किडनी की रामबाण दवा – रेनोप्रो एक्सएल

किडनी की रामबाण दवा - रेनोप्रो एक्सएल

रेनोप्रो एक्सएल पाउडर बारह शक्तिशाली जड़ी बूटियों से बना एक पोषण प्रदान करने वाला सप्लीमेंट है. इस हर्बल पाउडर का मुख्य लक्ष्य चयापचय अर्थात मेटाबोलिज्म में सुधार करना है. इस पाउडर का एक चम्मच सुबह खाली पेट और रात को खाने से आधे घंटे पहले हल्का गर्म पानी के साथ लेने से रक्त शर्करा का स्तर सामान्य रहता है. अब आप किसी भी अंग्रेजी दवा के बिना, एक सुरक्षित और प्राकृतिक तरीके से अपनी किडनी को स्वस्थ बना सकते हैं. किडनी की बीमारी (किडनी फेलियर) में रेनोप्रो एक्सएल पाउडर का प्रयोग करके आप तत्काल परिणाम के साथ अपनी किडनी को ठीक कर सकते हैं.

क्या आप प्राकृतिक तरीके से अपनी किडनी को स्वस्थ बनाना चाहते हैं? इसे आजमाएँ.

रेनोप्रो एक्सएल पाउडर में शामिल बारह शक्तिशाली जड़ी-बूटियाँ 100% प्रभावी और वैज्ञानिक तरीके से परीक्षण किए गए विधि का उपयोग करते हुए रोग के कारण पर हमला करती है, न कि केवल लक्षणों पर. कई चिकित्सकों का मानना है कि मेटाबोलिक डाइट चार्ट का पालन करने के साथ इन बारह शक्तिशाली जड़ी-बूटियों से बनी हर्बल सप्लीमेंट्स का सेवन करने से मेटाबोलिज्म को खुद को रिपेयर करने के लिए अनुकूल माहौल प्राप्त होता है. कई अनुसंधानों में यह साबित हो चुका है कि मरीजों की मेटाबोलिज्म स्वस्थ होने के बाद धीरे-धीरे पैंक्रियाज के डेड सेल्स नये सेल्स से रिप्लेस हो जाते हैं. कम शब्दों में कहें तो, डायबिटीज से पीड़ित मरीजों की मूल समस्या ही ख़त्म हो जाती है. आप अपने रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने के लिए स्वाभाविक रूप से अधिक इंसुलिन का उत्पादन कर सकते हैं.

प्रति दिन दो बार रेनोप्रो एक्सएल पाउडर लेने के दौरान आपको बस अपना आहार और जीवन शैली बदलना होगा. आप आश्वस्त रह सकते हैं कि आप उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त करेंगे. यदि आप किडनी की बीमारी से पीड़ित हैं, तो वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित जड़ी-बूटियों से बने रेनोप्रो एक्सएल पाउडर का प्रतिदिन दो बार सेवन करें, और मेटाबोलिक डाइट चार्ट का पालन करें. इस विधि से किडनी को पूरी तरह से स्वस्थ बनाना संभव है. साथ ही साथ किडनी की बीमारी से पीड़ित लोगों को अगर अभी डायलिसिस दी जा रही है, तो धीरे-धीरे डायलिसिस की जरुरत कम महसूस होगी.

किडनी की रामबाण दवा रेनोप्रो एक्सएल पाउडर में निम्नलिखित बारह जड़ी-बूटियाँ हैं.

  1. वरुण (Crataeva nurvala) 16% – वरुण पाउडर का प्रयोग मेटाबोलिज्म की मदद करता है. यह खून साफ़ करने के लिए भी जाना जाता है. यह जड़ी-बूटी मूल रूप से किडनी के कार्यों में सहायता करने के लिए जाना जाता है.
  2. भुई आंवला (Phyllanthus niruri) 08% – यह भारतीय आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति का एक महत्वपूर्ण पौधा है. भुई आंवला का उपयोग पेट, लीवर और किडनी की समस्याओं में किया जाता है. यह पौधा किडनी और लीवर के रोगियों के लिए वरदान माना जाता है.
  3. शिरीष (Albezzia labok) 08% – इसका उपयोग कई बिमारियों के उपचार में होता है क्योंकि यह हमारे शरीर से टोक्सिन निकालने में सक्षम है. इस जड़ी-बूटी के सेवन से सूजन और संक्रमण में भी राहत मिलती है. शिरीष का उपयोग बार-बार पेशाब आना, दर्दनाक पेशाब, पेशाब के रास्ते में संक्रमण इत्यादि में राहत प्रदान करता है.
  4. पुनर्नवा (Boerhaavia diffusa) 16% – पुनर्नवा को रोग निवारण में एक अति महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है. आयुर्वेद के अनुसार, पुनर्नवा को तीनों दोषों (वात, पित्त, कफ) को कम करने के लिए जाना जाता है. इस पौधे का पारंपरिक रूप से किडनी, हृदय और आंतों संबंधी विकारों से जुड़े एडिमा को कम करने के लिए उपयोग किया जाता है. यह लीवर और किडनी का पोषण और समर्थन करता है.
  5. गोखरू (Tribulus terrestris) 12% – गोखरू को मूत्रवर्धक और कामोद्दीपक माना जाता है. यह शरीर की ताकत को बनाए रखने में सहायता करता है. गोखरू पाउडर मूत्र प्रणाली को शुद्ध करने में मदद करता है. यह किसी नैतिक रूप से सिद्ध जहरीले प्रभावों के बिना सिंथेटिक एनाबॉलिक हार्मोन के लिए एक प्राकृतिक हर्बल विकल्प है. गोखरू पाउडर को पुरुषों और महिलाओं के रोगों के लिए रामबाण औषधि माना जाता है.
  6. कासनी (Chicorium intybus) 12% – कासनी आयुर्वेदिक और यूनानी चिकित्सा प्रणाली में सबसे महत्वपूर्ण जड़ी-बूटियों में से एक है. यह अमृत सामान चमत्कारी पौधा किडनी और लीवर के लिए वरदान माना जाता है. कासनी का प्रयोग दर्द में राहत देता है तथा जलन और सूजन कम करता है. कासनी मूत्रवर्धक भी है. यह मूत्र के उत्सर्जन को प्रोत्साहित करता है जो उत्सर्जित मूत्र की मात्रा को बढ़ाता है.
  7. शिग्रु (Moringa oleifera) 08% – यह एक ऐसी जड़ी-बूटी है जो एन्टी-इंफ्लेमेटरी और पाचन ठीक करने वाले गुणों से भरपूर होता है. पूर्वी देशों में इसका उपयोग कई पीढ़ियों से मधुमेह, हृदय रोग, एनीमिया, गठिया, लीवर की बीमारी और श्वसन, त्वचा और पाचन विकार जैसे रोगों का इलाज और रोकथाम करने के लिए किया जाता रहा है.
  8. अपामार्ग (Achyranthes aspera) 04% – यह भूख बढ़ानेवाली एवं असाध्य रोगों को ठीक करने वाली औषधि है. आयुर्वेद में अपामार्ग का प्रयोग एक एन्टी-इंफ्लेमेटरी एजेंट के रूप में बड़े पैमाने पर किया जाता है. इसके अलावा अपामार्ग बवासीर, अपच, खाँसी, अस्थमा, एनीमिया, पीलिया और सांप के काटने में उपयोगी है.
  9. नीम (Azhardirachta indica) 04% – भारत में नीम के पेड़ों से बने उत्पादों को उनके औषधीय गुणों के लिए दो सदियों से भी अधिक समय से इस्तेमाल किया जाता रहा है. नीम उत्पादों को सिद्ध और आयुर्वेदिक चिकित्सकों द्वारा एन्फेल्मंटिक, एंटिफंगल, एंटीबायटीक, एंटीडायबिटिक, एंटीवायरल, गर्भनिरोधक और शामक होना माना जाता है. नीम में मधुमेह विरोधी, फंगसरोधी, रक्त को शुद्ध करने वाले और शुक्राणुनाशक गुण होते हैं.
  10. तुलसी (Ocimum Sanctum) 04% – तुलसी जलन और सूजन कम करने और जीवाणुरोधी गुणों से समृद्ध है. यह सामान्य सर्दी, पाचन समस्याओं, श्वास समस्याओं, तनाव, रक्त शर्करा, हृदय की समस्याओं, बुखार और यहां तक ​​कि अल्सर सहित लगभग सभी बीमारियों में राहत देने के लिए जाना जाता है.
  11. पीपल की छाल (Ficus religiosa) 04% – पीपल एक आयुर्वेदिक पेड़ है. खाँसी, त्वचा रोगों के उपचार, त्वचा के रंग में सुधार, मतली, उल्टी, दस्त और यौन शक्ति में सुधार के लिए पीपल की छाल का इस्तेमाल किया जाता है. पीपल की छाल का प्रयोग करने से आप बहुत सी बीमारियों से बच सकते हैं.
  12. दालचीनी (Cinnamomum zeylanicum) 04% – दालचीनी एक रक्‍तशोधक है जो कई खतरनाक बीमारियों से राहत दिला सकता है. दालचीनी का उपयोग हजारों वर्षों से स्वास्थ्य लाभों के लिए होता रहा है. अतीत में, दालचीनी चिकित्सा की कई स्थितियों का इलाज करने के लिए प्रयोग किया जाता था, जैसे- साँस की बीमारी, स्त्री रोग संबंधी मुद्दे, कब्ज़ की शिकायत आदि.

किडनी के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी इस विडियो में भी है.

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