावा किया गया है कि डायबिटीज मैग्नीशियम की कमी से जुड़ा हुआ है.

पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि मैग्नीशियम से भरपूर खाद्य पदार्थ, जैसे पालक, चार्ड, कद्दू के बीज, बादाम, दही और ब्लैक बीन्स, टाइप-2 डायबिटीज के लक्षणों में सुधार कर सकते हैं.

हाई ब्लड शुगर को कम करने के लिए खाएँ नारियल

नारियल में स्वस्थ वसा होता है जो ब्लड शुगर को संतुलित करने में मदद करता है. डॉ. जोश एक्स का कहना है कि शरीर शुगर के बजाय ईंधन स्रोत के रूप में मध्यम-जंजीरयुक्त फैटी एसिड का इस्तेमाल करना पसंद करता है. नारियल का दूध, घी और घास वाले मक्खन का प्रयोग करने से आपके ब्लड में शुगर के लेवल को संतुलित करने में भी मदद मिल सकती है. इसलिए इन खाद्य पदार्थों को अपने भोजन और जलपान में अवश्य शामिल करें.

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हाई ब्लड शुगर या डायबिटीज में ये पाँच चीज़ें कभी न खाएँ.

बायोनिक किडनी से पाएँ डायलिसिस की झंझट से छुटकारा

बायोनिक किडनी से पाएँ डायलिसिस की झंझट से छुटकारा

यह बिलकुल भी जरुरी नहीं है कि प्राकृतिक उपचार हमेशा एक चिकित्सीय स्थिति के लिए अच्छा ही हो, लेकिन फिर भी यह उपचार प्रभावी हो सकता है. कभी-कभी, गंभीर परिस्थितियों में, केवल मेडिकल टेक्नोलॉजी ही मदद कर सकती है, जैसे- बायोनिक किडनी के मामले में. डायलिसिस के बिना, एक रोगी जीवित नहीं रह सकता है. और जो पीड़ित को अधिक परेशान करता है, वह है - गुर्दा प्रत्यारोपण की लम्बी प्रतीक्षा सूची.

अभी तक इस रोग को एक मायावी बीमारी माना जाता रहा है. किडनी फेलियर की वजह से एक डायलिसिस रोगी को भारी पीड़ा झेलनी पड़ती है. ऐसा प्रतीत होता है मानो क्षितिज पर कोई अन्य समाधान ही न हो. यह वह परिस्थिति है जिसमें हमें मेडिकल टेक्नोलॉजी की जरुरत पड़ती है.

प्राकृतिक उपचार वास्तव में बहुत शक्तिशाली है, लेकिन जीवन में कुछ ऐसे मौके आते हैं जब हमें मॉडर्न टेक्नोलॉजी को अपनाना पड़ता है. हालांकि, इसे अंधेरे सुरंग में अंततः एक प्रकाश ही कहा जा सकता है - संयुक्त राज्य अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में, कैलिफोर्निया के वैज्ञानिकों ने दुनिया की पहली बायोनिक किडनी विकसित की है जो क्षतिग्रस्त किडनी को आसानी से और कारगर ढंग से बदल सकती है.

सामान्य शल्य चिकित्सा के माध्यम से बायोनिक किडनी शरीर में डाली जा सकती है.

बायोनिक किडनी हमारे गुर्दे (किडनी) की एक सही प्रतिकृति है. इसमें कई माइक्रोचिप्स होते हैं जो दिल से संचालित होते हैं. सामान्य गुर्दे (किडनी) की तरह, यह खून से मलबे और विषाक्त पदार्थों को फ़िल्टर कर सकता है. बायोनिक किडनी को शरीर में एक सामान्य सर्जिकल प्रक्रिया द्वारा डाला जा सकता है और यह कुशलतापूर्वक काम करने के लिए साबित हो चुका है. यह अब एक क्षतिग्रस्त गुर्दे (किडनी) के लिए सही प्रतिस्थापन साबित हो रहा है.

बायोनिक किडनी

कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के शोध दल के सदस्य शुवो रॉय और वेंडरबिल्ट यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर में नेफ्रोलॉजिस्ट और एसोसिएट प्रोफेसर, विलियम एच फिसेल ने कहा है कि यह आविष्कार, किडनी की विफलता से पीड़ित लाखों लोगों और जो डायलिसिस पर हैं, उनको आशा देने के लिए तैयार है. अब, आप में से कुछ लोग ऐसा सोच सकते हैं कि "लेकिन, क्या हुआ अगर शरीर इसे अस्वीकार कर देता है?", लेकिन वैज्ञानिक हमें आश्वस्त करते हैं कि अस्वीकृति की संभावना शून्य है!

ऐसा इसलिए है क्योंकि बायोनिक किडनी गुर्दे की कोशिकाओं से बना है. पहला प्रोटोटाइप एक कॉफी कप के आकार का है और रक्तचाप को नियंत्रित करते हुए शरीर में सोडियम और पोटेशियम के स्तर को संतुलित कर सकता है. यह परियोजना किसी भी डायलिसिस रोगी के लिए बढ़िया खबर है. शुरुआत में (नवंबर 2015), वैज्ञानिकों ने बायोमेडिकल इमेजिंग और बायोइन्जिनियरिंग संस्थान से 6 मिलियन डॉलर प्राप्त किए, और यह कहना सुरक्षित है कि पैसा अच्छी तरह से खर्च किया गया था. वैज्ञानिकों को बायोनिक किडनी से काफी उम्मीदें हैं, और प्रमुख शोधकर्ता, डॉ. विक्टर गुरा का कहना है कि यह उपकरण केवल 2 वर्षों में अर्थात वर्ष 2019 के अंत तक बिक्री के लिए उपलब्ध होगा.

बायोनिक किडनी की तकनीक

बायोनिक किडनी के पीछे की मुख्य तकनीक सिलिकॉन नैनोटेक्नोलॉजी द्वारा बनाई गई एक माइक्रोचिप है. यह एक ऐसी प्रक्रिया है जो कंप्यूटरों में इस्तेमाल की जानेवाली माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक के समान है. माइक्रोचिप्स सस्ती हैं और अच्छे फिल्टर के रूप में कार्य करती हैं. प्रत्येक डिवाइस में परतों में लगभग 15 माइक्रोचिप बनाए गए होंगे और यह एक पाड़ के रूप में कार्य करेगा जो कि मूत्राशय कोशिकाओं को जीवित रखता है जो माइक्रोचिप फ़िल्टरों में और आसपास बढ़ेगा. ये कोशिकाएँ जीवित गुर्दे (किडनी) की गतिविधि की नकल करेंगे.

इस प्रक्रिया की मुख्य चुनौती यह है कि बिना थक्के या क्षति के बिना डिवाइस के माध्यम से खून निकले. बायोमेडिकल इंजीनियर अमांडा बक्स द्रव की गतिशीलता का उपयोग कर रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि डिवाइस का कोई भी क्षेत्र रक्त के प्रवाह में अवरोध या बाधा तो पैदा नहीं करेगा.

बायोनिक किडनी में अस्वीकृति के कारक शून्य हैं.

बायोनिक किडनी का सबसे बढ़िया पहलू यह है कि यह एक नियमित दाता किडनी से कई गुणा बेहतर है, क्योंकि इसमें अस्वीकृति कारक शून्य हैं. हाल ही में एक प्रोटोटाइप के रूप में एक कॉफ़ी कप के आकार का रेनियल सेल का आविष्कार किया गया था. यह सोडियम और पोटेशियम के स्तर के संतुलन में कुशलता से काम करता है और रक्तचाप को नियंत्रित भी करता है.

क्या आपने किडनी की इस रामबाण दवा को आजमाया ? देखें : रेनोप्रो एक्सएल हर्बल पाउडर

बायोनिक किडनी के बारे में कुछ मत्वपूर्ण जानकारी देखें

किडनी की रामबाण दवा – रेनोप्रो एक्सएल

किडनी की रामबाण दवा - रेनोप्रो एक्सएल

रेनोप्रो एक्सएल पाउडर बारह शक्तिशाली जड़ी बूटियों से बना एक पोषण प्रदान करने वाला सप्लीमेंट है. इस हर्बल पाउडर का मुख्य लक्ष्य चयापचय अर्थात मेटाबोलिज्म में सुधार करना है. इस पाउडर का एक चम्मच सुबह खाली पेट और रात को खाने से आधे घंटे पहले हल्का गर्म पानी के साथ लेने से रक्त शर्करा का स्तर सामान्य रहता है. अब आप किसी भी अंग्रेजी दवा के बिना, एक सुरक्षित और प्राकृतिक तरीके से अपनी किडनी को स्वस्थ बना सकते हैं. किडनी की बीमारी (किडनी फेलियर) में रेनोप्रो एक्सएल पाउडर का प्रयोग करके आप तत्काल परिणाम के साथ अपनी किडनी को ठीक कर सकते हैं.

क्या आप प्राकृतिक तरीके से अपनी किडनी को स्वस्थ बनाना चाहते हैं? इसे आजमाएँ.

रेनोप्रो एक्सएल पाउडर में शामिल बारह शक्तिशाली जड़ी-बूटियाँ 100% प्रभावी और वैज्ञानिक तरीके से परीक्षण किए गए विधि का उपयोग करते हुए रोग के कारण पर हमला करती है, न कि केवल लक्षणों पर. कई चिकित्सकों का मानना है कि मेटाबोलिक डाइट चार्ट का पालन करने के साथ इन बारह शक्तिशाली जड़ी-बूटियों से बनी हर्बल सप्लीमेंट्स का सेवन करने से मेटाबोलिज्म को खुद को रिपेयर करने के लिए अनुकूल माहौल प्राप्त होता है. कई अनुसंधानों में यह साबित हो चुका है कि मरीजों की मेटाबोलिज्म स्वस्थ होने के बाद धीरे-धीरे पैंक्रियाज के डेड सेल्स नये सेल्स से रिप्लेस हो जाते हैं. कम शब्दों में कहें तो, डायबिटीज से पीड़ित मरीजों की मूल समस्या ही ख़त्म हो जाती है. आप अपने रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने के लिए स्वाभाविक रूप से अधिक इंसुलिन का उत्पादन कर सकते हैं.

प्रति दिन दो बार रेनोप्रो एक्सएल पाउडर लेने के दौरान आपको बस अपना आहार और जीवन शैली बदलना होगा. आप आश्वस्त रह सकते हैं कि आप उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त करेंगे. यदि आप किडनी की बीमारी से पीड़ित हैं, तो वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित जड़ी-बूटियों से बने रेनोप्रो एक्सएल पाउडर का प्रतिदिन दो बार सेवन करें, और मेटाबोलिक डाइट चार्ट का पालन करें. इस विधि से किडनी को पूरी तरह से स्वस्थ बनाना संभव है. साथ ही साथ किडनी की बीमारी से पीड़ित लोगों को अगर अभी डायलिसिस दी जा रही है, तो धीरे-धीरे डायलिसिस की जरुरत कम महसूस होगी.

किडनी की रामबाण दवा रेनोप्रो एक्सएल पाउडर में निम्नलिखित बारह जड़ी-बूटियाँ हैं.

  1. वरुण (Crataeva nurvala) 16% – वरुण पाउडर का प्रयोग मेटाबोलिज्म की मदद करता है. यह खून साफ़ करने के लिए भी जाना जाता है. यह जड़ी-बूटी मूल रूप से किडनी के कार्यों में सहायता करने के लिए जाना जाता है.
  2. भुई आंवला (Phyllanthus niruri) 08% – यह भारतीय आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति का एक महत्वपूर्ण पौधा है. भुई आंवला का उपयोग पेट, लीवर और किडनी की समस्याओं में किया जाता है. यह पौधा किडनी और लीवर के रोगियों के लिए वरदान माना जाता है.
  3. शिरीष (Albezzia labok) 08% – इसका उपयोग कई बिमारियों के उपचार में होता है क्योंकि यह हमारे शरीर से टोक्सिन निकालने में सक्षम है. इस जड़ी-बूटी के सेवन से सूजन और संक्रमण में भी राहत मिलती है. शिरीष का उपयोग बार-बार पेशाब आना, दर्दनाक पेशाब, पेशाब के रास्ते में संक्रमण इत्यादि में राहत प्रदान करता है.
  4. पुनर्नवा (Boerhaavia diffusa) 16% – पुनर्नवा को रोग निवारण में एक अति महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है. आयुर्वेद के अनुसार, पुनर्नवा को तीनों दोषों (वात, पित्त, कफ) को कम करने के लिए जाना जाता है. इस पौधे का पारंपरिक रूप से किडनी, हृदय और आंतों संबंधी विकारों से जुड़े एडिमा को कम करने के लिए उपयोग किया जाता है. यह लीवर और किडनी का पोषण और समर्थन करता है.
  5. गोखरू (Tribulus terrestris) 12% – गोखरू को मूत्रवर्धक और कामोद्दीपक माना जाता है. यह शरीर की ताकत को बनाए रखने में सहायता करता है. गोखरू पाउडर मूत्र प्रणाली को शुद्ध करने में मदद करता है. यह किसी नैतिक रूप से सिद्ध जहरीले प्रभावों के बिना सिंथेटिक एनाबॉलिक हार्मोन के लिए एक प्राकृतिक हर्बल विकल्प है. गोखरू पाउडर को पुरुषों और महिलाओं के रोगों के लिए रामबाण औषधि माना जाता है.
  6. कासनी (Chicorium intybus) 12% – कासनी आयुर्वेदिक और यूनानी चिकित्सा प्रणाली में सबसे महत्वपूर्ण जड़ी-बूटियों में से एक है. यह अमृत सामान चमत्कारी पौधा किडनी और लीवर के लिए वरदान माना जाता है. कासनी का प्रयोग दर्द में राहत देता है तथा जलन और सूजन कम करता है. कासनी मूत्रवर्धक भी है. यह मूत्र के उत्सर्जन को प्रोत्साहित करता है जो उत्सर्जित मूत्र की मात्रा को बढ़ाता है.
  7. शिग्रु (Moringa oleifera) 08% – यह एक ऐसी जड़ी-बूटी है जो एन्टी-इंफ्लेमेटरी और पाचन ठीक करने वाले गुणों से भरपूर होता है. पूर्वी देशों में इसका उपयोग कई पीढ़ियों से मधुमेह, हृदय रोग, एनीमिया, गठिया, लीवर की बीमारी और श्वसन, त्वचा और पाचन विकार जैसे रोगों का इलाज और रोकथाम करने के लिए किया जाता रहा है.
  8. अपामार्ग (Achyranthes aspera) 04% – यह भूख बढ़ानेवाली एवं असाध्य रोगों को ठीक करने वाली औषधि है. आयुर्वेद में अपामार्ग का प्रयोग एक एन्टी-इंफ्लेमेटरी एजेंट के रूप में बड़े पैमाने पर किया जाता है. इसके अलावा अपामार्ग बवासीर, अपच, खाँसी, अस्थमा, एनीमिया, पीलिया और सांप के काटने में उपयोगी है.
  9. नीम (Azhardirachta indica) 04% – भारत में नीम के पेड़ों से बने उत्पादों को उनके औषधीय गुणों के लिए दो सदियों से भी अधिक समय से इस्तेमाल किया जाता रहा है. नीम उत्पादों को सिद्ध और आयुर्वेदिक चिकित्सकों द्वारा एन्फेल्मंटिक, एंटिफंगल, एंटीबायटीक, एंटीडायबिटिक, एंटीवायरल, गर्भनिरोधक और शामक होना माना जाता है. नीम में मधुमेह विरोधी, फंगसरोधी, रक्त को शुद्ध करने वाले और शुक्राणुनाशक गुण होते हैं.
  10. तुलसी (Ocimum Sanctum) 04% – तुलसी जलन और सूजन कम करने और जीवाणुरोधी गुणों से समृद्ध है. यह सामान्य सर्दी, पाचन समस्याओं, श्वास समस्याओं, तनाव, रक्त शर्करा, हृदय की समस्याओं, बुखार और यहां तक ​​कि अल्सर सहित लगभग सभी बीमारियों में राहत देने के लिए जाना जाता है.
  11. पीपल की छाल (Ficus religiosa) 04% – पीपल एक आयुर्वेदिक पेड़ है. खाँसी, त्वचा रोगों के उपचार, त्वचा के रंग में सुधार, मतली, उल्टी, दस्त और यौन शक्ति में सुधार के लिए पीपल की छाल का इस्तेमाल किया जाता है. पीपल की छाल का प्रयोग करने से आप बहुत सी बीमारियों से बच सकते हैं.
  12. दालचीनी (Cinnamomum zeylanicum) 04% – दालचीनी एक रक्‍तशोधक है जो कई खतरनाक बीमारियों से राहत दिला सकता है. दालचीनी का उपयोग हजारों वर्षों से स्वास्थ्य लाभों के लिए होता रहा है. अतीत में, दालचीनी चिकित्सा की कई स्थितियों का इलाज करने के लिए प्रयोग किया जाता था, जैसे- साँस की बीमारी, स्त्री रोग संबंधी मुद्दे, कब्ज़ की शिकायत आदि.

किडनी के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी इस विडियो में भी है.

व्यायाम मधुमेह रोगियों की सात मदद करता है

व्यायाम मधुमेह रोगियों की सात मदद करता है.

व्यायाम करने से बहुत अधिक लाभ मिलते हैं, लेकिन इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि इससे आपके ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करना आसान हो जाता है. शारीरिक कसरत आपके ब्लड में शुगर को कम कर सकता है. जब आप कसरत करते हैं तो आपके मसल्स इंसुलिन के बिना ग्लूकोज का उपयोग कर सकते हैं.

दूसरे शब्दों में, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि आप इंसुलिन प्रतिरोधी हैं या आपके पास पर्याप्त इंसुलिन न हो: जब आप शारीरिक कसरत करते हैं, तो आपकी मांसपेशियों को वह ग्लूकोज मिल जाता है जिसकी उन्हें जरुरत होती है.

और बदले में, आपके ब्लड शुगर का स्तर नीचे चला जाता है.

व्यायाम के द्वारा डायबिटीज को नियंत्रण में रखना
लम्बा और स्वस्थ जीवन जीने के लिए
एक महत्वपूर्ण कदम है.

  1. शारीरिक कसरत इंसुलिन संवेदनशीलता और ग्लूकोज मेटाबोलिज्म में वृद्धि करता है. टाइप-2 डायबिटीज की मुख्य समस्या इंसुलिन असंवेदनशीलता या इंसुलिन प्रतिरोध ही है. व्यायाम करने से आप यह सुधार कर सकते हैं कि आपका इंसुलिन कितना अच्छा काम करता है; यह आपके ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है.
  2. व्यायाम आपके कोलेस्ट्रॉल के स्तर में सुधार लाता है. शारीरिक कसरत अच्छे प्रकार के कोलेस्ट्रॉल (एचडीएल) को बढ़ाने और बुरे प्रकार के कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल) को कम करने में मदद करता है. कसरत ट्राइग्लिसराइड का स्तर भी कम कर सकता है. यह मधुमेह रोगियों के लिए अच्छी खबर है क्योंकि मधुमेह रोगियों में हृदयरोग होने का खतरा ज्यादा होता है. मुझे खुद भी कोलेस्ट्रॉल की समस्या थी, लेकिन उचित आहार और व्यायाम तथा बिना किसी दवा के, अब मेरे कोलेस्ट्रॉल का स्तर बहुत अधिक स्वस्थ है.
  3. व्यायाम रक्तचाप को कम कर सकता है. कई मधुमेह रोगियों में हाइपरटेंशन या उच्च रक्तचाप भी होता है. कसरत करने से आपके आराम करने के दौरान का रक्तचाप और आपके मेहनत करने के दौरान का रक्तचाप (शारीरिक कसरत सहित) दोनों कम हो सकते हैं. हृदय रोग और स्ट्रोक की संभावनाओं को कम करने के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है. मेरी माँ भी रक्तचाप की दवा इस्तेमाल करती थी, लेकिन अब वो दवाओं के बिना रहने में सक्षम है. मजबूत आनुवांशिक घटक होने की वजह से, यह सिर्फ आहार और शारीरिक कसरत से नियंत्रित नहीं हो सकता; मेरी माँ अपने रक्तचाप को स्वस्थ श्रेणियों में बनाए रखने के लिए विशेष रूप से कई सप्लीमेंट्स की खुराक लेती है. मेरी माँ तनाव प्रबंधन और ध्यान भी करती है, लेकिन अधिकांश लोगों में रक्तचाप कम करने के लिए व्यायाम एक महत्वपूर्ण तत्व है.
  4. व्यायाम भी हृदय की दक्षता में सुधार कर सकता है, और यह हृदय को कम काम करने में मदद करता है. यह कार्डियोवास्कुलर जोखिम वाले कारकों के साथ भी मदद करता है. आप कड़ी कसरत करने में सक्षम होंगे और यह आपको कठिन नहीं लगेगा. इससे आपका दैनिक कार्य आसान हो जाएगा. बहुत से लोग शारीरिक कसरत नहीं करते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि उनके पास ऊर्जा नहीं है. उन्हें ऊर्जा प्राप्त करने के लिए व्यायाम करना होगा. आपके आराम के दौरान की हृदय गति भी कम हो सकती है.
  5. व्यायाम आपके मनोदशा में सुधार कर सकता है. मधुमेह एक तनावपूर्ण बीमारी है, कसरत करने से आपको मानसिक रूप से अच्छा महसूस करने में मदद मिल सकती है. व्यायाम अवसाद में भी सुधार कर सकता है जो मधुमेह जैसी बीमारी के साथ एक मुद्दा हो सकता है.
  6. व्यायाम वजन कम करने में नाटकीय रूप से मदद करता है, और कम वजन बनाए रखने में भी सहायता करता है. विशेष रूप से, वजन कम करने और मांसपेशियों के ऊतकों के संरक्षण में सही प्रकार और सही मात्रा में व्यायाम बहुत मदद करता है. वज़न कम करने से रक्तचाप, इंसुलिन प्रतिरोध, ग्लूकोज का स्तर और कोलेस्ट्रॉल का स्तर ठीक हो जाता है. और यह सारे काम अकेले व्यायाम करता है.
  7. व्यायाम मधुमेह की जटिलताओं को कम करने में मदद करता है. आपके ब्लड शुगर का बेहतर नियंत्रण मधुमेह की गंभीर जटिलताओं को रोकने में मदद करता है, जिसमें अंधापन, न्यूरोपैथी और किडनी फेलियर शामिल है.

डायबिटीज जब हद से गुजर जाये तो आपको यह आर्टिकल पढना चाहिए: डायबिटीज का सबसे सफल प्राकृतिक उपचार.