मृतशरीर का मांस डायबिटीज को तेजी से फैला सकता है.

मृतशरीर का मांस डायबिटीज को तेजी से फैला सकता है.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की वेबसाइट पर पृथ्वीजीत मित्रा के द्वारा लिखी गई इस खबर के मुताबिक चिकित्सकों के एक तबके का मानना है कि मधुमेह के मरीजों की संख्या में वृद्धि को दूषित भोजन की खपत से जोड़ा जा सकता है, जिसमें मृतशरीर का मांस भी शामिल है.

मधुमेह के नए मरीजों में ऐसे लोगों की संख्या ज्यादा है जिनके पास इस बीमारी का पारिवारिक इतिहास नहीं है.

ऐसा निष्कर्ष निकालने वाले चिकित्सकों ने कहा है कि सड़े हुए शव में बैक्टीरिया द्वारा जारी एंडोटॉक्सिन्स इंसुलिन स्राव को रोक सकते हैं और मधुमेह होने का खतरा बढ़ा सकते हैं. अब, जो लोग मानते हैं कि डायबिटीज होने का खतरा सिर्फ उन्हीं लोगों को होता है जिनके परिवार में किसी को यह बीमारी हो तो उनके लिये यह जानना जरुरी है कि कोलकाता में लगभग 60% डायबिटीज से पीड़ित मरीजों के परिवार में किसी को यह बीमारी नहीं है.

डॉक्टरों का कहना है कि कोलकाता में पहली पीढ़ी के मधुमेह रोगियों का उभरना आश्चर्यजनक है. उनका तर्क है कि जब मृतशरीर का मांस उपभोग किया जाता है, तो शव में बैक्टीरिया मर जाता है और शरीर में जहरीले एंडोटोक्सिन छोड़ देता है.

ये एंडोटोक्सिन वसा का उपयोग करते हैं जो आम तौर पर मांस के साथ खाया जाता है और सिस्टम में मजबूती से अवशोषित हो जाता है.

मृतशरीर का मांस डायबिटीज के लिए खतरनाक है.

रिपोर्ट में आगे लिखा गया है कि आरएन टैगोर इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियाक साइंसेज (आरटीआईआईसीएस) के परामर्शदाता अरिंदम विश्वास ने कहा, “लंबे समय तक मृतशरीर का मांस उपभोग करने से चयापचय सिंड्रोम में इंसुलिन प्रतिरोध हो सकता है या अपर्याप्त इंसुलिन स्राव हो सकता है”. उन्होंने कहा कि जीवाणुरोधी एंडोटोक्सिन भी पैनक्रिया में सूजन का कारण बन सकता है.

बिश्वास ने कहा कि हम अक्सर ऐसे लोगों से मिलते हैं जो पारिवारिक इतिहास के बिना ही मधुमेह के शिकार हो गये हैं और यह संख्या अब पर्याप्त मात्रा में बढ़ चुकी है. कारणों में से एक कारण शव मांस में बैक्टीरिया हो सकता है, जो अब लगता है, शहर भर में बेचा जाता है.

मधुमेह जागरूकता और आप नामक एक संगठन, जो बीमारी का प्रतिरोध करने और निगरानी करने के लिए काम करता है, ने पुष्टि की कि कोलकाता में 60% मधुमेह के रोगियों का ऐसा कोई पारिवारिक इतिहास नहीं था. इस संगठन के सचिव इंद्रजीत मजूमदार ने कहा कि आनुवंशिक ट्रिगर मधुमेह में बहुत मजबूत है, लेकिन बिना किसी पारिवारिक इतिहास के डायबिटीज से पीड़ित मरीजों की यह संख्या बहुत अधिक है. सड़े हुए मृतशरीर का मांस और दूषित भोजन भी कारण हो सकता है.

मृतशरीर का मांस - Diabetes in Kolkata
मृतशरीर का मांस कोलकाता में खूब बिक रहा है.

मृतशरीर का मांस खाने वालों के लिए विशेषज्ञों की राय.

निवारक दवा विशेषज्ञ देबाशिष बसु ने कहा कि जीवनशैली कारक पहली पीढ़ी के मधुमेह के पीछे का एक प्रमुख कारण हैं, लेकिन प्रमुख ट्रिगरों में सड़े हुए मृतशरीर का मांस और दूषित भोजन था. मांस और मछली की गुणवत्ता जिसे हम उपभोग करते हैं, सदेहास्पद है. अब इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि बैक्टीरिया से पीड़ित शव मांस को पूरे शहर में बेचा जाता है. यह वास्तव में खतरनाक हो सकता है, क्योंकि बैक्टीरिया द्वारा जारी एंडोटॉक्सिन्स इंसुलिन को रोक सकता है.

ऐसा माना जाता है कि कोलकाता की लगभग अठारह प्रतिशत आबादी मधुमेह अर्थात डायबिटीज से पीड़ित है. पूरे कोलकाता शहर में व्यापक रूप से उपभोग की जानेवाली मछली पूर्वी कोलकाता की आर्द्रभूमि से लायी जाती है. यह खतरनाक है, क्योंकि वे जहरीले, यहां तक ​​कि कैंसरजन्य पदार्थ भी हो सकते हैं. ज़ाहिर है, मृतशरीर का मांस और भी बदतर है.

हालांकि एएमआरआई अस्पताल के सलाहकार देबाशिष साहा ने तर्क दिया कि यह अभी तक साबित नहीं हुआ है कि एंडोटोक्सिन इंसुलिन को रोकता है. साहा ने कहा, लेकिन, शव बैक्टीरिया घातक दस्त का कारण बन सकता है.

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मृतशरीर का मांस डायबिटीज को तेजी से फैला सकता है.
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मृतशरीर का मांस डायबिटीज को तेजी से फैला सकता है.
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जीवनशैली कारक पहली पीढ़ी के मधुमेह (डायबिटीज) के पीछे का एक प्रमुख कारण हैं, लेकिन प्रमुख ट्रिगरों में सड़े हुए मृतशरीर का मांस और दूषित भोजन है.
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  1. Pingback: एक व्यक्ति को मधुमेह अर्थात डायबिटीज कैसे होता है?

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