साँसों से पता चलेगा डायबिटीज में ब्लड ग्लूकोज का लेवल

साँसों से पता चलेगा डायबिटीज में ब्लड ग्लूकोज का लेवल

डायबिटीज के मरीजों को एक काम जो बार-बार करना पड़ता है, वो काम है – ब्लड ग्लूकोज का लेवल जांच करना. ब्लड ग्लूकोज का लेवल जांचने की वर्तमान तकनीक के द्वारा मरीजों को दर्द से गुजरना पड़ता है. लेकिन ब्लड ग्लूकोज को जाँचने की अब एक नई तकनीक विकसित हो चुकी है.

दक्षिण अफ्रीका में वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) ने मधुमेह रोगियों में चीनी के स्तर की निगरानी के लिए सांस विश्लेषक प्रौद्योगिकी विकसित की है.


इस तकनीक के विकसित हो जाने के बाद अब मरीजों को अपने ब्लड ग्लूकोज का लेवल जांच करने के लिए उँगली में सुई नहीं चुभोना पड़ेगा. डायबिटीज के मरीजों की साँसों से उनके ब्लड ग्लूकोज के स्तर का पता लगानेवाली सांस विश्लेषक प्रौद्योगिकी इस वर्ष तीस अगस्त को दक्षिण अफ्रीका के प्रिटोरिया में आयोजित मीडिया ब्रीफिंग में प्रदर्शित अन्य प्रौद्योगिकियों में से एक थी.

ब्लड शुगर जाँचने वाली इस नई तकनीक की खोज दक्षिण अफ्रीका में हुई है जहाँ 21 से 79 वर्ष की उम्र के बीच 3.85 मिलियन लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं. मरीज़ की साँसों से ब्लड ग्लूकोज का लेवल पता लगाने वाली इस नई तकनीक को वैकल्पिक दर्द मुक्त विकल्प माना जा रहा है. हालाँकि इस तकनीक को आम मरीज़ तक पहुँचने में कितना वक़्त लगेगा इसका अंदाजा अभी नहीं लगाया जा सकता है. लेकिन इतना तो तय है कि ब्लड ग्लूकोज का लेवल पता लगाने का यह तरीका बहुत ही आसान है और इसके प्रयोग से डायबिटीज के मरीजों को सुई चुभोने के दर्द से मुक्ति मिलेगी.


वर्तमान में, मधुमेह से पीड़ित होने वाले अधिकांश रोगियों को अपने ब्लड ग्लूकोज अर्थात शुगर के स्तर की जांच करने के लिए दिन में कम से कम तीन बार अपनी उंगलियों में सुई चुभोना पड़ता है. मधुमेह की निगरानी और ब्लड शुगर का पता लगाने की यह विधि रोगी के लिए दर्दनाक है. कई विशेषज्ञों का मानना है कि इस विधि से संभावित रूप से संक्रमण शुरू हो सकता है.

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