इन्सुलिन हमारे शरीर पर क्या असर डालती है? हिंदी में पढ़ें.

इन्सुलिन हमें कैसे प्रभावित करती है

अगर आप यह जानना चाहते हैं कि हमारे ब्लड शुगर के स्तरों को नियंत्रित करने के लिए कौन सा खाद्य पदार्थ सबसे अच्छा और कौन सा खाद्य पदार्थ सबसे खराब है तो आपको ग्लाइसेमिक इंडेक्स को ठीक तरह से समझना चाहिए. जैसा कि आपने पहले भी पढ़ा है, जब ब्लड में शुगर का स्तर बहुत अधिक हो जाता है, तो ग्लूकोज को फैलाने के उद्देश्य से पैंक्रियाज (अग्न्याशय) के द्वारा इन्सुलिन को खून में छोड़ दिया जाता है.

इन्सुलिन का काम ग्लूकोज को उन कोशिकाओं तक पहुँचाना है जिन्हें एक्स्ट्रा एनर्जी की जरुरत होती है. कोशिकाओं में “इन्सुलिन रिसेप्टर्स” होते हैं. इन इन्सुलिन रिसेप्टर्स की मदद से इन्सुलिन कोशिकाओं में ग्लूकोज प्रविष्टि और उपयोग की सुविधा प्रदान करती है.

जब ग्लूकोज कोशिकाओं के अंदर प्रवेश कर जाती है, तो गर्मी और एडेनोसिन ट्राइफ़ोसाइफेट (एटीपी) का उत्पादन करने के लिए इसे जला दिया जाता है. एडेनोसिन ट्राइफ़ोसाइफेट एक मॉलिक्यूल है जो सेल की जरुरत के हिसाब से ऊर्जा भंडार और रिहाई करता है.

जब कोशिकाएँ इंसुलिन के प्रभाव की वजह से कम संवेदनशील हो जाती हैं, तो वे ग्लूकोज को स्वीकार करना कम कर देती हैं. और इस प्रकार खून में सामान्य अवशेषों की तुलना में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ जाती है. क्या आप इसके परिणाम का अंदाज़ा लगा सकते हैं? पैंक्रियाज (अग्न्याशय) क्षतिपूर्ति करने के लिये कड़ी मेहनत करके और अधिक इंसुलिन जारी करती है.

इंसुलिन-असंवेदनशीलता और इंसुलिन के अधिक उत्पादन का यह संयोजन आम तौर पर इन दोनों में से एक परिणाम की तरफ ले जाता है.

  1. या तो, पैंक्रियाज बहुत अधिक थक जाती है और इंसुलिन उत्पादन असामान्य रूप से निम्न स्तरों पर धीमा पड़ जाता है. इसका परिणाम यह होता है कि हम टाइप-2 डायबिटीज के शिकार हो जाते हैं.
  2. या फिर, लगभग 30 प्रतिशत मामलों में इंसुलिन प्रतिरोधी रोगी डायबिटीज का शिकार नहीं बनता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पैंक्रियाज पर्याप्त इन्सुलिन का उत्पादन जारी रखती है. लेकिन इसके बजाय, मरीज़ हाइपरइन्सुलिनिज्म (ब्लड में इन्सुलिन का असामान्य रूप से उच्च स्तर होना) का शिकार हो जाता है.

इन्सुलिन और हाइपरइन्सुलिनिज्म

हाइपरइन्सुलिनिज्म का मतलब होता है – ब्लड में इन्सुलिन का असामान्य रूप से उच्च स्तर होना. इसकी वजह से मरीज़ को कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. जैसे – पुराने मोटापे के साथ-साथ उच्च रक्तचाप, ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर बढ़ जाना, एचडीएल यानि अच्छा कोलेस्ट्रॉल कम हो जाना, हृदय रोग और संभवतः कुछ कैंसर का शिकार हो जाना आदि.

निम्न ग्लाइसेमिक इंडेक्स का भोजन खाने से इन्सुलिन का स्तर कम हो जाता है. क्योंकि कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले खाद्य पदार्थ ग्लूकोज में बहुत धीरे-धीरे परिवर्तित होते हैं, जिससे कम इन्सुलिन का उत्पादन होता है.

ध्यान रखें कि इस विषय पर यह अंतिम आर्टिकल नहीं है. इन्सुलिन असंवेदनशीलता और इन्सुलिन के स्तर और मोटापे के बीच का रिश्ता पता लगाने के लिए अनुसन्धान चल रहा है.

इन्सुलिन

हालांकि, उच्च ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले खाद्य पदार्थों और उच्च वसा वाले फास्ट-फूड का अत्यधिक सेवन चिंता का एक प्रमुख कारण है. ग्लाइसेमिक इंडेक्स के नाम से विख्यात नया कार्बोहाइड्रेट वर्गीकरण प्रणाली ब्लड ग्लूकोज के स्तर पर तत्काल प्रभाव के अनुसार खाद्य पदार्थों में कार्बोहाइड्रेट की गुणवत्ता का पता लगाता है.

इस प्रकार, पाचन के दौरान तेजी से ग्लूकोज में बदलने वाले कार्बोहाइड्रेट्स जिनकी वजह से ग्लूकोज के स्तर में तेज़ी से वृद्धि हो सकती है, उनमें उच्च ग्लाइसेमिक इंडेक्स वैल्यू है. लेकिन वैसे कार्बोहाइड्रेट्स जो बहुत धीरे-धीरे ग्लूकोज में बदलते हैं, उन्हें इंटरमीडिएट या कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वैल्यू दिया जाता है.

अगर आप ग्लाइसेमिक इंडेक्स वैल्यू को खुद नहीं समझ पाते हैं तो मेटाबोलिक डाइट चार्ट को अपनाने की कोशिश करें. इसे आप फ्री में डाउनलोड कर सकते हैं.

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कोशिकाओं में "इन्सुलिन रिसेप्टर्स" होते हैं. इन इन्सुलिन रिसेप्टर्स की मदद से इन्सुलिन कोशिकाओं में ग्लूकोज प्रविष्टि और उपयोग की सुविधा प्रदान करती है.
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  1. Pingback: क्या चीनी खाने से आपको डायबिटीज हो सकता है? चीनी खाएँ या नहीं?

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