जड़ी-बूटियों से डायबिटीज का मेटाबोलिक उपचार

शक्तिशाली जड़ी-बूटियों से डायबिटीज का मेटाबोलिक उपचार

जीवनशैली से जुड़ी बिमारियाँ – जिसे कुछ विदेशी वैज्ञानिक मेटाबोलिक डिजीज के रूप में वर्णित करते हैं – तेजी से बढ़ रही है. ऐसे वक़्त में जड़ी-बूटियों से डायबिटीज का मेटाबोलिक उपचार डायबिटीज का सबसे कारगर प्राकृतिक उपचार है.

भारत में जीवनशैली से जुड़ी बिमारियों में भारतीय चिकित्सा पद्धति के द्वारा उपचार करने पर इतनी सफलता मिलती है कि अब सरकार इसे एमबीबीएस के पाठ्यक्रम में भी लागू करने जा रही है.

एक विशेष आहार और शक्तिशाली जड़ी-बूटियों से बनी हर्बल सप्लीमेंट्स लेने से डायबिटीज के मरीजों की मेटाबोलिज्म स्वस्थ हो जाती है. इसलिए भारतीय चिकित्सा पद्धति का ही हमारे द्वारा प्रचारित मेटाबोलिक उपचार दो से तीन महीने तक लेने के बाद डायबिटीज के कई मरीजों को खुद ही विश्वास होने लगता है कि उनकी डायबिटीज ख़त्म हो जायेगी.

हो सकता है कि नीचे हमारे कुछ पुराने परिचित इस तरह की बात लिखें. मैं कई मरीजों को समझा-समझाकर थक चुका हूँ कि मेटाबोलिक उपचार वास्तव में एक फास्टिंग आयुर्वेदिक डाइट पर आधारित है जिसे फॉलो करने की अवधि में शक्तिशाली जड़ी-बूटियों से बनी कुछ हर्बल सप्लीमेंट्स लेने से डायबिटीज के मरीजों का ब्लड शुगर का स्तर सामान्य रहने लगता है, लेकिन अगर डाइट को फॉलो करना बंद कर देंगे तो ब्लड शुगर का स्तर बढ़ने लगता है. इसलिये डाइट चार्ट को फॉलो करते रहिये.

लेकिन टाइप-2 डायबिटीज़ के लिए अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन के मेडिकल केयर के मानक को पढ़ने पर बहुत ही खतरनाक दिशानिर्देश मिलते हैं. सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह है कि डायबिटीज और उसकी जटिलताओं के लिए मरीजों का फार्मास्यूटिकल प्रबंधन पर पूर्ण रूप से निर्भरता है. और साथ ही साथ महत्वपूर्ण पोषण संबंधी सहायता के लिए सिफारिशों की पूरी अनुपस्थिति है.

टाइप-2 डायबिटीज में दवा के हस्तक्षेप की प्रमुख कमी यह है कि वे इस रोग की प्रगति को प्रभावित नहीं करते हैं. अर्थात दवा लेने के बाद भी बीमारी अन्दर ही अन्दर बढ़ती रहती है और कई मामलों में वास्तव में अंतर्निहित रोग प्रक्रिया में तेजी लाकर दवाइयां मृत्यु दर में भी वृद्धि करती है. बहरहाल, परंपरागत चिकित्सा द्वारा पेश किया गया केवल एक यही दृष्टिकोण है.

मधुमेह से निपटने वाले पारंपरिक चिकित्सा समूहों द्वारा संबोधित नहीं किया गया एक प्रमुख मुद्दा यह है कि दवाएं केवल जैव रासायनिक बैंड-एड्स हैं. लेकिन लोग दवाइयों को ही सबकुछ समझ रहे हैं. एक मौलिक सत्य है जो कि रोगी को शायद ही कभी समझाया गया है: लगभग हर मामले में टाइप-2 डायबिटीज आहार और जीवन शैली की वजह से एक बीमारी है.

अमेरिकी सरकार के तीसरे राष्ट्रीय स्वास्थ्य और पोषण परीक्षा सर्वेक्षण (NHANES III) से निकले निष्कर्ष स्पष्ट रूप से इस कथन का समर्थन करते हैं. टाइप-2 डायबिटीज़ वाले व्यक्तियों में से, 69% ने बिल्कुल भी व्यायाम नहीं किया था या नियमित व्यायाम नहीं करते थे; 62% प्रति दिन फलों और सब्जियों की पाँच से भी कम सर्विंग्स खाते पाए गए; और 82% या तो अधिक वजन या मोटापे के शिकार थे.

जड़ी-बूटियों से ही सफल होता है डायबिटीज का इलाज

दैनिक जागरण में छपी एक खबर की मानें तो भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) की महानिदेशक सौम्या विश्वनाथन के अनुसार जीवन शैली से जुड़ी बीमारियों के इलाज में आयुर्वेद ज्यादा कारगर साबित हो रहा है और इससे मरीजों का समग्र इलाज संभव हो सकेगा.

तो आप भी तैयार रहिये जड़ी-बूटियों से अपने मेटाबोलिज्म को स्वस्थ बनाने के लिए.

टाइप-2 डायबिटीज में जड़ी-बूटियों से उपचार के लिए प्राकृतिक दृष्टिकोण

डायबिटीज वाले रोगियों में, एक सौ पचास मिनट की एक साप्ताहिक न्यूनतम शारीरिक गतिविधि जो तेज चलने के समान हो डायबिटीज विकसित होने का जोखिम 58% तक कम कर देता है. एक अध्ययन, मधुमेह निवारण कार्यक्रम, में संभवतः रोकथाम की एक संभावित रणनीति के रूप में मेटफोर्मिन के साथ प्रारंभिक ड्रग थेरेपी को भी देखा गया. मेटफ़ॉर्मिन ने 31% तक जोखिम कम कर दिया. दूसरे शब्दों में, चलना-फिरना या शारीरिक गतिविधि मेटफ़ॉर्मिन से लगभग दोगुना ज्यादा प्रभावी है!

दैनिक जागरण ने इस सन्दर्भ में लिखा है कि भारतीय चिकित्सा परिषद अहम कदम उठाते हुए एमबीबीएस के पाठ्यक्रम में बदलाव की तैयारी शुरु कर चुका है. इस बदलाव के तहत एमबीबीएस के पाठ्यक्रम में देशी चिकित्सा पद्धति, आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी को भी शामिल किया जाएगा.

यानी एमबीबीएस डाक्टरों के पास न सिर्फ एलोपैथी दवाइयों से बल्कि आयुर्वेदिक व यूनानी दवाइयों की भी जानकारी होगी.

जड़ी-बूटियों से मेटाबोलिज्म बढ़ाने के उपाय

डायबिटीज में जड़ी-बूटियों से उपचार का वैज्ञानिक दृष्टिकोण

अक्सर टाइप-2 डायबिटीज के इलाज और इसके दुष्परिणामों को रोकने में अकेले आहार में बदलाव एकमात्र कारक के रूप में प्रभावी होता है. अन्य जीवनशैली कारक और जड़ी-बूटियों से बनी सप्लीमेंट्स महत्वपूर्ण हैं, लेकिन टाइप-2 डायबिटीज का उपचार आहार से ही शुरू होता है.

क्लिनिकल परीक्षणों से काफी सबूत मिले हैं कि जिस आहार में परिष्कृत कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम हो वह आहार सिद्ध दृष्टिकोण से सबसे वैज्ञानिक आहार के रूप में उभर रहा है, खासकर जब रक्त शर्करा के स्तर पर इसके प्रभाव पर विचार किया गया. वह वैज्ञानिक आहार मधुमेह की अगली कड़ी को कम करने में भी शामिल होता है, जैसे कि उच्च कोलेस्ट्रॉल का स्तर, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, और अन्य जटिलताएं.

भारतीय चिकित्सा पद्धति में प्राकृतिक चिकित्सा के द्वारा जड़ी-बूटियों से डायबिटीज का उपचार भी आदर्श ब्लड शुगर नियंत्रण और मेटाबोलिज्म को दुरुस्त करने के लक्ष्यों को हासिल करता है.

और मुझे यह लिखते हुए बहुत ख़ुशी हो रही है कि भारतीय चिकित्सा पद्धति निम्नलिखित चार क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करके मधुमेह की जटिलताओं के जोखिम को जड़ी-बूटियों से कम करने का अविश्वश्नीय काम कर रही है.

  1. इष्टतम पोषक तत्व प्रदान करना
  2. भोजन के बाद रक्त ग्लूकोज के स्तर में कमी लाना.
  3. इंसुलिन फंक्शन और संवेदनशीलता में सुधार लाना.
  4. पोषण और ऑक्सीडेटिव तनाव को रोकना.

इस उपचार में शक्तिशाली जड़ी-बूटियों से बनी हर्बल सप्लीमेंट्स दी जाती हैं जो दीर्घकालिक अवधि में किसी भी साइड इफेक्ट के बिना ग्लूकोज के स्तर को बनाए रखने में मदद करते हैं. दुष्प्रभावों के बिना, यह उपचार डायबिटीज (मधुमेह) में ब्लड शुगर के बेहतर नियंत्रण के लिए एक प्राकृतिक समाधान प्रदान करता है.

शक्तिशाली जड़ी बूटियों से बनी हर्बल सप्लीमेंट्स एक साथ मधुमेह के लक्षणों पर बड़े पैमाने पर काम करते हैं और आपको बेहतर बनाने के लिए आपकी बीमारी से बुरी तरह से लड़ते हैं. उनकी कार्रवाई तीन तरह से होती है:

  1. वे अग्न्याशय में बीटा कोशिकाओं को उत्तेजित करके इंसुलिन के उत्पादन को विनियमित कर देते हैं. इस प्रकार टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों का ब्लड शुगर बेहतर नियंत्रित हो पाता है.
  2. वे धीरे-धीरे कोशिकाओं के इंसुलिन प्रतिरोध को कम करने में सहायता करते हैं.
  3. वे कोशिकाओं में ग्लूकोज का अवशोषण बढ़ाने में मदद करते हैं जिससे स्वाभाविक रूप से ग्लूकोज के स्तरों को नियंत्रित किया जाता है.

नंदन वर्मा से जानें जड़ी-बूटियों से मेटाबोलिज्म बढ़ाने के उपाय

भारतीय चिकित्सा पद्धति में सबसे ज्यादा प्रयोग होनेवाली शक्तिशाली जड़ी-बूटियों से बनी हर्बल सप्लीमेंट्स पीएच (pH) को संतुलित करते हैं, अग्न्याशय और यकृत के कार्य को विनियमित करते हैं, इंसुलिन स्राव के काम को बहाल करते हैं और इस तरह ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करते हैं.

यह हाइपो / हाइपरग्लेसेमिक एपिसोड की संभावना को बहुत कम करता है. वर्तमान में सैकड़ों लोगों ने नंदन वर्मा के भारतीय चिकित्सा पद्धति के तहत डायबिटीज के मेटाबोलिक उपचार का उपयोग स्वाभाविक रूप से अपने ग्लूकोज स्तरों का प्रबंधन करने के लिए देश भर में सफलतापूर्वक किया है.

भारतीय चिकित्सा पद्धति के अच्छे जानकार नंदन वर्मा के अनुसार डायबिटीज में जड़ी-बूटियों से बनी हर्बल सप्लीमेंट के द्वारा मेटाबोलिज्म को स्वस्थ बनाने वाले इस मेटाबोलिक उपचार के कई फायदे हैं.

डायबिटीज में नंदन वर्मा की सलाह पर मेटाबोलिक उपचार लेने के फायदे.
  • मेटाबोलिक उपचार लेने के बाद दोनों ही प्रकार के डायबिटीज में इन्सुलिन से मुक्ति मिल जाती है. चाहे आपको टाइप-1 डायबिटीज होने की वजह से इन्सुलिन लेना पड़ रहा हो या टाइप-2 डायबिटीज बड़ा रूप धारण कर लेने के बाद डॉक्टर की सलाह पर इन्सुलिन लेना पड़ रहा हो, दोनों ही मामलों में इन्सुलिन से मुक्ति मिल जाती है.
  • मेटाबोलिक उपचार लेने के दौरान शक्तिशाली जड़ी-बूटियों से बनी हर्बल सप्लीमेंट्स और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित आहार लेने की वजह से डायबिटीज के दुष्परिणाम जैसे – अंधापन, हृदयाघात और किडनी फेलियर होने की सम्भावना न के बराबर होती है.
  • भारतीय चिकित्सा पद्धति, आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा के समावेश से निर्मित डायबिटीज का मेटाबोलिक उपचार लेने के बाद असमय बुढापे के टेंशन से मुक्ति मिल जाती है. अर्थात छः महीने तक डायबिटीज का मेटाबोलिक उपचार लेने के बाद डायबिटीज के मरीज की उम्र 20 साल तक बढ़ सकती है.
  • डायबिटीज का मेटाबोलिक उपचार लेने के बाद डायबिटीज के मरीज़ को मानसिक समस्या जैसे- यादाश्त कम होना, डिप्रेशन, सुस्ती, इत्यादि से भी मुक्ति मिल जाती है.
  • नंदन वर्मा की सलाह पर डायबिटीज का मेटाबोलिक उपचार लेने के बाद डायबिटीज के मरीज को जोड़ों का दर्द, स्फूर्ति की कमी, इत्यादि से मुक्ति मिल जाती है.
  • डायबिटीज का मेटाबोलिक उपचार लेने के बाद डायबिटीज के मरीज़ को पेट की समस्या जैसे- दर्द, कब्जियत, बार-बार पेट ख़राब होना, इत्यादि से मुक्ति मिल जाती है.
  • नंदन वर्मा की सलाह पर डायबिटीज का मेटाबोलिक उपचार लेने के बाद डायबिटीज के मरीज को कैंसर होने की सम्भावना ख़त्म हो जाती है.
  • नंदन वर्मा की सलाह पर डायबिटीज का मेटाबोलिक उपचार लेने के बाद डायबिटीज के मरीज के शरीर में रोग प्रतिरक्षण (इम्युनिटी) की क्षमता बढ़ जाती है, जिससे सर्दी, बुखार, जुकाम, इत्यादि कम होता है.
  • डायबिटीज का मेटाबोलिक उपचार लेने के बाद डायबिटीज के मरीज़ का किडनी मजबूत होता है, और उसके ख़राब होने की सम्भावना न के बराबर होती है.
  • डायबिटीज का मेटाबोलिक उपचार हृदयरोग (Atherosclerosis) से बचाव करता है.

Summary
जड़ी-बूटियों से डायबिटीज का मेटाबोलिक उपचार
Article Name
जड़ी-बूटियों से डायबिटीज का मेटाबोलिक उपचार
Description
जीवनशैली से जुड़ी बिमारियाँ - जिसे कुछ विदेशी वैज्ञानिक मेटाबोलिक डिजीज के रूप में वर्णित करते हैं – तेजी से बढ़ रही है. ऐसे वक़्त में जड़ी-बूटियों से डायबिटीज का मेटाबोलिक उपचार डायबिटीज का सबसे कारगर प्राकृतिक उपचार है.
Author
Publisher Name
Thinking Is A Job
Publisher Logo

Comments

  1. Pingback: एक डाइट चार्ट जो आपकी जिन्दगी बदल दे

आपकी क्या राय है? लिखने में संकोच न करें.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.