क्या चीनी खाने से डायबिटीज होता है

अगर आप चीनी या मीठा खाते हैं तो आपको कई लोगों ने सलाह दी होगी कि आप इतना मीठा न खाएँ वरना आपको डायबिटीज हो सकता है. ऐसा सुनकर कई बार लोग सोच में पड़ जाते हैं कि क्या मीठा खाने से डायबिटीज होगा? आपको क्या लगता है? क्या सचमुच ऐसा होता है?

अगर आप डायबिटीज से पीड़ित हैं तो आपको सचमुच चीनी का उपभोग कम कर देना चाहिए. लेकिन, क्या अधिक मीठा खाने से सचमुच डायबिटीज हो सकता है? क्या आपके मीठा खाने की आदत आपके टेस्ट रिजल्ट को खट्टा कर सकती है? इस सवाल का जवाब जानने के लिये इस आर्टिकल को पूरा पढ़ें.

चीनी क्या है?

सब्जियों, फलों और दुग्ध उत्पादों में प्राकृतिक रूप से चीनी पाई जाती है. जब हम इन चीज़ों को प्रत्यक्ष रूप से खाते हैं तो हम उनमें पाए जाने वाले शुगर का उपभोग करते हैं. कुछ लोग सब्जियों, फलों और दुग्ध उत्पादों को भोजन या पेय पदार्थ में मिलाकर उपभोग करते हैं.

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हमारे चाय या पेय पदार्थों में मिलाई जानेवाली चीनी को एडेड शुगर के नाम से जाना जाता है. एडेड शुगर कई रूप में पाए जाते हैं:

  • टेबल शुगर: टेबल शुगर का प्रयोग प्रायः चाय बनाने में किया जाता है.
  • महीन सफेद चीनी: इस प्रकार के सुपरफाइन शुगर का प्रयोग नाश्ता तैयार करने में किया जाता है.
  • छिपी हुई चीनी: छिपी हुई चीनी खाने के लिए तैयार भोजन, केक और चटनी में पाया जाता है.

डायबिटीज में चीनी का उपयोग

किताबों में यही लिखा है और अधिकतर लोग यही मानते हैं कि डायबिटीज दो तरह का होता है – टाइप-1 डायबिटीज और टाइप-2 डायबिटीज. दोनों तरह के डायबिटीज के बीच का अंतर सरल शब्दों में इस प्रकार समझें. टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित मरीजों का इम्यून सिस्टम उनकी इन्सुलिन उत्पादन करनेवाली कोशिकाओं को नष्ट कर देती है. जबकि टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित मरीजों का शरीर पैंक्रियाज के द्वारा उत्पादन होने वाले इन्सुलिन का प्रयोग करने में सक्षम नहीं होता है. और एक बात जो यहाँ पर स्पष्ट कर देना जरुरी है वो यह है कि इनमें से किसी भी तरह की डायबिटीज चीनी खाने से नहीं होती है.

टाइप-2 डायबिटीज होने की घटना को मोटापा से जोड़ा जाता है. मोटापा आसन्न जीवनशैली, जंक फ़ूड खाने और कई अन्य वजहों के कारण हो सकता है. इस प्रकार के डायबिटीज को अप्रत्यक्ष रूप से शुगर खाने से जोड़कर देखा जाता है. अप्रत्यक्ष रूप से शुगर खाने का मतलब है कि आप जंक फ़ूड और चीनी वाले पेय पदार्थों का सेवन कर रहे हों.

इसलिये, अगर आप ऐसे जंक फ़ूड खाते हैं जिनमें चीनी से भरे पेय शामिल हैं तो आप मोटे बनकर टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को निश्चित रूप से बढ़ाते हैं. लेकिन टाइप-2 डायबिटीज एक बहुत ही जटिल बीमारी है. चीनी इसके लिए एकमात्र जिम्मेदार कारण नहीं है.

जरुर पढ़ें: इन्सुलिन हमारे शरीर पर क्या असर डालती है?

क्या डायबिटीज से पीड़ित मरीज़ चीनी खा सकते हैं?

अगर आप डायबिटीज से पीड़ित हैं तो इसका मतलब यह नहीं है कि आप चीनी का प्रयोग बिलकुल बंद कर दें. यदि आप अपने स्वस्थ और संतुलित भोजन में थोड़ी सी चीनी शामिल करते हैं तो इससे कोई समस्या नहीं होगी. एक सत्य यह भी है कि कुछ लोगों के लिए, ग्लूकोज की गोलियां हाइपो के इलाज के लिए आवश्यक होती हैं. हाइपो उस स्थिति को कहा जाता है जब आपके रक्त शर्करा का स्तर बहुत कम हो जाता है. ऐसा तब होता है जब आप मधुमेह की दवा, व्यायाम और खाने वाले भोजन के बीच संतुलन नहीं कर पाते हैं.

बहुत अधिक चीनी खाने से आप मोटे हो सकते हैं, जो बदले में कई अन्य बीमारियों का कारण बन सकता है. अगर आप पहले से ही मोटे हैं तो अपने नाश्ते के बदले इस सप्लीमेंट (आई-स्लिम) का प्रयोग कर सकते हैं.

चीनी का सामान्य सेवन कितना होना चाहिए?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि एक सामान्य बीएमआई वाले वयस्क को प्रतिदिन 6 चम्मच चीनी का सेवन करना चाहिए.

व्यक्तिगत अनुभव: पिछले साल जब मैं डायबिटीज के सबसे सफल उपचार का ऑनलाइन प्रचार कर रहा था तो सैकड़ों लोगों ने उस उपचार को अपनाया. प्रचार में साफ़-साफ़ अक्षरों में लिखा था – “अब जड़ से ख़त्म होता है डायबिटीज”.

जिन लोगों को मेरे प्रचार पर भरोसा नहीं था उन्होंने मुझसे कई सवाल पूछे. कई लोगों ने पहला सवाल यही पूछा कि क्या वे ठीक होने के बाद मीठा अर्थात चीनी से बनी चीज़ें खा सकते हैं या नहीं. मेरा सीधा सा जवाब होता था – ठीक होने के बाद आप रसगुल्ला खाकर अपना ब्लड शुगर चेक करेंगे तो भी आपका ब्लड शुगर नार्मल ही आएगा. और हमारे प्राकृतिक उपचार का छः महीने तक पालन करने के बाद ऐसा ही होता है.

अगर आप भी बिना किसी अंग्रेजी दवा के डायबिटीज से मुक्ति पाना चाहते हैं तो बिना झिझक हमसे बात करें. हमारे उपचार से आपको छः महीने में डायबिटीज से मुक्ति मिल जायेगी.

आपकी क्या राय है? लिखने में संकोच न करें.

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